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कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: मां ने गहने बेचे, पिता ने सुने ताने, अब रात भर जागा परिवार, बेटी यामिनी मौर्य ने रचा इतिहास

Admin by Admin
September 11, 2026
in खेल
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कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: मां ने गहने बेचे, पिता ने सुने ताने, अब रात भर जागा परिवार, बेटी यामिनी मौर्य ने रचा इतिहास


Last Updated:August 02, 2026, 15:02 IST

​Success Story Yamini Maurya: सरकारी स्कूल की दहलीज से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर तिरंगा लहराने वाली यामिनी की कहानी बेहद प्रेरणादायक है. पैर टूटने जैसी गंभीर चोट और सीमित संसाधनों के बावजूद यामिनी के हौसले पस्त नहीं हुए. ​अभ्यास के दौरान एक समय ऐसा भी आया जब यामिनी का पैर टूट गया था. डॉक्टर और खेल विशेषज्ञों ने करियर पर संकट बताया, लेकिन यामिनी ने हार नहीं मानी और चोट से उबरकर दोगुनी ताकत से मैट पर वापसी की.

पिता ने सुने ताने, अब रात भर जागा परिवार, बेटी यामिनी मौर्य ने रच दिया इतिहासZoom

सागर की बेटी यामिनी मौर्य ने कॉमनवेल्थ गेम्स में रचा इतिहास

सागर. मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड अंचल की बेटियों के हुनर का डंका एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बजा है. सागर जिले की रहने वाली यामिनी मौर्य ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में जूडो की 57 किलोग्राम भारवर्ग स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक अपने नाम किया है. एक साधारण किसान परिवार से निकलकर इस मुकाम तक पहुंची यामिनी की यह सफलता संघर्ष, लगन और दृढ़ संकल्प की मिसाल बन गई है.

​फाइनल मुकाबले में दिखाई जबरदस्त फाइट ​प्रतियोगिता के दौरान यामिनी ने अपने आक्रामक खेल से विरोधियों को धूल चटाते हुए फाइनल में प्रवेश किया था जहां स्वर्ण पदक के लिए हुए रोमांचक कड़े और संघर्षपूर्ण मुकाबले में भले ही यामिनी को हार का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने भारत की झोली में रजत पदक डालकर पूरे देश और मध्य प्रदेश को गौरवान्वित कर दिया. ​

सरकारी स्कूल से अंतरराष्ट्रीय मंच तक
यामिनी को यह सफलता रातों-रात नहीं मिली, इसके पीछे वर्षों का कड़ा अभ्यास और पारिवारिक त्याग छिपा है .​सीमित साधन, बड़ा सपना, सागर के पुरानी सदर निवासी हरिओम मौर्य की सबसे बड़ी बेटी यामिनी ने अपनी शुरुआती पढ़ाई सरकारी स्कूल से की. बुंदेलखंड जैसे क्षेत्र में, जहां खेल सुविधाओं का अभाव रहता है, वहां उन्होंने सीमित साधनों में अभ्यास शुरू किया. यामिनी के शुरुआती कोच दीपक कुमार ने उसकी प्रतिभा को पहचान कर उसके पिता को उसे स्थानीय खेल परिसर में प्रशिक्षण लेने की सलाह दी, कोच की सलाह पर यामिनी के पिता ने उसे आगे बढ़ाया और आज परिणाम सबके सामने है.

​पिता के संघर्ष को बनाया ताकत
पिता छोटे किसान हैं, जिन्होंने तंगहाली के बावजूद बेटी के सपनों से समझौता नहीं किया. जब बेहतर ट्रेनिंग के लिए यामिनी को बाहर भेजने की बात आई, तो कोच के समझाने पर परिवार ने अपनी झिझक दरकिनार कर बेटी को आगे बढ़ाया.
​
शुक्रवार रात भर जागा परिवार, अब एशियन गेम्स में ‘गोल्ड’ पर नजर
​शुक्रवार की रात सागर स्थित यामिनी के घर का माहौल उत्सव जैसा था. पूरा परिवार और पड़ोसी टीवी स्क्रीन पर नजरें टिकाए बैठे थे. पदक पक्का होते ही शहर में खुशी की लहर दौड़ गई. खेल प्रेमियों, जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने परिवार को बधाई दी है. यामिनी के पिता हरिओम मौर्य का कहना है कि हमें अपनी बेटी पर गर्व है. इस बार भले ही स्वर्ण चूक गया हो, लेकिन हमें पूरा विश्वास है कि आगामी एशियन गेम्स और अन्य अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में यामिनी देश के लिए स्वर्ण पदक जीतकर लाएगी. ​यामिनी मौर्य की यह ऐतिहासिक उपलब्धि सागर ही नहीं, बल्कि पूरे देश की उन तमाम बेटियों के लिए एक बड़ा संदेश है जो विपरीत परिस्थितियों में भी अपने सपनों को सच करने का जज्बा रखती हैं.

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Mohd Majid

with more than more than 5 years of experience in journalism. It has been two and half year to associated with Network 18 Since 2023. Currently Working as a Senior content Editor at Network 18. Here, I am cover…

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Location :

Sagar,Madhya Pradesh

First Published :

August 02, 2026, 15:02 IST



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