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हार्ट अटैक में अब जेन-जी बनेंगे जीवनरक्षक, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन देगा ट्रेनिंग, Uttar-pradesh Hindi News

Admin by Admin
September 12, 2026
in उत्तर प्रदेश
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हार्ट अटैक में अब जेन-जी बनेंगे जीवनरक्षक, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन देगा ट्रेनिंग, Uttar-pradesh Hindi News


हार्ट अटैक में अब जेन-जी जीवनरक्षक बनेंगे। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन देशभर के युवाओं को ट्रेनिंग देने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए अभियान चलाया जाएगा जिसके तहत डॉक्टर स्कूल-कॉलेजों में पहुंचकर छात्र-छात्राओं को सीपीआर देने का व्यावहारिक प्रशिक्षण देंगे।

हार्ट अटैक जैसी आपात स्थिति में अस्पताल पहुंचने से पहले की मदद किसी की जिंदगी बचाने में निर्णायक साबित हो सकती है। इसी सोच के साथ इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने युवाओं को सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) का प्रशिक्षण देने की राष्ट्रीय स्तर पर योजना तैयार की है। इसके तहत डॉक्टर स्कूल-कॉलेजों में पहुंचकर छात्र-छात्राओं को सीपीआर देने का व्यावहारिक प्रशिक्षण देंगे। आईएमए सीपीआर की ट्रेनिंग देगा।

योजना में एनसीसी और एनएसएस के स्वयंसेवकों को विशेष रूप से प्रशिक्षित करने पर जोर दिया गया है। आईएमए स्कूल-कॉलेज प्रबंधन से संपर्क बढ़ाकर प्रशिक्षण कार्यक्रमों के आयोजन की दिशा में काम कर रहा है। उद्देश्य है कि युवा आपात स्थिति में घबराने के बजाय सही समय पर सही कदम उठा सकें और एंबुलेंस या चिकित्सा सहायता पहुंचने तक मरीज की जान बचाने में मददगार बनें।

आईएमए अलीगढ़ शाखा के अध्यक्ष डॉ. प्रदीप बंसल का कहना है कि बड़ी संख्या में युवाओं को बेसिक लाइफ सपोर्ट और सीपीआर का प्रशिक्षण मिलने से समाज में प्रशिक्षित ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ तैयार होंगे। ये लोग सार्वजनिक स्थानों, घरों और सड़क हादसों जैसी परिस्थितियों में शुरुआती मदद दे सकेंगे।

पानी में डूबने से लेकर हार्ट अटैक तक, संजीवनी है सीपीआर

डॉ. बंसल ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि हार्ट अटैक में व्यक्ति के बेहोश होने और सामान्य सांस न लेने की स्थिति में तत्काल सीपीआर शुरू करना महत्वपूर्ण हो सकता है। पानी में डूबने के बाद सांस और हृदय की गतिविधि रुकने की स्थिति में भी सीपीआर जीवनरक्षक साबित हो सकता है। हालांकि ऐसी स्थिति में प्रशिक्षित व्यक्ति द्वारा तुरंत आपात चिकित्सा सहायता बुलाना भी जरूरी है। ऐसे में चिकित्सा सहायता आने तक सीपीआर मददगार हो सकता है।

लकवे में बरतें सावधानी

स्ट्रोक यानी लकवे के दौरे में मरीज को आराम से लिटाकर, सुरक्षित करवट में रखना और तुरंत चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है। उसे जबरन पानी, खाना या दवा देने से बचना चाहिए। समय पर अस्पताल पहुंचाना ही मरीज की हालत बिगड़ने से रोकने का सबसे अहम कदम है। इसके लिए भी ट्रेनिंग दी जानी है। इससे लोगों को जरूरत के समय सही कदम उठाने में सहायता मिलेगी।

बढ़ रहे केस

बता दें कि पिछले कुछ समय से हार्ट अटैक के केसों में इजाफा हुआ है। इससे बचने के लिए लोगों को ट्रेनिंग दी जा रही है।



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