यूपी विधानसभा चुनाव में जुट चुकी भाजपा ने अलग-अलग स्रोतों से जिताऊ प्रत्याशियों की तलाश तेज कर दी है। इससे कई विधायकों की नींद उड़ी हुई है। फिलहाल ज्यादा फोकस हारी हुई और कम मार्जिन वाली सीटों पर है।
यूपी में विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जोर-शोर से पहले ही जुट चुकी सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने जिताऊ चेहरों की तलाश तेज कर दी है। सरकार और संगठन दोनों स्तरों पर यह खोजबीन शुरू की गई है। हारी हुई और कमजोर सीटों पर पार्टी का ज्यादा फोकस है। यही कारण है कि अपनों के साथ ही बाहरी मजबूत चेहरों को भी चिह्नित किया जा रहा है। इस काम में संगठन के साथ ही बाहरी एजेंसियों की भी मदद ली जा रही है। वहीं मौजूदा विधायकों का जमीनी फीडबैक लिया जा रहा है। इससे कई विधायकों की नींद उड़ी हुई है।
भाजपा 2024 के लोकसभा चुनाव के नतीजों से सबक लेकर पुरानी गलतियां दोहराने के मूड में नहीं है। पार्टी ने लोकसभा चुनाव में तमाम ऐसे चेहरों को भी फिर टिकट दे दिया था, जो जनता के बीच भारी अलोकप्रिय थे। काफी पहले प्रत्याशियों के ऐलान ने बहुत से तत्कालीन सांसदों की एंटी इंक्बेंसी को और उभारने का अवसर विपक्ष और विरोधियों को दे दिया था। मगर पार्टी अब ऐसा कोई जोखिम मोल नहीं लेना चाहती। यही कारण है कि अभी से जिताऊ चेहरों की खोजबीन आरंभ कर दी गई है। अलग-अलग स्त्रोतों से इस संबंध में जानकारी जुटाई जा रही है। आरएसएस सहित विचार परिवार के अन्य संगठनों से भी रायशुमारी की जा रही है।
तमाम विधायकों की उड़ी नींद
2022 के विधानसभा चुनाव में प्रदेश में करीब 50 सीटें ऐसी थीं, जिनमें हार-जीत का अंतर पांच हजार वोटों से कम था। इसमें भाजपा की जीती सीटों पर भी पार्टी की नजर है। इसके अलावा हारी हुई सीटों पर भी पार्टी ने विकल्प खुले रखे हैं। पार्टी अपने नेताओं के साथ ही गैर दलों के मजबूत चेहरों को भी चिह्नित करा रही है। भाजपा ने पूरे प्रदेश को छह संगठनात्मक क्षेत्रों में बांट रखा है। क्षेत्रवार हर विधानसभा सीट को लेकर यह ब्योरा तैयार करने को कहा गया है। ऐसे में माना जा रहा है कि पार्टी जनता के बीच अलोकप्रिय चेहरों को इस बार टिकट से वंचित करने के मूड में है। इसी बात ने तमाम विधायकों की नींद उड़ा रखी है।
बीएल संतोष कमजोरियों को दुरुस्त करने में जुटे
विधानसभा चुनाव में कमल फिर से कैसे खिले, संगठनात्मक रणनीति कैसी हो, कमजोरी कहां हैं, किन कमियों को दूर करने की जरूरत है। इन बातों को लेकर भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री संगठन बीएल संतोष ने रविवार को ही कानपुर में 33 विधानसभा क्षेत्रों के 124 मंडल अध्यक्षों, क्षेत्र, प्रदेश, जिला अध्यक्षों एवं महामंत्रियों संग बैठक की थी। सीधे संवाद में मंडल अध्यक्षों से अभी तक हुए आयोजनों से लेकर जनहित कार्यों की जानकारी ली।
बीएल संतोष ने कहा कि संगठन स्तर से तय होने वाले अभियान सिर्फ डायरी में कैद न रहें, बल्कि बूथ और जनता तक पहुंचें। जिले के पदाधिकारी मंडल तो मंडल पदाधिकारी शक्ति केंद्रों पर प्रवास करें। भाजपा संगठन की ताकत बूथ अध्यक्ष हैं। 17 सितंबर से 17 अक्तूबर तक चलने वाले कार्यक्रमों को बूथों और जनता तक पहुंचाएं। इन चीजों की सफलता से ही भाजपा मिशन-2027 सफल होगा। बीएल संतोष ने पार्टीजनों को हाल में नारा दिया कि मंडल से लेकर बूथ तक प्रवास, 2027 में दिलाएगा विश्वास।
