@जे0 के0…..

Sonbhadra। जिस सड़क से दर्जनों गांवों की उम्मीदें जुड़ी थीं, वही सड़क महज दो साल में बदहाली की तस्वीर बन गई। चोपन ब्लॉक के सिंदुरिया-भरहरी संपर्क मार्ग की हालत देखकर निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। करीब 35 किलोमीटर लंबे इस मार्ग का निर्माण पीडब्ल्यूडी प्रांतीय खंड सोनभद्र से कराया गया था। सड़क बनने के बाद ग्रामीणों को आवागमन में बड़ी राहत मिली थी, क्योंकि यह मार्ग उत्तर प्रदेश को मध्य प्रदेश से भी जोड़ता है।

लेकिन अब सड़क की तस्वीर बदल चुकी है। जगह-जगह सड़क टूट गई है और बड़े-बड़े गड्ढे राहगीरों के लिए मुसीबत बन गए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण के कुछ समय बाद से ही सड़क की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठते रहे, लेकिन जिम्मेदारों ने इस ओर गंभीरता नहीं दिखाई।

लाखों की पिचिंग भी नहीं बचा पाई सड़क:-
सड़क की बदहाली दूर करने के लिए इसी साल की शुरुआत में पीडब्ल्यूडी विभाग ने लाखों रुपये खर्च कर दोबारा पिचिंग कराई। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि अब मार्ग की हालत सुधरेगी, लेकिन कुछ ही समय बाद सड़क फिर उखड़ने लगी। हालात यह हैं कि कई स्थानों पर पिचिंग गायब होकर सड़क गड्ढों में तब्दील हो गई है।

ग्रामीणों का कहना है कि अगर नई सड़क दो साल भी नहीं टिक पाई और लाखों रुपये खर्च कर कराई गई मरम्मत भी कुछ समय में जवाब दे गई, तो आखिर निर्माण और मरम्मत कार्य की गुणवत्ता की जिम्मेदारी किसकी है?

बालू के भारी वाहनों ने बढ़ाई मुसीबत :-
इस मार्ग की बदहाली की एक बड़ी वजह बालू खनन से जुड़े भारी वाहनों का दबाव भी माना जा रहा है। नदी से बालू खनन पर एनजीटी के आदेश के तहत तीन माह की रोक के बाद अक्टूबर से एक बार फिर बालू लदे वाहनों की आवाजाही शुरू होने की संभावना है। ऐसे में पहले से जर्जर सड़क पर भारी वाहनों का दबाव बढ़ने से स्थिति और बिगड़ने की आशंका है।
ग्रामीणों का सवाल है कि जब खनन सीजन शुरू होने में अब करीब 15 दिन ही शेष बताए जा रहे हैं, तो क्या विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?

स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से सड़क की गुणवत्ता की जांच कराने, जिम्मेदारी तय करने और बालू वाहनों का दबाव बढ़ने से पहले सड़क की स्थायी मरम्मत कराने की मांग की है। अब देखना होगा कि गड्ढों में तब्दील इस सड़क को लेकर प्रशासन जागता है या फिर सरकारी बजट की तरह सड़क भी गड्ढों में ही दफन होकर रह जाती है।
