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मौलाना तौकीर रजा को झटका, हाईकोर्ट ने नामंजूर की जमानत, कहा-भड़काऊ नारा कानून के अधिकार को चुनौती, Uttar-pradesh Hindi News

Admin by Admin
September 7, 2026
in उत्तर प्रदेश
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मौलाना तौकीर रजा को झटका, हाईकोर्ट ने नामंजूर की जमानत, कहा-भड़काऊ नारा कानून के अधिकार को चुनौती, Uttar-pradesh Hindi News


हाईकोर्ट 2025 में हुए बरेली दंगा के आरोपी तौकीर रजा को झटका दिया है। हाईकोर्ट ने तौकीर रजा की जमानत अर्जी को नामंजूर करते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया है। 

Bareilly Danga: बरेली में 26 सितंबर 2025 को हुए दंगे के मामले में इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल (आईएमसी) के अध्यक्ष मौलाना तौकीर रजा खान हाईकोर्ट से झटका लगा है। हाईकोर्ट ने बरेली दंगे के आरोपी तौकीर रजा को फिलहाल जमानत देने से इनकार कर दिया है। न्यायमूर्ति आशुतोष श्रीवास्तव ने जमानत अर्जी खारिज करते हुए कहा कि भले ही घटना के समय आवेदक मौके पर मौजूद नहीं था, लेकिन रिकॉर्ड से प्रथमदृष्टया यह सामने आता है कि उन्होंने बड़ी संख्या में लोगों को इस्लामिया इंटर कॉलेज के मैदान में एकत्र होने के लिए आह्वान किया था।

अदालत ने घटना के बाद उनके कथित आचरण को भी गंभीरता से लिया। तौकीर रज़ा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सतीश त्रिवेदी, इमरानुल्लाह ने पक्ष रखा जबकि राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी और एजीए प्रथम परितोष कुमार मालवीय ने जमानत का विरोध किया। तौकीर रज़ा पर बरेली के कोतवाली थाने में भारतीय न्याय संहिता की कई धाराओं के साथ आपराधिक कानून संशोधन अधिनियम की धारा सात तथा सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम की धाराएं लगाई गई हैं। वह 27 सितंबर 2025 से जेल में हैं। ट्रायल कोर्ट ने भी 10 नवंबर 2025 को उनकी जमानत अर्जी खारिज कर दी थी।

बचाव पक्ष की दलील- राजनीतिक रंजिश में फंसाया गया

याची की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने दलील दी कि मौलाना तौकीर रजा को राजनीतिक और अन्य कारणों से झूठा फंसाया गया है। उनका कहना था कि 19 सितंबर 2025 को आयोजित बैठक में मुस्लिम समुदाय से जुड़े मुद्दों पर विरोध के लिए लोगों को एकत्र होने की बात कही गई थी, लेकिन बाद में प्रशासन द्वारा अनुमति नहीं दिए जाने पर कार्यक्रम को रद्द कर दिया गया था।

बचाव पक्ष ने कहा कि 26 सितंबर को हुई हिंसा में मौलाना तौकीर रजा की कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं थी। वह घटना के समय मौके पर मौजूद भी नहीं थे। उनके अनुसार 26 सितंबर को करीब 10 बजे उन्हें घर में नजरबंद कर दिया गया था। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि आवेदक ने न तो हिंसा के लिए कोई भाषण दिया और न ही लोगों को सार्वजनिक संपत्ति या पुलिस पर हमला करने के लिए उकसाया। अधिवक्ताओं ने यह भी बताया कि मौलाना तौकीर रजा के खिलाफ पहले से दर्ज मामलों में से कई में उन्हें जमानत मिल चुकी है। उन्होंने अदालत को आश्वासन दिया कि जमानत मिलने पर वह मुकदमे में सहयोग करेंगे और जमानत की स्वतंत्रता का दुरुपयोग नहीं करेंगे।

सरकार ने बताया दंगों का मास्टरमाइंड

राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता एवं वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी ने जमानत का जोरदार विरोध किया। उन्होंने मौलाना तौकीर रजा को 26 सितंबर के बरेली दंगे का मुख्य सूत्रधार और मास्टरमाइंड बताया। सरकार की ओर से कहा गया कि 19 सितंबर की बैठक में लोगों को इस्लामिया इंटर कॉलेज के मैदान में नमाज के बाद पहुंचने का आह्वान किया गया था। प्रशासन ने पांच या उससे अधिक लोगों के सार्वजनिक स्थान पर एकत्र होने पर रोक लगा दी थी, इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग वहां पहुंचे।

अभियोजन के अनुसार, पुलिस ने भीड़ को रोकने का प्रयास किया तो पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट की गई। भीड़ ने पथराव और पेट्रोल बम से हमला किया तथा पुलिसकर्मियों पर गोलीबारी भी की। कई पुलिसकर्मी घायल हुए। पुलिस के हथियार और संचार उपकरण छीनने तथा सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप भी लगाए गए। राज्य ने अदालत को बताया कि जांच के बाद 21 दिसंबर 2025 को मौलाना तौकीर रजा के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है। अभियोजन ने यह भी कहा कि उनके खिलाफ कुल 24 आपराधिक मामले दर्ज होने की जानकारी जांच में सामने आई है।

घटना के बाद वीडियो जारी करने का भी हवाला

अभियोजन ने अदालत के समक्ष यह भी कहा कि घटना के बाद मौलाना तौकीर रजा ने सह-आरोपी फरहत अली के घर से वीडियो जारी कर बड़ी संख्या में लोगों के आह्वान पर पहुंचने के लिए उन्हें धन्यवाद दिया था। सरकार ने इस वीडियो को जांच का महत्वपूर्ण साक्ष्य बताते हुए कहा कि इससे घटना के बाद याची के रुख का पता चलता है। बचाव पक्ष की ओर से यह कहा गया था कि मौलाना तौकीर रजा घटना के समय अपने घर में नजरबंद थे। इसके विपरीत अभियोजन ने कहा कि उन्हें 27 सितंबर को उनके घर से करीब आठ किलोमीटर दूर सह-आरोपी फरहत अली के घर से गिरफ्तार किया गया था और इसी स्थान से वीडियो प्रसारित किया गया था।

अदालत ने कहा- बड़ी सभा के लिए अनुमति नहीं ली गई

कोर्ट ने रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद कहा कि याची घटना स्थल पर मौजूद नहीं था और वह सह-आरोपी फरहत अली के घर में था। हालांकि अदालत ने यह भी पाया कि शुक्रवार की नमाज के अवसर का इस्तेमाल करते हुए मुस्लिम समुदाय के लोगों को इस्लामिया इंटर कॉलेज के मैदान में एकत्र होने के लिए कहा गया था। अदालत ने कहा कि इतनी बड़ी सभा के लिए स्थानीय प्रशासन से अनुमति नहीं ली गई थी। बाद में अनुमति नहीं मिलने और बीएनएसएस की धारा 163 लागू होने के कारण कार्यक्रम रद्द किए जाने का तर्क दिया गया, लेकिन इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग इस्लामिया मैदान की ओर बढ़े। अदालत ने कहा कि पुलिसकर्मी कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अपना कर्तव्य निभा रहे थे। भीड़ द्वारा पुलिस के साथ मारपीट, दंगा, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान और पुलिसकर्मियों के घायल होने की घटनाओं को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

घटना के बाद भीड़ को धन्यवाद देने पर भी अदालत की आपत्ति

हाईकोर्ट ने घटना के बाद मौलाना तौकीर रजा द्वारा दिए गए कथित भाषण को भी महत्वपूर्ण माना। अदालत ने कहा कि घटना के बाद बड़ी संख्या में लोगों के आह्वान पर पहुंचने के लिए उन्हें धन्यवाद देना और उनके कृत्यों की सराहना करना भी स्वीकार्य नहीं है। अदालत ने विशेष रूप से उस नारे पर टिप्पणी की, जिसका उल्लेख अभियोजन ने किया था। कोर्ट ने कहा कि “गुस्ताख-ए-नबी की एक ही सजा, सर तन से जुदा” जैसे नारे को कानून के अधिकार को चुनौती देने वाला माना जा सकता है। अदालत ने इसे देश की संप्रभुता और अखंडता के लिए चुनौती तथा लोगों को सशस्त्र विद्रोह के लिए उकसाने वाला बताया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस प्रकार के नारे की तुलना धार्मिक सम्मान व्यक्त करने वाले “नारा-ए-तकबीर, अल्लाहु अकबर”, “जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल”, “जय श्री राम” या “हर हर महादेव” जैसे नारों से नहीं की जा सकती।

चार्जशीट दाखिल, लेकिन आरोप अभी तय नहीं

कोर्ट ने कहा कि पुलिस ने 21 दिसंबर 2025 को आवेदक के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल कर दिया है, लेकिन निचली अदालत में अभी आरोप तय नहीं हुए हैं। अदालत ने मामले की परिस्थितियों, घटना की गंभीरता, याची की कथित भूमिका और घटना के बाद उनके आचरण समेत सभी तथ्यों पर विचार किया। इन परिस्थितियों को देखते हुए कोर्ट ने कहा कि इस स्तर पर याची को जमानत पर रिहा करना उचित नहीं है। अदालत ने मौलाना तौकीर रजा की जमानत अर्जी खारिज कर दी।



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