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Farming Tips : जब कोई किसान खेती करने के बारे में सोचता है तो उसे कई दफा उसकी पूरी जानकारी नहीं होती है. इससे समय भी काफी लग जाता है और कीमत भी. अगर आप भी खेती करने की सोच रहे हैं वो भी बैंगन, मिर्च और टमाटर की तो ये खबर आपके लिए ही है. आप जान सकते हैं कि सिर्फ 5 काम करके अपनी फसल को दमदार कैसे बनाए.
बैंगन, मिर्च और टमाटर की खेती करने वाले किसान इन दिनों रोपाई की तैयारी कर रहे हैं. अगर आप भी इन सब्जियों के पौधे खेत में लगाने जा रहे हैं तो कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है. अच्छी फसल के लिए सिर्फ बढ़िया पौधे चुनना ही काफी नहीं है बल्कि खेत की तैयारी, पानी की निकासी, पौधों के बीच सही दूरी और सिंचाई का भी ध्यान रखना पड़ता है. छोटी सी लापरवाही आगे चलकर फसल की बढ़वार और पैदावार पर असर डाल सकती है.
बैंगन, मिर्च और टमाटर कम समय में तैयार होकर किसान को अच्छी कमाई का मौका दे सकते हैं इसलिए पौधे लगाने से पहले खेत की तैयारी पर पूरा ध्यान दें. सबसे पहले खेत की साफ सफाई करके अच्छी तरह जुताई करें और मिट्टी को भुरभुरा कर लें. खेत में पानी रुकता है तो निकासी का इंतजाम करें. मिट्टी में अच्छी तरह सड़ी गोबर की खाद या कम्पोस्ट मिलाएं. इसके बाद खेत में जरूरत के हिसाब से क्यारियां या उठी हुई मेड़ बेड बना लें ताकि पानी जमा न हो और पौधों की जड़ों को हवा मिलती रहे.
बैंगन, मिर्च और टमाटर की खेती में किसान सीधे खेत में बीज डालने के बजाय पहले नर्सरी तैयार करके पौधे लगा सकते हैं. इससे शुरुआत में पौधों की अच्छी देखभाल करना आसान रहता है और स्वस्थ पौधे तैयार होने पर खेत में रोपाई की जा सकती है. एक जैसे मजबूत पौधे मिलने से खेत में पौधों की बढ़वार बेहतर रहने में मदद मिलती है. साथ ही कमजोर या रोगग्रस्त पौधों को पहले ही अलग किया जा सकता है. इससे पौधों की शुरुआती बढ़वार और आगे की फसल पर अच्छा असर पड़ सकता है.
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सितंबर में बैंगन, मिर्च और टमाटर की खेती की तैयारी की जा सकती है, लेकिन तीनों का समय थोड़ा अलग रहता है. बैंगन की नर्सरी सितंबर से अक्टूबर में तैयार की जा सकती है और करीब 4 से 5 सप्ताह में पौधे रोपाई लायक हो जाते हैं. मैदानी इलाकों में मिर्च की नर्सरी सितंबर में भी डाली जाती है. टमाटर के लिए उत्तर प्रदेश में जुलाई से सितंबर तक नर्सरी तैयार करने का समय बताया गया है. इसलिए अभी किसान स्वस्थ पौधे तैयार करके मौसम के हिसाब से खेत में रोपाई कर सकते हैं.
रोपाई के लिए पौधे खरीदते या तैयार करते समय उनकी अच्छी तरह जांच कर लें. पौधे हरे, मजबूत और स्वस्थ होने चाहिए. अगर किसी पौधे की पत्तियां पीली हैं तना कमजोर है या उसमें कीट और बीमारी के लक्षण दिखाई दे रहे हैं तो उसे खेत में लगाने से बचें. शुरुआत में पौधे स्वस्थ रहेंगे तो आगे उनकी बढ़वार भी अच्छी रहने की उम्मीद रहती है. इसलिए सिर्फ ज्यादा पौधे लगाने के बजाय अच्छी गुणवत्ता वाले पौधों का चुनाव करना ज्यादा जरूरी है.
रोपाई करते समय पौधों के बीच उचित दूरी रखना बेहद जरूरी है. कई बार किसान ज्यादा पौधे लगाने के चक्कर में उन्हें बहुत पास पास लगा देते हैं. इससे पौधों के बीच हवा का आवागमन कम हो जाता है और नमी ज्यादा देर तक बनी रह सकती है. ऐसी स्थिति में रोग और कीट लगने का खतरा बढ़ सकता है. इसलिए बैंगन, मिर्च और टमाटर की किस्म के हिसाब से उचित दूरी रखें. इससे पौधों को फैलने और बढ़ने के लिए पर्याप्त जगह मिलेगी.
पौधों को खेत में लगाने से पहले यह देख लें कि मिट्टी में पर्याप्त नमी है या नहीं. बहुत सूखी मिट्टी में रोपाई करने से नए पौधों को खेत में जमने में परेशानी हो सकती है. रोपाई के बाद हल्की सिंचाई करें, ताकि पौधों की जड़ों के आसपास मिट्टी अच्छी तरह बैठ जाए. हालांकि खेत में जरूरत से ज्यादा पानी भी न भरें. पानी अधिक होने से जड़ों को नुकसान हो सकता है. इसलिए शुरुआत में पानी का इस्तेमाल जरूरत के हिसाब से ही करें.
अच्छी फसल के लिए सिर्फ बढ़िया किस्म का बीज लेना ही काफी नहीं है. पौधों की सही देखभाल भी जरूरी है. और टमाटर की रोपाई के करीब 20 से 25 दिन बाद पौधों को बांस या डंडियों का सहारा देकर ऊपर की ओर बढ़ाएं. इसे staking कहते हैं. इससे पौधे जमीन पर फैलने से बचते हैं और फल की गुणवत्ता बेहतर रहने में मदद मिलती है. साथ ही खेत में खरपतवार न पनपने दें और समय समय पर निराई गुड़ाई करते रहें. मिट्टी की नमी देखकर जरूरत के मुताबिक सिंचाई करें और कीट रोग के लिए खेत की नियमित निगरानी करें. सही देखभाल से फसल की गुणवत्ता बढ़िया होती है.

