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Farming Idea : प्रगतिशील किसान बाजार की नब्ज जानता है. इसी के हिसाब से वह अपनी खेती को ढालता है और उसी खेत से पैसे पीटता है, जो कई किसानों के लिए घाटे का सौदा बन चुकी है. गोंडा के किसान सूरज मौर्य इन दिनों यही कर रहे हैं. लोकल 18 ने सूरज से बात की. वे बताते हैं कि वह 12वीं की पढ़ाई कर रहे हैं. पढ़ाई के साथ-साथ खेती भी करते हैं. इस बार करीब एक बीघे में हाइब्रिड वैरायटी का बोड़ा लगाया है. बोड़ा की एक बीघा खेती में 60 से 70 हजार रुपये की लागत आई है. इतना ही मुनाफ हो जाएगा. बोड़ा के पौधे 45 दिन बाद फल देना शुरू कर देते हैं. सूरज की चाहत है कि उनके खेतों में तैयार होने वाली ऑर्गेनिक सब्जियों की सप्लाई पूरे देश और विदेश तक हो.
गोंडा. उत्तर प्रदेश में गोंडा जिले के युवा किसान सूरज मौर्य खेती में नई पहल कर रहे हैं. इंटर की पढ़ाई के साथ वह खेती-किसानी भी करते हैं. उन्होंने एक बीघे में हाइब्रिड वैरायटी के बोड़ा की खेती शुरू की है. इस खेती से उन्हें अच्छी कमाई की उम्मीद है. लोकल 18 से किसान सूरज मौर्य बताते हैं कि वह 12वीं की पढ़ाई कर रहे हैं. पढ़ाई के साथ-साथ खेती भी करते हैं. इस बार करीब एक बीघे में हाइब्रिड वैरायटी के बोड़ा की खेती कर रहे हैं. सूरज के मुताबिक, बोड़ा की एक बीघा खेती में 60 से 70 हजार रुपये की लागत आई है. यह चार से पांच महीने की फसल होती है. इसकी खेती से 40 से 50 हजार रुपये तक के मुनाफे की उम्मीद है. बोड़ा की फसल 45 दिन बाद फल देना शुरू कर देती है.
ऑर्गेनिक खेती को भी बढ़ावा
सूरज मौर्य ने बताया कि वह पिछले दो साल से ऑर्गेनिक खेती का ट्रायल कर रहे हैं. इस दिशा में उन्हें सफलता भी मिल रही है. अब वह भविष्य में ऑर्गेनिक खेती को और आगे बढ़ाना चाहते हैं. सूरज ने बताया कि उनका सपना है कि उनके खेतों में तैयार होने वाली ऑर्गेनिक सब्जियों की सप्लाई पूरे देश और विदेश तक हो. सूरज का कहना है कि वह खेती में नए प्रयोग करते हुए आगे बढ़ना चाहते हैं.
दूसरे किसानों के लिए प्रेरणा
सूरज कहते हैं कि मचान विधि से खेती का बारिश के मौसम में काफी फायदा होता है. जमीन पर जलभराव हो जाने से फसल खराब हो सकती है. मचान विधि पर फसल ऊपर रहती है, इसलिए खराब नहीं होती है. गोंडा जिले में कई किसान पारंपरिक फसलों के साथ सब्जियों और दूसरी फसलों की खेती भी कर रहे हैं. सूरज मौर्य ने भी कुछ नया करने की सोच के साथ बोड़ा की खेती शुरू की है. उनकी मेहनत और खेती में नए प्रयोग दूसरे किसानों को भी नई फसलें अपनाने के लिए प्रेरित कर सकते हैं.
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प्रियांशु को एक दशक से ज्यादा हो गए पत्रकारिता में. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी कर अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. यहां लंबे समय तक हरिया…
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