राम मंदिर ट्रस्ट सीईओ बनाए गए एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्र मंगलवार को दूसरी बार अयोध्या पहुंचेंगे। जीतेंद्र मिश्र सबसे पहले राम मंदिर पहुंचकर रामलला का दर्शन-पूजन करेंगे। इसके बाद जीतेंद्र मिश्र सीईओ का कार्यभार संभालेंगे।
अयोध्या राम मंदिर की प्रशासनिक और वित्तीय व्यवस्था मंगलवार से मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) व सेवानिवृत्त एयर मार्शल जीतेन्द्र मिश्र के हवाले हो जाएगी। नए सीईओ मंगलवार को नई दिल्ली से अयोध्या पहुंचेंगे और विशेष मुहूर्त में विधिवत कार्यभार संभालेंगे। उन्होंने स्वयं इसकी पुष्टि की है। वह सुबह 11:40 बजे महर्षि वाल्मीकि एयरपोर्ट पहुंचेंगे। यहां से सीधे राम मंदिर जाकर रामलला के दर्शन करेंगे और इसके बाद अपने दायित्व का औपचारिक रूप से ग्रहण करेंगे। कार्यभार संभालने के बाद वह भविष्य की कार्ययोजना की रूपरेखा तय करेंगे।
मिली जानकारी के अनुसार, नए सीईओ अपने साथ कुछ अफसरों को भी लेकर पहुंचेंगे। वह राम मंदिर में कार्यरत टीम के साथ समन्वय स्थापित कर कार्ययोजना को जमीनी स्तर पर लागू कराने की दिशा में आगे बढ़ेंगे। एयरफोर्स में कई ऑपरेशन का हिस्सा रह चुके और ऑपरेशन सिंदूर में भूमिका के लिए मेडल हासिल कर चुके एयर मार्शल जीतेन्द्र मिश्र के लिए मंदिर प्रशासन की जिम्मेदारी एक अलग तरह की चुनौती होगी।
पहले दौरे पर ही सीईओ ने कर दिया था स्पष्ट, रणनीति तैयार की जाएगी
अपने पहले दौरे में ही उन्होंने स्पष्ट किया था कि राम मंदिर ट्रस्ट के मार्गदर्शन में पूरी रणनीति तैयार की जाएगी और उसके अनुसार सिलसिलेवार काम आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा था कि इसके लिए थोड़ा समय लगेगा, लेकिन रामलला की कृपा और रामभक्तों के सहयोग से बेहतर व्यवस्था देने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। दरअसल, तीन सितंबर को जीतेंद्र मिश्रा पहली बार अयोध्या पहुंचे थे। अयोध्या एयरपोर्ट पर ट्रस्ट की ओर से उनका स्वागत किया गया था। इसके बाद वह सीधे श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र भवन पहुंचे थे। इस यात्रा के दौरान जीतेंद्र मिश्रा ने पदाधिकारियों से मुलाकात कर आगामी प्रशासनिक व विकास कार्यों की जानकारी ली थी।
चढ़ावा चोरी के बाद भरोसा कायम करना सबसे बड़ी चुनौती
राम मंदिर में चढ़ावा चोरी की घटना के बाद रामलला के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था में कमी नहीं आई है। राम मंदिर में लगातार पहुंच रही श्रद्धालुओं की संख्या इसका प्रमाण है। हालांकि, घटना और उससे जुड़ी खबरों के बाद मंदिर की व्यवस्था और ट्रस्ट को लेकर अविश्वास की स्थिति जरूर बनी। सोशल मीडिया से लेकर मुख्यधारा की मीडिया तक मामला पहुंचने के बाद दूरदराज के गांवों तक इसकी चर्चा हुई। कई दानदाताओं ने भी इसे लेकर सवाल और अविश्वास जताया। ऐसे में नए सीईओ के सामने मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने के साथ श्रद्धालुओं और दानदाताओं का भरोसा कायम करना भी बड़ी चुनौती होगी। व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुरक्षा को लेकर उनकी शुरुआती पहल पर सभी की नजर रहेगी।

