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Prayagraj Latest News: इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति जस्टिस डॉ. गौतम चौधरी ने हिंदी में फैसले सुनाने का एक बड़ा रिकॉर्ड बनाया है. उन्होंने अब तक 38,600 से ज्यादा फैसले और आदेश हिंदी में दिए हैं. उनका मानना है कि सिर्फ न्याय देना ही काफी नहीं है, बल्कि जिस व्यक्ति के लिए फैसला दिया जा रहा है, उसे वह आसानी से समझ भी आना चाहिए. हिंदी में उनके हजारों फैसले न्याय को आम लोगों तक उनकी अपनी भाषा में पहुंचाने की मिसाल बन गए हैं.
इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति जस्टिस डॉ. गौतम चौधरी.
प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति जस्टिस डॉक्टर गौतम चौधरी ने हिंदी में फैसला सुनाने का नया रिकॉर्ड कायम किया है. उन्होंने 38,600 से अधिक फैसले हिन्दी में देकर इतिहास रच दिया है. न्यायिक कार्यप्रणाली में हिन्दी के व्यापक और प्रभावी उपयोग को लेकर जस्टिस डॉ गौतम चौधरी का योगदान मिसाल बनकर सामने आया है. न्यायिक दायित्वों का निर्वहन करते हुए उन्होंने अब तक 38,600 से अधिक निर्णय और आदेश हिन्दी भाषा में पारित किए हैं. उन्होंने 10 सितंबर 2024 तक 21,000 से ज्यादा फैसले सिर्फ अपने 5 साल के कार्यकाल में हिन्दी में सुना दिए थे.
जस्टिस डॉ गौतम चौधरी के लिए हिन्दी सिर्फ संवाद का माध्यम नहीं है, बल्कि अपनी जड़ों, संस्कृति और आमजन से जुड़ने की सहज कड़ी है. लगभग एक लाख निर्णयों और आदेशों के उनके विस्तृत न्यायिक कार्यकाल में इतनी बड़ी संख्या में हिन्दी में निर्णय देना मातृभाषा के प्रति उनकी अटूट निष्ठा और प्रतिबद्धता को दर्शा रहा है. जस्टिस डॉ गौतम चौधरी का दृढ़ विश्वास है कि केवल न्याय करना ही पर्याप्त नहीं है बल्कि जिस व्यक्ति के लिए न्याय किया जा रहा है, उसे वह स्पष्ट रूप से समझ में भी आना चाहिए.
अपनी भाषा में निर्णय मिलने से एक सामान्य नागरिक के लिए न्याय की पहुंच अधिक सरल और सार्थक हो जाती है. जस्टिस डॉ चौधरी के लिए हिन्दी का यह प्रयोग केवल औपचारिक या भाषाई विकल्प नहीं है. वह हिन्दी को मां का दर्जा देते हैं और मानते हैं कि हिन्दी में न्यायिक लेखन करना भाषा के प्रति सम्मान के साथ उस समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाना है, जिसके लिए न्यायपालिका कार्यरत है.
हिन्दी में विधिक अवधारणाओं को सटीकता से व्यक्त कर जस्टिस डॉ गौतम चौधरी ने यह साबित किया है कि हिन्दी में उच्च स्तरीय न्यायिक लेखन पूरी तरह संभव है और यह न्याय प्रणाली को अधिक मानवीय व जनोन्मुख बनाता है. उनके द्वारा दिए गए ये हजारों निर्णय आने वाले समय में न्यायिक अधिकारियों, वकीलों, विधि छात्रों और शोधार्थियों के लिए एक मूल्यवान अध्ययन स्रोत और विधिक शब्दावली की समृद्ध धरोहर साबित होंगे.
14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाएगा. कई सरकारी विभागों में हिंदी पखवाड़ा भी मनाया जाता है. ऐसे में हिंदी भाषा में 38600 से ज्यादा फैसला सुनाने का जस्टिस डॉक्टर गौतम चौधरी का है यह रिकॉर्ड अपने आप में एक मिसाल है. जस्टिस डॉ गौतम चौधरी का 9 नवंबर 1964 को हुआ. जस्टिस डॉ गौतम चौधरी के दादा श्यामलाल को ब्रिटिश काल में राय साहब चौधरी की उपाधि अंग्रेजों ने दी थी.
देश की आजादी के बाद दो बार विधायक चुने गए. जस्टिस डॉक्टर गौतम चौधरी के पिता चौधरी चुन्नीलाल इलाहाबाद हाईकोर्ट में अधिवक्ता थे. बाद में वह यूपी लोक सेवा आयोग के सदस्य और राज्यसभा के सांसद भी बने. बॉयज हाई स्कूल से हाई स्कूल और जीआईसी से इंटरमीडिएट करने के बाद इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से एलएलबी की डिग्री हासिल की. जस्टिस चौधरी 6 मार्च 1993 को अधिवक्ता के रूप में इनरोल हुए.
12 दिसंबर 2019 को वह इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति बने. वहीं स्थाई न्यायमूर्ति के रूप में 26 मार्च 2021 को शपथ ली. जबकि 8 नवंबर 2026 को वह न्यायमूर्ति के पद से रिटायर हो जाएंगे. मौजूदा समय में डॉक्टर जस्टिस गौतम चौधरी बलिया जिले अदालत के एडमिनिस्ट्रेटिव जज भी हैं.
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अभिजीत चौहान, News18 Hindi के डिजिटल विंग में सब-एडिटर हैं. वर्तमान में अभिजीत उत्तर प्रदेश की राजनीति, सामाजिक मुद्दों, क्राइम, ब्रेकिंग न्यूज और वायरल ख़बरें कवरेज कर रहे हैं. AAFT कॉलेज से पत्रकारिता की मास्…
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