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बोल नहीं सकते, सुन नहीं सकते… लेकिन निशाना ऐसा कि जीत लिया गोल्ड मेडल, सुरेंद्र सिंह देवड़ा ने बढ़ाया राजस्थान का मान

Admin by Admin
September 10, 2026
in खेल
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बोल नहीं सकते, सुन नहीं सकते… लेकिन निशाना ऐसा कि जीत लिया गोल्ड मेडल, सुरेंद्र सिंह देवड़ा ने बढ़ाया राजस्थान का मान

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Last Updated:August 05, 2026, 13:09 IST

Surendra Singh Deora Gold Medal: उदयपुर के मूक-बधिर निशानेबाज सुरेंद्र सिंह देवड़ा ने देहरादून में आयोजित जसपाल राणा मेमोरियल कप की 25 मीटर स्पोर्ट्स पिस्टल स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर राजस्थान का मान बढ़ाया है. बचपन से बोलने व सुनने में असमर्थ सुरेंद्र ने कोच डॉ. जितेंद्र सिंह चुंडावत के मार्गदर्शन में कड़ी मेहनत की. वे अब तक 2 स्वर्ण और 3 रजत समेत कुल 5 राष्ट्रीय पदक जीत चुके हैं. उनकी यह ऐतिहासिक उपलब्धि साबित करती है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और सही मार्गदर्शन से किसी भी शारीरिक चुनौती को मात देकर सफलता हासिल की जा सकती है.

कई बार जिंदगी इंसान की राह में कठिन चुनौतियां खड़ी कर देती है, लेकिन कुछ लोग उन्हीं चुनौतियों को अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लेते हैं. उदयपुर के मूक-बधिर निशानेबाज सुरेंद्र सिंह देवड़ा ने भी अपनी मेहनत, धैर्य और अटूट आत्मविश्वास के दम पर ऐसा ही कर दिखाया है. सुनने और बोलने में असमर्थ होने के बावजूद उन्होंने देहरादून में आयोजित जसपाल राणा मेमोरियल कप की 25 मीटर स्पोर्ट्स पिस्टल (डेफ मेन इंडिविजुअल) स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया. उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि ने न केवल मेवाड़, बल्कि पूरे राजस्थान का गौरव बढ़ाया है. सुरेंद्र सिंह देवड़ा की सफलता उन सभी लोगों के लिए प्रेरणास्रोत है, जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को साकार करने का हौसला रखते हैं.

सुरेंद्र सिंह देवड़ा का यह सफर बिल्कुल भी आसान नहीं रहा. बचपन से ही वे सुनने और बोलने में असमर्थ थे. सामान्य बच्चों की तरह संवाद करना उनके लिए हमेशा एक बड़ी चुनौती रहा. प्रशिक्षण के दौरान कोच के निर्देशों को समझना, प्रतियोगिताओं के दबाव का सामना करना और खुद को मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखना उनके लिए किसी कठिन परीक्षा से कम नहीं था. इसके बावजूद उन्होंने अपनी इस चुनौती को कभी अपनी मंजिल के रास्ते की बाधा नहीं बनने दिया. उन्होंने पूरा ध्यान निशानेबाजी पर केंद्रित रखा और हर कठिनाई को सीखने, खुद को निखारने और आगे बढ़ने का अवसर बनाया.

सुरेंद्र सिंह देवड़ा ने अपने निशानेबाजी करियर की शुरुआत बीएन शूटिंग क्लब से की थी. शुरुआती प्रशिक्षण के बाद वे मेवाड़ राइफल शूटिंग क्लब से जुड़े, जहां नियमित अभ्यास और अनुशासित प्रशिक्षण ने उनके खेल को नई दिशा दी. करीब चार से पांच वर्षों की लगातार मेहनत, समर्पण और अनुशासन ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर का निशानेबाज बना दिया. उनकी प्रतिभा को निखारने में अंतरराष्ट्रीय राइफल एवं पिस्टल कोच डॉ. जितेंद्र सिंह चुंडावत की महत्वपूर्ण भूमिका रही. कोच के मार्गदर्शन और सुरेंद्र की अथक मेहनत ने मिलकर उनकी सफलता की मजबूत नींव रखी, जिसका परिणाम आज राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक के रूप में सामने आया.

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देहरादून में आयोजित इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता में देशभर के प्रतिभाशाली मूक-बधिर निशानेबाजों ने हिस्सा लिया. कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच सुरेंद्र सिंह देवड़ा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया और अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया. यह जीत केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि उन सभी दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा और उम्मीद की नई किरण है, जो सीमित संसाधनों और अनेक चुनौतियों के बावजूद अपने सपनों को साकार करने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं. सुरेंद्र की सफलता यह साबित करती है कि दृढ़ संकल्प, कड़ी मेहनत और आत्मविश्वास के बल पर किसी भी बाधा को पार किया जा सकता है.

अगर सुरेंद्र सिंह देवड़ा के ट्रैक रिकॉर्ड पर नजर डालें, तो उनकी उपलब्धियों का ग्राफ लगातार ऊंचाइयों की ओर बढ़ता नजर आता है. हाल ही में देहरादून में जसपाल राणा मेमोरियल कप में स्वर्ण पदक जीतने से पहले उन्होंने वर्ष 2026 में जयपुर में आयोजित 24वीं राजस्थान स्टेट शूटिंग चैंपियनशिप में रजत पदक हासिल किया था. इससे पहले वर्ष 2025 में अहमदाबाद में आयोजित ऑल इंडिया जी.वी. मावलंकर शूटिंग प्रतियोगिता में भी उन्होंने रजत पदक अपने नाम किया. वहीं, वर्ष 2024 में गोवा में आयोजित इंडिया ओपन राइफल एवं पिस्टल प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया. अब तक सुरेंद्र दो स्वर्ण और तीन रजत सहित कुल पांच राष्ट्रीय पदक जीत चुके हैं, जो उनकी लगातार मेहनत, समर्पण और उत्कृष्ट प्रदर्शन का प्रमाण है.

सुरेंद्र सिंह देवड़ा की सफलता यह साबित करती है कि जीत केवल शारीरिक क्षमता पर नहीं, बल्कि मजबूत इरादों, आत्मविश्वास और निरंतर मेहनत पर निर्भर करती है. उन्होंने अपनी खामोशी को कभी कमजोरी नहीं बनने दिया, बल्कि उसे ही अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लिया. आज वे उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं, जो किसी भी कारण से खुद को दूसरों से कम आंकते हैं. सुरेंद्र का मानना है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो, संकल्प मजबूत हो और मेहनत पूरी ईमानदारी से की जाए, तो दुनिया की कोई भी चुनौती मंजिल तक पहुंचने से नहीं रोक सकती.

First Published :

August 05, 2026, 13:09 IST

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