एनआईए ने म्यांमार के सशस्त्र समूहों को हथियार और ट्रेनिंग देने के आरोप में एक अमेरिकी और 6 यूक्रेनी नागरिकों के खिलाफ अवैध प्रवेश और प्रवास की धाराओं में चार्जशीट दाखिल की है।
निखिल पाठक, नई दिल्ली
म्यांमार में भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा माने जाने वाले जातीय सशस्त्र समूहों को प्रशिक्षण और हथियार उपलब्ध कराने के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने मंगलवार को एक अमेरिकी समेत 7 विदेशियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया है। मामले में एनआईए ने शुरुआत में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत केस दर्ज किया था, लेकिन आरोपपत्र में आतंकवाद विरोधी कानून यूएपीए की कोई धारा नहीं लगाई है।
चार्जशीट में किन धाराओं में ऐक्शन?
आरोपियों पर भारत में अवैध तरीके से प्रवेश करने, रहने और आवाजाही करने से संबंधित धाराओं में कार्रवाई की गई है। राउज एवेन्यू स्थित विशेष एनआईए न्यायाधीश प्रशांत शर्मा की अदालत में जांच एजेंसी 6 यूक्रेनी नागरिकों और एक अमेरिकी नागरिक के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया है।
UAPA हटाने पर क्या बोली एजेंसी?
एजेंसी की ओर से विशेष लोक अभियोजक राहुल त्यागी ने अदालत को बताया कि मामले की जांच अभी जारी है। यदि जांच में यूएपीए के तहत कोई अपराध बनता पाया गया तो एजेंसी बाद में सप्लीमेंट्री चार्जशीट (पूरक आरोपपत्र) दाखिल कर सकती है। एनआईए ने फिलहाल आरोपियों के खिलाफ आव्रजन और विदेशी नागरिक अधिनियम की धारा- 21 और 23 के तहत आरोप लगाए हैं। अदालत ने आरोपपत्र पर विचार के लिए मामले को एक अक्तूबर के लिए सूचीबद्ध किया है।
करीब 180 दिन से हिरासत में आरोपी
मामले में गिरफ्तार सातों आरोपी करीब 180 दिनों से हिरासत में हैं। आरोपियों में अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरॉन वैनडाइक और यूक्रेन के हुरबा पेट्रो, स्लिवियाक तारस, इवान सुकमानोव्स्की, स्टेफानकिव मारियन, होन्चारुक मैक्सिम और कामिंस्की विक्टर शामिल हैं। एनआईए ने सातों को 13 मार्च को गिरफ्तार कर अदालत से पूछताछ के लिए हिरासत मांगी थी और 16 मार्च को उन्हें 11 दिन की एनआईए हिरासत में भेजा गया था।
दिल्ली, लखनऊ, कोलकाता से गिरफ्तारियां
एजेंसी ने 3 यूक्रेनी नागरिकों को दिल्ली से, 3 को लखनऊ से और अमेरिकी नागरिक को कोलकाता से गिरफ्तार किया था। एजेंसी ने आरोप लगाया था कि आरोपी म्यांमार में सक्रिय जातीय सशस्त्र समूहों का समर्थन कर रहे थे। वे इन समूहों को हथियार, आतंकी गतिविधियों में इस्तेमाल होने वाला सामान और प्रशिक्षण उपलब्ध करा रहे थे। एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया था कि इन समूहों के भारत में सक्रिय कुछ प्रतिबंधित उग्रवादी संगठनों से संबंध हैं।
एके-47 लेकर घूम रहे आतंकियों से संपर्क का आरोप
रिमांड मांगते समय एनआईए ने अदालत को बताया था कि जांच के दौरान ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिनसे पता चलता है कि आरोपी अज्ञात आतंकियों के सीधे संपर्क में थे। एजेंसी के मुताबिक, ये आतंकी एके-47 राइफल लेकर चलते थे और आरोपी उनकी आतंकी तथा गैरकानूनी गतिविधियों में मदद कर रहे थे। एजेंसी के अनुसार, इस तरह की गतिविधियों का भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और हितों पर सीधा असर पड़ता है।
अवैध रूप से की थी सीमा पार
एनआईए के मुताबिक, आरोपी विदेशी नागरिक वैध वीजा पर भारत आए थे। इसके बाद वे संरक्षित क्षेत्र मिजोरम पहुंचे। वहां से ये अवैध रूप से सीमा पार कर म्यांमार गए और वहां सक्रिय जातीय सशस्त्र समूहों से संपर्क साधा। जांच एजेंसी का आरोप है कि आरोपियों ने म्यांमार में मौजूद जातीय सशस्त्र समूहों के सदस्यों को प्रशिक्षण दिया। एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपियों ने यूरोप से भारत के रास्ते ड्रोन की बड़ी खेप मंगाई थी।

