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ये गोल्ड मेडल हमारा है, हमें इसे जीतना है… मैट के बाहर से कोच की ललकार, अस्मिता डे ने बताई इतिहास रचने की इनसाइड स्टोरी

Admin by Admin
September 10, 2026
in खेल
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ये गोल्ड मेडल हमारा है, हमें इसे जीतना है… मैट के बाहर से कोच की ललकार, अस्मिता डे ने बताई इतिहास रचने की इनसाइड स्टोरी


Last Updated:August 06, 2026, 23:05 IST

Asmita Dey Exclusive: कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में जूडो में भारत को पहला गोल्ड मेडल दिलाकर अस्मिता डे ने नया इतिहास रच दिया. अपनी इस ऐतिहासिक सफलता का श्रेय उन्होंने अपने कोच यशवंत सोलंकी के प्रेरणादायक शब्दों को दिया. एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में अस्मिता ने बताया कि जब वह फाइनल मुकाबले में खेल रही थीं, तब मैट के बाहर से उनके कोच यशपाल सोलंकी ने कहा, ‘ये गोल्ड मेडल हमारा है और इसे जीतना है.’ कोच की इसी ललकार ने उनमें नया जोश भर दिया और उन्होंने इतिहास रच दिया.

ये गोल्ड मेडल हमारा है...अस्मिता डे ने बताई इतिहास रचने की इनसाइड स्टोरी Zoom

अस्मिता डे का अगला लक्ष्य एशियन गेम्स और वर्ल्ड चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतना है.

नई दिल्ली. भारतीय जूडो की उभरती सितारा अस्मिता डे ने कॉमनवेल्थ गेम्स में एक नहीं कहानी लिखी. विशेष बातचीत में युवा जूडोका अस्मिता ने अपने बारे में उन अनसुने पहलुओं को साझा किया, जो उन्हें अन्य खिलाड़ियों से अलग बनाते हैं. उन्होंने अपने कोच यशपाल सोलंकी की सपोर्ट की जमकर तारीफ की जिन्होंने उन्हें गोल्ड मेडल जीतने के लिए प्रेरित किया. अस्मिता ने बचपन से लेकर अभी तक के अपनी संघर्षों के बारे में दिल खोलकर बात की. साथ ही अस्मिता ने आगे के प्लान के बारे में बताया कि उनका अगला लक्ष्य क्या है. आइए जानते हैं अस्मिता के इस सफर की पूरी कहानी.

कॉमनवेल्थ गेम्स में किस रणनीति के साथ गई थीं? आपने हर बाउट जीतकर चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया. सेमीफाइनल बाउट मेजबान स्कॉटलैंड की जूडोका से था. सेमीफाइनल बाउट के बारे में कुछ बताएं?

मेरा यह पहला कॉमनवेल्थ गेम्स था. मैं चैंपियन बनने के इरादे से ग्लासगो पहुंची थी.सेमीफाइनल में जब मेरी फाइट स्कॉटलैंड की लड़की से हुई तो उसने मुझे दो फाउल पहले ही दे दिया था. एक फाउल बनता था लेकिन दूसरा वाला नहीं बन रहा था लेकिन उन लोगों ने दे दिया था. जिसके बाद मैं थोड़ा घबरा गई थी कि ये लोग शायद मेरे साथ चीटिंग कर हैं. क्योंकि वो लड़की स्कॉटलैंड की नंबर वन जूडोका थी. फिर मैंने सोचा कि इसको मारना ही पड़ेगा. हमारे जूडो में चार मिनट के बाद गोल्डन स्कोर होता है. जो खिलाड़ी पहले स्कोर मारता है वो जीत जाता है.फिर मैंने उस लड़की को गोल्डन स्कोर मारा और मैं जीत गई.

फाइनल में आपका सामना कनाडा की जूडोका से हुआ. जो काफी मजबूत थी. आपके मन में उस समय क्या ख्याल आ रहे थे? आपको लगा कि आप कहीं गोल्ड ना चूक जाओ?
मुझे पता था कि वो मुझसे काफी मजबूत थी. लेकिन मैंने इसके बारे में ज्यादा नहीं सोचा. फाइनल जैसे ही शुरू हुआ उसने शुरुआत में ही मेरे खिलाफ कुछ अंक बटोर लिए थे. जिसके बाद दो सेकेंड के लिए मुझे लगा कि मैं शायद हार जाउंगी. उस दौरान मेरे मन में कई सवाल उठ रह थे. मुझे लगा कि मैं सिल्वर ही जीत पाउंगी लेकिन उसके बाद जो कुछ भी हुआ. उसने सबकुछ बदल दिया. मैट के बारे बैठे मेरे कोच यशपाल सोलंकी (Yashpal Solanki) ने जोर से कहा कि ये गोल्ड मेडल हमारा है और हमें इसे जीतना है. इसके बाद मैंने स्कोर मारा और मुकाबले को बराबरी पर ला दिया. उसके बाद गोल्डन स्कोर आया और मैंने यहां बाजी मारी.

आप जूडो में कैसे आईं? इसकी शुरुआत कैसे हुई? किन किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ा. इस बारे में बताएं?
मुझे यहां तक पहुंचने के लिए बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ा. किसी भी चीज को पाने के लिए आपको मेहनत करनी पड़ती है और कोई भी इंसान ऐसा नहीं है जो ये कहे की उसे ये चीज आसानी से हासिल हुई है. भगवान को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था.भगवान श्रीकृष्ण को देख लीजिए. उनका जन्म जेल में हुआ और पैदा होने के बाद वह अपनी मम्मी पापा के पास रह नहीं पाए. जब उनकी लाइफ में इतना संघर्ष हुआ तो हम सभी इंसान हैं और हमें इसे घबराना नहीं चाहिए.मैंने त्रिपुरा में अपने जिले से इसकी शुरुआत की थी. 2015 में मैंने वहां स्कूल में ट्रेनिंग की. जब मैंने अपने पिता को खोया तब लगा कि मेरे लिए सबकुछ खत्म हो गया. लेकिन मेरे कोच ने मुझे मुश्किल समय में मोटिवेट किया.

आपका अगला लक्ष्य क्या है? अब आप किन टूर्नामेंट की तैयारी में जुटेंगी?
मेरा अगला लक्ष्य एशियन गेम्स और वर्ल्ड चैंपियनशिप है.मैं इन टूर्नामेंट में भी गोल्ड मेडल जीतना चाहती हूं. इसके लिए कड़ी मेहनत करूंगी और चैंपियन बनकर देश का नाम रौशन करूंगी. मुझे अपने इस खेल के सिवाय और कुछ नहीं भाता. मैं हर दिन प्रैक्टिस करती हूं.

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Kamlesh Raiचीफ सब एडिटर

कमलेश राय वर्तमान में News18 इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर कार्यरत हैं. 17 वर्षों से अधिक के अपने सुदीर्घ पत्रकारीय सफर में उन्होंने डिजिटल मीडिया की बारीकियों और खबरों की गहरी समझ के साथ एक विशिष्ट पहचान बनाई ह…

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Location :

New Delhi,Delhi

First Published :

August 06, 2026, 23:05 IST



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