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Rohingya Court News: उत्तर प्रदेश की एनआईए (NIA) स्पेशल कोर्ट ने अवैध रोहिंग्या मुस्लिमों को फर्जी दस्तावेजों के सहारे भारत में अवैध रूप से बसाने और मानव तस्करी करने वाले एक बड़े रैकेट के चार दोषियों को 7-7 साल की कठोर कैद की सजा सुनाई है. अदालत ने सभी दोषियों पर 40-40 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है. मोहम्मद इस्माइल, अजीजुर रहमान, मुफिजुर रहमान और हाफिज शफीक नामक इन दोषियों ने भारत-बांग्लादेश बॉर्डर से अवैध घुसपैठ कराकर फर्जी आधार कार्ड और पासपोर्ट बनवाए थे. यूपी एटीएस की जांच में महिलाओं की मानव तस्करी और हवाला कारोबार के पुख्ता सबूत भी सामने आए थे.
NIA कोर्ट ने रोहिंग्या को बॉर्डर पार कराने वालों को सात सालों की सजा सुनाई है.
लखनऊ: एनआईए (NIA) स्पेशल कोर्ट ने गुरुवार को देश की सुरक्षा और संप्रभुता से जुड़े संवेदनशील मामले में बड़ा फैसला सुनाया है. फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अवैध रोहिंग्या मुस्लिमों को भारत में अवैध रूप से प्रवेश कराने, उन्हें भारतीय नागरिक के रूप में प्लांट करने और मानव तस्करी का काला कारोबार चलाने वाले चार दोषियों को अदालत ने 7-7 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है. इसके साथ ही प्रत्येक दोषी पर 40-40 हजार रुपए का आर्थिक जुर्माना भी लगाया गया है.
एनआईए स्पेशल कोर्ट द्वारा सजा पाने वाले दोषियों की पहचान मोहम्मद इस्माइल, अजीजुर रहमान उर्फ मोहम्मद अजीस, मुफ़ीजुर रहमान उर्फ मुफ़ीज और हाफिज शफीक उर्फ सबीउल्लाह के रूप में हुई है. इस पूरे मामले की परतें उत्तर प्रदेश आतंकवाद रोधी दस्ते (ATS) द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर के बाद खुली थीं. एटीएस को गुप्त सूचना मिली थी कि एक संगठित आपराधिक गिरोह म्यांमार के रोहिंग्या मुस्लिमों को टारगेट कर रहा है और उन्हें भारत-बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर से अवैध रूप से देश की सीमा के भीतर धकेल रहा है.
फर्जी आधार कार्ड, वोटर आईडी और पासपोर्ट का खेल
एटीएस की गहन जांच में खुलासा हुआ था कि यह गिरोह घुसपैठिए रोहिंग्याओं से भारी-भरकम रकम वसूलता था. इसके बदले में उन्हें भारत के फर्जी आधार कार्ड, फर्जी वोटर कार्ड और कूटरचित पासपोर्ट तैयार करवाकर दिए जाते थे, ताकि वे देश में आसानी से भारतीय नागरिक की तरह रह सकें. इस सिंडिकेट ने राष्ट्रीय सुरक्षा को ताक पर रखकर बड़े पैमाने पर फर्जी दस्तावेजों का जाल फैलाया था. मामले की गंभीरता को देखते हुए एटीएस ने 17 जून 2021 को मेरठ में बड़ी दबिश देकर हाफिज शफीक और मुफिजुर रहमान को गिरफ्तार किया था. इसके बाद इनकी निशानदेही पर खुर्जा से अजीजुर रहमान और मोहम्मद इस्माइल को भी धर दबोचा गया था.
महिलाओं की मानव तस्करी और हवाला नेटवर्क का भी हुआ था खुलासा
जांच का दायरा बढ़ने पर इस गिरोह के काले कारनामों की एक और खौफनाक परत सामने आई. एटीएस की जांच में पता चला कि यह गिरोह केवल अवैध घुसपैठ और दस्तावेजों की हेराफेरी तक सीमित नहीं था, बल्कि महिलाओं को अच्छी नौकरियों और जीवन का झांसा देकर हवाई मार्ग से मलेशिया तथा अन्य देशों में बेचकर मानव तस्करी (Human Trafficking) के जघन्य अपराध को भी अंजाम दे रहा था. इस अवैध धंधे से कमाए गए काले धन को सफेद करने के लिए अलग-अलग बैंकों में फर्जी खाते खोले गए थे और हवाला नेटवर्क के जरिए भारी रकम का लेनदेन किया जा रहा था.
जुर्म कबूलने के बाद अदालत ने सुनाया फैसला
इस हाई-प्रोफाइल मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत में कुल 13 गवाहों को पेश किया गया और पुख्ता सबूत रखे गए. अपने खिलाफ मजबूत सबूत और गवाहों को देखकर सभी आरोपियों ने अंततः अदालत में अपना जुर्म स्वीकार कर लिया. कोर्ट ने दोषियों द्वारा जुर्म कबूल किए जाने के बाद कानून सम्मत यह सख्त सजा सुनाई है, जिससे देश विरोधी गतिविधियों में लिप्त तत्वों को कड़ा संदेश मिला है.
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सिविल सर्विसेज की तैयारी करते-करते कब 4 साल पहले पत्रकारिता की ओर झुकाव हो गया पता ही नहीं चला. नाम दीप राज दीपक है. वर्तमान में News18 हिंदी के साथ जुड़े हुए हैं. पद सब-एडिटर …
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