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कुछ कहानियां ऐसी होती हैं, जो खत्म होने के बाद भी खत्म नहीं होतीं. किरदारों का भौकाल, गद्दी की लड़ाई और बदले की आग दर्शकों के दिमाग में लंबे समय तक चलती रहती है. पहले छोटे पर्दे जैसे दिखने वाले OTT ने एक ऐसी ही कहानी को घर-घर पहुंचाया. 29 एपिसोड हुए और हर सीजन के साथ इसका क्रेज बढ़ता गया. फिर वही दुनिया बड़े पर्दे पर उतरी. फर्क सिर्फ इतना था कि इस बार स्क्रीन छोटी नहीं, बल्कि सिनेमाघर का पर्दा था.
नई दिल्ली. भारतीय डिजिटल स्पेस में कुछ कहानियां ऐसी होती हैं जो सिर्फ दर्शकों का मनोरंजन नहीं करतीं, बल्कि पॉप-कल्चर का हिस्सा बन जाती हैं. जब साल 2018 में ओटीटी प्लेटफॉर्म पर बंदूक की गोलियों, राजनीति, बदले और गद्दी की जंग से भरी एक खूनी कहानी शुरू हुई थी, तो किसी ने नहीं सोचा था कि यह भारतीय मनोरंजन जगत के समीकरण बदल कर रख देगी. सालों तक मोबाइल और टीवी स्क्रीन पर राज करने के बाद, इसी कहानी के आइडिया और प्लॉट को बड़े पर्दे पर एक भव्य कैनवास के साथ उतारा गया और देखते ही देखते यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर साबित हो गई.
हम बात कर रहे हैं ओटीटी की ऑल-टाइम ब्लॉकबस्टर सीरीज ‘मिर्जापुर’ की. ‘डर फाइल्स’ और ‘अदालत’ जैसे टीवी शोज में काम कर चुके एक्टर और निर्देशक गुरमीत सिंह ने इस सीरीज के तीनों सीजन्स का निर्देशन करने के बाद अब इसे फीचर फिल्म का रूप देकर सिनेमाघरों में तहलका मचा दिया है. फिल्म में पंकज त्रिपाठी, अली फजल, दिव्येंदु, श्वेता त्रिपाठी, रसिका दुग्गल और रवि किशन जैसे कलाकार फिर नजर आए हैं. फोटो साभार- वीडियो ग्रैब
‘मिर्जापुर’ का पहला सीजन 2018 में आया था. पहले सीजन ने दर्शकों को कालीन भैया (पंकज त्रिपाठी) के अखंड साम्राज्य, उनके बेकाबू बेटे मुन्ना भैया (दिव्येंदु) और दो साधारण भाइयों- गुड्डू पंडित (अली फजल) व बबलू पंडित (विक्रांत मैसी) से मिलवाया. गुड्डू और बबलू की एंट्री ने पूर्वांचल की सत्ता के समीकरण बदल दिए. सीजन के अंत में हुई शादी में कत्लेआम ने पूरे देश के दर्शकों को सन्न कर दिया था. पहले सीजन की आईएमबीडी रेटिंग 8.4 है.
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इसके बाद साल 2020 में दूसरा सीजन आया. दूसरे सीजन में बदले की आग देखने को मिली. भाई और पत्नी को खो चुके गुड्डू पंडित ने कालीन भैया के साम्राज्य को हिलाकर रख दिया. शरद शुक्ला (अंजुम शर्मा) की एंट्री और गद्दी को हथियाने की होड़ ने कहानी को और पेचीदा बना दिया. इस सीजन के फिनाले में मुन्ना भैया का अंत और कालीन भैया का घायल होना सीरीज का सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट बना. दूसरे सीजन की आईएमबीडी रेटिंग 7.3 रही.
साल 2024 में ‘मिर्जापुर’ का तीसरे सीजन आया. जिनमें पूर्वांचल की गद्दी के लिए राजनीतिक शह-मात का खेल खेला गया. कालीन भैया के गायब होने के बाद गुड्डू पंडित ने मिर्जापुर पर अपना कब्जा जमाया, लेकिन सत्ता की भूख और अपनों के धोखे ने हर किरदार को कटघरे में खड़ा कर दिया. तीसरे सीजन की आईएमबीडी रेटिंग 7.6 रही. फोटो साभार- वीडियो ग्रैब
एक समय पर छोटे पर्दे पर निर्देशन की बारिकियां सीखने वाले गुरमीत सिंह ने जब ‘मिर्जापुर’ सीरीज की कमान संभाली, तो उन्होंने भारतीय ओटीटी का इतिहास बदल दिया. 29 एपिसोड्स के जरिए दर्शकों के नस-नस में बसे किरदारों को बड़े पर्दे पर दो-ढाई घंटे में पेश करना बेहद जोखिम भरा काम था. लेकिन फिल्म के निर्देशक गुरमीत सिंह और लेखक पुनीत कृष्णा ने इसी चुनौती को स्वीकार किया. फोटो साभार- वीडियो ग्रैब
हॉलीवुड रिपोर्टर इंडिया से बातचीत में गुरमीत सिंह ने इसे बड़ा जोखिम बताया और कहा कि स्ट्रीमिंग फ्रेंचाइजी को बड़े पर्दे के लिए ‘इवेंट’ में बदलना आसान नहीं था. फिल्म की खास बात यह है कि इसे सिर्फ सीरीज का सीधा दोहराव नहीं बनाया गया. मेकर्स ने इसी दुनिया के पुराने किरदारों के साथ नया सिनेमाई प्लॉट तैयार किया. यही वजह है कि फिल्म से जुड़े कलाकारों ने भी इसे सीरीज से अलग कहानी बताया है. फोटो साभार- वीडियो ग्रैब
29 एपिसोड्स की डिजिटल विरासत का फायदा सीधे तौर पर फिल्म को सिनेमाघरों में मिला. फिल्म ने अपने ओपनिंग वीकेंड में ही छप्परफाड़ कमाई की और महज 6 दिनों के भीतर भारत में 137 करोड़ रुपये से ज्यादा का नेट कलेक्शन कर डाला. जिस कहानी की शुरुआत मोबाइल की स्क्रीन पर ओटीटी प्लेटफॉर्म से हुई थी, उसी के आइडिया पर बनी फिल्म ने अब बड़े पर्दे पर इतिहास रच दिया है. फोटो साभार- वीडियो ग्रैब
गुरमीत सिंह के शानदार निर्देशन और कालीन भैया-गुड्डू पंडित के भौकाल ने साबित कर दिया कि अगर कहानी में दम हो, तो उसे छोटे पर्दे से उठाकर बड़े पर्दे का ‘किंग’ बनाया जा सकता है.

