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Common fever and scrub typhus difference : बारिश के मौसम में ज्यादातर लोग बुखार से परेशान रहते हैं. अक्सर लोग स्क्रब टाइफस को सामान्य बुखार समझ लेते हैं. ये गलती आगे चलकर घातक हो सकती है. थोड़ी सी लापरवाही से मरीजों की जान तक जा सकती है. आइये जानते हैं कि स्क्रब टाइफस और सामान्य बुखार में क्या अंतर है. लोकल 18 ने इस बारे में मऊ के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सुमंत गुप्ता से बात की. डॉ. सुमंत बताते हैं कि स्क्रब टाइफस बुखार लाल घुन के काटने से होता है. जहां ये काटते हैं, वहां काले रंग के निशान पड़ जाते हैं. सामान्य बुखार में लोगों को सर्दी और जुकाम के साथ खांसी होती है.
मऊ. बरसात का मौसम चल रहा है. कई बीमारियां तेजी से फैल रही हैं. अधिकतर लोग बुखार से परेशान हैं. अक्सर लोग स्क्रब टाइफस को सामान्य बुखार समझ लेते हैं. आइए जानते हैं कि सामान्य बुखार और स्क्रब टाइफस बुखार में क्या अंतर है और कौन सा बुखार कितना घातक है. लोकल 18 से मऊ स्थित केशरीराज हॉस्पिटल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सुमंत कुमार गुप्ता बताते हैं कि सामान्य बुखार नॉर्मल होता है, लेकिन स्क्रब टाइफस बुखार काफी घातक होता है. इस बुखार में कई प्रकार की परेशानियां उठानी पड़ती हैं. अगर आप लापरवाही करते हैं तो फेफड़ों में इंफेक्शन हो सकता है. फेफड़े में इंफेक्शन होने से जान तक जा सकती है.
गांव वालों को खतरा ज्यादा
डॉ. सुमंत गुप्ता बताते हैं कि स्क्रब टाइफस बुखार लाल घुन के काटने से होता है. जहां ये काटते हैं, वहां काले रंग के निशान हो जाते हैं. जब यह काटता है तो नॉर्मली पता नहीं चलता. धीरे-धीरे 10 से 15 दिनों बाद तेज बुखार होने लगता है और पूरा शरीर दर्द करने लगता है. जबकि सामान्य बुखार में लोगों को सर्दी और जुकाम के साथ खांसी होती है. स्क्रब टाइफस बुखार का लक्षण दिखते ही किसी योग्य चिकित्सक को दिखाकर इलाज प्रारंभ कर दें. यह समस्या ग्रामीण इलाकों में ज्यादा होती है. घास और झाड़ियां के बीच ये कीड़े अधिक होते हैं.
14 दिन का कोर्स
डॉ. सुमंत के मुताबिक, अगर स्क्रब टायफस बुखार की पहचान हो गई है तो इससे निजात के लिए 14 दिन का कोर्स होता है. इसका इलाज आसान है, लेकिन लापरवाही करने या सही समय पर इलाज नहीं कराने पर फेफड़े में इंफेक्शन हो सकता है. निमोनिया के साथ दिमागी बुखार हो सकता है, जो इतनी घातक बीमारियां हैं कि जान तक जा सकती है. इसलिए स्क्रब टाइफस बुखार होने पर तुरंत इलाज शुरू करना जरूरी है.
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प्रियांशु को एक दशक से ज्यादा हो गए पत्रकारिता में. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी कर अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. यहां लंबे समय तक हरिया…
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