@जे0 के0…..
— अमृत सरोवर में गिर रहा नाली का गंदा पानी, लाखों की लागत से बने नाले पर उठे सवाल
— छठ पर्व पर व्रती महिलाएं करती हैं पूजा-अर्चना

Sonbhadra। सरकार की ओर से स्वच्छता और जल संरक्षण को लेकर लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं, लेकिन ओबरा नगर पंचायत के खैरटिया वार्ड नंबर-15 में इन प्रयासों पर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि लाखों रुपये की लागत से निर्मित नाली का निर्माण जल निकासी की समुचित व्यवस्था के बिना करा दिया गया। नाली के दोनों छोर बंद होने के कारण गंदा पानी अमृत सरोवर तालाब में गिराया जा रहा है।

स्थानीय लोगों के मुताबिक खैरटिया गांव में बनाई गई नाली से निकलने वाला गंदा पानी और मलमूत्र सीधे अमृत सरोवर में पहुंच रहा है। इससे तालाब का पानी प्रदूषित होने के साथ ही आसपास के लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

लोगों का कहना है कि जिस अमृत सरोवर को जल संरक्षण और धार्मिक आयोजनों के लिए विकसित किया गया, उसी में नाली का गंदा पानी गिराया जाना गंभीर लापरवाही है।

स्थानीय लोगों ने नाली निर्माण की गुणवत्ता और जल निकासी की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि निर्माण कार्य में जेई अखिलेश चतुर्वेदी और तत्कालीन अधिशासी अधिकारी मधुसूदन जायसवाल की भूमिका रही, जबकि नगर पंचायत अध्यक्ष चांदनी देवी के कार्यकाल में भी समस्या का समाधान नहीं कराया गया।

सबसे गंभीर बात यह है कि इसी अमृत सरोवर तालाब में छठ पर्व के दौरान व्रती महिलाएं पूजा-अर्चना करती हैं। ऐसे में तालाब में गंदा पानी गिरने से श्रद्धालुओं की आस्था के साथ-साथ स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं भी बढ़ गई हैं।

स्थानीय लोगों ने मामले की जांच कराकर जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही तय करने तथा नाली के पानी की उचित निकासी की व्यवस्था कराने की मांग की है।
इस मामले में जेई अखिलेश चतुर्वेदी से फोन पर संपर्क किया गया, लेकिन उनका फोन रिसीव नहीं हुआ जिसकी वजह से उनका पक्ष नहीं लिया जा सका।
