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1993 की डिजास्टर फिल्म, जो बनी प्रोड्यूसर के लिए सिरदर्द, श्रीदेवी का था हॉलीवुड जैसा लुक, 12 दिन तक शूट हुआ गाना

Admin by Admin
September 8, 2026
in मनोरंजन
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1993 की डिजास्टर फिल्म, जो बनी प्रोड्यूसर के लिए सिरदर्द, श्रीदेवी का था हॉलीवुड जैसा लुक, 12 दिन तक शूट हुआ गाना


Last Updated:September 08, 2026, 15:32 IST

नेशनल अवॉर्ड जीतने वाली डिजाइनर नीता लुल्ला ने 1993 की फिल्म ‘रूप की रानी चोरों का राजा’ के लिए दिवंगत स्टार श्रीदेवी का शानदार लुक तैयार करने से जुड़ा एक किस्सा शेयर किया है. उन्होंने बताया कि यह मशहूर कॉस्ट्यूम एडी मर्फी की हॉलीवुड फिल्म ‘कमिंग टू अमेरिका’ से प्रेरित था, जो 1988 में रिलीज हुई थी. नीता ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया, जिसमें वह 1988 में ‘कमिंग टू अमेरिका’ देखने के बारे में बात कर रही हैं.

नीता ने कहा, “1988 में ‘कमिंग टू अमेरिका’ रिलीज हुई थी. मैंने फिल्म देखी और मुझे बहुत मजा आया. कुछ हफ्ते बाद, मुझे श्रीदेवी का फोन आया कि मुझे ‘रूप की रानी चोरों का राजा’ के एक गाने के लिए काम करना है. जब मैं उनसे मिली, तो वह फिल्म और उसके कपड़े मेरे दिमाग में ताजा थे. इसलिए बातचीत के दौरान, मैंने उनसे पूछा कि क्या वह कुछ ऐसा कर सकती हैं जो सच में बहुत भव्य हो – जिसमें पंख हों और कुछ ऐसा जो मैंने पहले सोचा न हो.”

उन्होंने आगे कहा, “अचानक मैंने स्केच बनाना शुरू कर दिया. मैंने स्कर्ट पर कई लेयर्स वाली, ऊपर गोल्ड मेटल की डिटेलिंग और पंखों वाले हेडगियर के साथ इस आउटफिट का स्केच बनाया. वह मुस्कुराईं और बोलीं, ‘क्या तुम सच में ऐसा कर पाओगी?’ मैंने कहा, ‘हां, मैं इसे बनाना चाहती हूं’.” डिजाइनर ने बताया कि जब पूरी मीटिंग खत्म हो गई और इस पर चर्चा करके इसे फाइनल कर लिया गया, तो कपड़े बनाने का काम शुरू हुआ.

डिजाइनर ने कहा, “मैं मशहूर क्रॉफर्ड मार्केट गई और वहां मुझे कुछ बहुत सुंदर पंख मिले. मैंने उनका इस्तेमाल किया और चेन मेल, स्टोन्स, राइन स्टोन्स और मेटल के टुकड़ों को आपस में जोड़कर हेडगियर बनाया और उस पर पंख लगाए. आखिरकार ड्रेस तैयार हो गई और मैं उसे फिटिंग के लिए ले गई. उन्होंने उसे देखा और कहा कि वह पूरे लुक से बहुत खुश थीं. और फिर हमने शूटिंग शुरू की.”

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उन्होंने बताया, “उन दिनों, एक गाने की शूटिंग कम से कम 10 से 12 दिनों तक चलती थी. यह गाना सुबह से लेकर देर रात तक शूट होता था. मुझे याद है कि हर दिन शूट सुबह 9 बजे शुरू होता था, लेकिन खत्म रात 10 या 10:30 बजे के आसपास होता था. और मैं कपड़े वापस ले जाती थी, उन्हें ठीक करती थी, दोबारा फिनिशिंग करती थी, पंखों और ज्वेलरी को चेक करती थी, और जो हिस्से निकल जाते थे उन्हें वापस जोड़ती थी क्योंकि डांस मूव्स बहुत जोरदार थे, और फिर अगले दिन शूट के लिए उन्हें वापस ले जाती थी. और गाना वैसा ही बना जैसा आपने देखा.”

कैप्शन में उन्होंने लिखा: “..एक ऐसी रचना जो आपको बड़े सपने देखना और सिनेमा के इतिहास का हिस्सा बनना सिखाती है. ‘रूप की रानी चोरों का राजा’ के लिए, विजन बहुत बड़ा था और चुनौती भी उतनी ही बड़ी थी.”

डिजाइनर ने कहा, “यह रचना पंखों, राइनस्टोन और हाथ से बनी चीजों से तैयार की गई थी, जिसमें इजिप्टियन पाल्मेट मोटिफ्स के साथ 800 मेटल के टुकड़े लगे थे. यह सेट पर सोची, बनाई और पहनी जा सकने वाली चीजों की सीमाओं को पार करने जैसा था. खुद श्रीदेवी को भी हैरानी थी कि क्या इस विजन को असलियत में बदला जा सकता है. एक आइडिया असाधारण हो सकता है लेकिन उसे कल्पना, कारीगरी और पक्के इरादे से ही हकीकत में बदला जा सकता है.”

‘रूप की रानी चोरों का राजा’ में अनिल कपूर, श्रीदेवी, अनुपम खेर, जॉनी लीवर और जैकी श्रॉफ ने काम किया है. उस समय यह सबसे ज़्यादा बजट वाली हिंदी फिल्म थी. फिल्म का निर्देशन सतीश कौशिक ने किया था और इसे जावेद अख्तर ने लिखा था. 1987 में घोषित इस प्रोजेक्ट का निर्देशन शुरू में शेखर कपूर ने किया था, लेकिन उन्होंने बीच में ही प्रोजेक्ट छोड़ दिया. बाद में उनकी जगह सतीश कौशिक आए.

यह जुगरान नाम के एक अपराधी की कहानी थी, जो बेरहमी से एक कस्टम अधिकारी और एक डॉक्टर की हत्या कर देता है. उनके अनाथ बच्चे मुश्किलों का सामना करते हुए बड़े होते हैं और अपने माता-पिता के हत्यारे से बदला लेने का फैसला करते हैं. बॉक्स ऑफिस पर ये फिल्म बड़ी फ्लॉप रही थी. बोनी कपूर इसके प्रोड्यूसर थे जिन्हें फिल्म के बाद काफी आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ा था. 1993 में सबसे महंगी फिल्म बनाकर बोनी कपूर के लिए ये सिरदर्द बना गया था जिसने बदले में सिर्फ कर्जा दिया था.

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First Published :

September 08, 2026, 15:32 IST



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