लखीमपुर खीरी: उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के तराई इलाके में शारदा नदी का कटान लगातार ग्रामीणों के लिए मुसीबत बनता जा रहा है. नदी के तेज बहाव और लगातार हो रहे कटान के कारण रूरा सुल्तानपुर गांव का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है. हालात ऐसे हैं कि अब तक करीब आठ मकान शारदा नदी की धारा में समा चुके हैं, जबकि कई अन्य मकानों पर भी कटान का खतरा मंडरा रहा है. अपने वर्षों की मेहनत से बनाए आशियाने को आंखों के सामने नदी में समाते देख ग्रामीणों के सामने अब रहने की समस्या खड़ी हो गई है.
कटान की वजह से प्रभावित परिवारों को अपना घर छोड़कर दूसरे लोगों के घरों में शरण लेने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. शारदा नदी लगातार तेजी से जमीन काट रही है, जिस कारण लगातार ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ती जा रही है.
लोगों में दहशत का माहौल
पिछले 15 दिनों से शारदा नदी का कटान लगातार जारी है. नदी की धारा जिस तेजी से गांव की ओर बढ़ रही है, उससे लोगों में दहशत का माहौल है. कई परिवार अपने मकानों और सामान को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने में जुटे हुए हैं. जिन परिवारों के मकान नदी के बिल्कुल किनारे पहुंच चुके हैं, वह खुद ही अपना आशियाना तोड़कर सामान निकाल रहे हैं और सुरक्षित स्थान की तलाश में पलायन कर रहे हैं.
देखते ही देखते नदी में समा गए मकान
रूरा सुल्तानपुर गांव में शारदा नदी का कटान ग्रामीणों के लिए किसी त्रासदी से कम नहीं है. जिन मकानों में कुछ समय पहले तक परिवार हंसी-खुशी रह रहे थे, वे अब नदी की धारा में समा चुके हैं. मकान नदी में समाने के बाद प्रभावित परिवारों के सामने सबसे बड़ी समस्या सिर छिपाने की है. जिन लोगों ने अपने जीवन की जमा पूंजी लगाकर घर बनाया था, उनके पास अब सुरक्षित ठिकाना नहीं बचा है. कई परिवार रिश्तेदारों और दूसरे ग्रामीणों के घरों में शरण ले रहे हैं.
15 दिन बाद भी जगह चिन्हित नहीं
कटान पीड़ित ग्रामीणो का आरोप है कि समस्या सामने आने के बावजूद अब तक उनके पुनर्वास के लिए कोई स्थायी व्यवस्था नहीं की गई है. ग्रामीणों के मुताबिक, कटान शुरू हुए करीब 15 दिन बीत चुके हैं, लेकिन प्रभावित परिवारों के लिए सुरक्षित स्थान अभी तक चिन्हित नहीं किया गया है.
प्रशासन की ओर से राहत और पुनर्वास की व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी दिखाई दे रही है. पीड़ित परिवारों का कहना है कि जब मकान नदी में समा रहे हैं और गांव की जमीन लगातार कट रही है. ऐसे समय में सबसे जरूरी कदम प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराना है.
लगातार 15 दिनों से हो रहा कटान
बातचीत करते हुए प्रदीप कुमार बताते हैं कि मेरा मकान नदी में समा गया है. ऐसे मे मेरा परिवार रिश्तेदारों के घरों में शरण ले रहा है. प्रदीप बताते हैं कि अब उनकी मदद प्रशासन ही करेगा. प्रशासन उन्हें जहां उनके लिए जगह आवंटित कराएगा, वही वह चले जाएंगे.
बातचीत करते हुए विनोद कुमार बताते हैं कि 15 दिन हो गया है. लगातार तेजी से कटान हो रहा है. मकान नदी में समा रहे हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से अभी तक कटान पीड़ितों के लिए जगह चिन्हित नहीं की गई है. इस कारण हम लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. विनोद का कहना है कि रोड के किनारे हम लोग अब अपना जीवन यापन करेंगे. जब प्रशासन की ओर से जगह आवंटित कराई जाएगी, तो वहीं विस्थापित हो जाएंगे.
6 पक्के मकान व 2 झोपड़ी नदी में समाए
क्षेत्रीय लेखपाल राजीव वर्मा ने फोन पर जानकारी देते हुए बताया कि अब तक करीब से 6 पक्के मकान व 2 झोपड़ी नदी में समा गई है. ऐसे में जिन लोगों के मकान नदी में समाए हैं, उन्हें 120000 रुपए की आर्थिक सहायता की जाएगी. वही जिन लोगों की झोपड़ी नदी में समय है, उन्हें 9000 रुपए की आर्थिक सहायता की जाएगी.
