• Home
  • Privacy Policy
Sonebhadra Live
No Result
View All Result
No Result
View All Result
Sonebhadra Live
No Result
View All Result

रामपुर ग्राउंड रिपोर्ट: न सड़क बची न बिजली, कोसी के पानी में घिरे भईयानगला गांव में चारपाई बनी एंबुलेंस, दावों की खुली पोल

Admin by Admin
September 6, 2026
in उत्तर प्रदेश
0
रामपुर ग्राउंड रिपोर्ट: न सड़क बची न बिजली, कोसी के पानी में घिरे भईयानगला गांव में चारपाई बनी एंबुलेंस, दावों की खुली पोल


Rampur Flood News: सोचिए, गांव में कोई गर्भवती महिला हो और उसे अस्पताल ले जाने के लिए एंबुलेंस नहीं बल्कि चारपाई का सहारा लेना पड़े. बच्चे स्कूल जाना चाहें तो रास्ते में नदी खड़ी हो जाए और बिजली के खंभे तक बाढ़ में बह जाएं. यह किसी एक दिन की परेशानी नहीं, बल्कि रामपुर के भईयानगला गांव की हर साल की कहानी है. इस बार भी बाढ़ ने गांव को चारों तरफ से घेर लिया है. सड़कें और संपर्क मार्ग कट गए हैं, खेत पानी में डूबे हैं और ग्रामीणों के सामने रोजमर्रा की जिंदगी चलाना मुश्किल हो गया है.

कोसी नदी के कटाव से संपर्क मार्ग ध्वस्त
जिले में कोसी नदी के तटवर्ती इलाकों में बाढ़ का पानी लगातार ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा रहा है. शाहाबाद तहसील का भईयानगला गांव भी इसकी चपेट में है. बुधवार से गांव का शहर से संपर्क कटा हुआ है. कई जगह संपर्क मार्गों पर कटाव हो गया है और पुलिया भी टूट गई है. भईयानगला के बराबर स्थित चंद्रपुरा खुर्द पहुंचकर जब ग्रामीणों से बात की गई तो सामने आया कि बाढ़ सिर्फ इस बार की परेशानी नहीं है, बल्कि हर साल गांव की सड़क, बिजली, पढ़ाई और इलाज की व्यवस्था को प्रभावित करती है.

हर साल उजड़ते रास्ते और अस्थायी लकड़ी के पुल
स्थानीय निवासी राजवीर ने बताया कि गांव हर साल बाढ़ की चपेट में आता है. पानी बढ़ते ही शहर की ओर जाने वाला संपर्क मार्ग टूट जाता है. उनका कहना है कि गांव के अंदर भी ठीक सड़क नहीं है और बाहर जाने के लिए भी कोई मजबूत और स्थायी रास्ता नहीं बनाया गया है. ग्रामीणों का कहना है कि पानी उतरने के बाद किसी तरह लकड़ी का पुल बनाकर आवाजाही शुरू की जाती है, लेकिन यह भी स्थायी समाधान नहीं है.

रामकुमार ने बताया कि इस बार हालात इतने खराब हैं कि कई लोगों को पानी पार करके बाहर निकलना पड़ रहा है. हालांकि शनिवार को प्रशासन की ओर से गांव में राशन पहुंचाकर ग्रामीणों को राहत दी गई, लेकिन सड़क, बिजली और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत समस्याएं अभी भी जस की तस हैं.

पानी में फंसी शिक्षा: ट्यूब के सहारे जान जोखिम में डालते बच्चे
बाढ़ का असर गांव के बच्चों की पढ़ाई पर भी साफ दिखाई दे रहा है. युवा अखिलेश शर्मा ने बताया कि एक जुलाई से स्कूल खुल चुके हैं, लेकिन वह अब तक स्कूल नहीं जा सके हैं. उनका कहना है कि शहर की ओर जाने वाला मुख्य मार्ग हर साल बाढ़ में टूट जाता है. ऐसे में पढ़ाई प्रभावित होती है लेकिन स्कूल की फीस बराबर देनी पड़ती है.

बीएससी की पढ़ाई कर रही सोनम ने बताया कि पढ़ाई के लिए उन्हें अपनी जान जोखिम में डालकर पानी पार करना पड़ता है और डर की वजह से बच्चे तीन से चार महीने स्कूल ही नहीं जा पाते. पानी अधिक होने पर किसी तरह ट्यूब के सहारे निकलते हैं. पानी कम होने के बाद ग्रामीण लकड़ी का पुल बनाते हैं. सोनम के मुताबिक कई बार उस पुल से निकलने के लिए भी पैसे देने पड़ते हैं. जिनके पास पैसे होते हैं वे स्कूल जा पाते हैं और जिनके पास नहीं होते उनके लिए पढ़ाई रोकना मजबूरी बन जाती है.

महीने भर से अंधेरा, नदी में बहे बिजली के खंभे
ग्रामीणों के मुताबिक गांव में करीब एक महीने से बिजली नहीं है. नदी में कटाव और पानी के तेज बहाव के कारण बिजली के खंभे टूटकर गिर गए. राजकुमार ने बताया कि बिजली की लाइन नदी के किनारे से गांव तक आती थी, लेकिन कटाव के कारण खंभे नदी की चपेट में आ गए. उनका कहना है कि गांव चारों तरफ से पानी के बीच फंसा हुआ है और बिजली की समस्या ने परेशानी और बढ़ा दी है.

सौरभ कश्यप का कहना है कि गांव में सड़क और बिजली की बदहाली का असर युवाओं के भविष्य पर पड़ रहा है. उनका सवाल है कि जब बच्चों को पढ़ने के लिए ही सुरक्षित रास्ता नहीं मिलेगा और बिजली की सुविधा नहीं होगी, तो गांव के युवा आगे कैसे बढ़ेंगे.

चारपाई बनी एंबुलेंस: मीलों दूर अस्पताल और टूटे रास्ते
गांव की सबसे गंभीर समस्या स्वास्थ्य सुविधा को लेकर सामने आई. स्थानीय निवासी मीना ने बताया कि जब किसी महिला को प्रसव या इलाज की जरूरत पड़ती है, तो उसे चारपाई पर रखकर गांव से बाहर ले जाना पड़ता है. बाढ़ के दौरान यह सफर और खतरनाक हो जाता है. ग्रामीणों का कहना है कि अस्पताल और स्कूल के लिए उन्हें करीब 15 से 20 किलोमीटर तक जाना पड़ता है, लेकिन वहां तक पहुंचने के लिए कोई स्थायी और सुरक्षित रास्ता नहीं है.

खेतों में पानी, बर्बाद फसलें और जनप्रतिनिधियों से निराशा
बाढ़ ने किसानों की कमर भी तोड़ दी है. किसान राजवीर ने बताया कि गांव के ज्यादातर परिवार खेती-किसानी पर निर्भर हैं. इस बार बाढ़ के पानी से फसलें बर्बाद हो गई हैं और खेतों की जमीन तक कट रही है. ग्रामीणों ने मांग की है कि गांव को बाढ़ से बचाने के लिए मजबूत बांध बनाया जाए. कुछ ग्रामीणों ने तो गांव को किसी सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट करने की मांग भी उठाई है. बाढ़ प्रभावित लोगों की मदद कर रहे राम बहादुर ने बताया कि गांव के लिए ऐसा कोई स्थायी वैकल्पिक मार्ग नहीं है जो शहर से संपर्क बनाए रख सके.

उनके मुताबिक सड़क और बिजली यहां की सबसे बड़ी समस्याओं में शामिल हैं. ग्रामीणों ने स्थानीय विधायक राजबाला सिंह को लेकर भी नाराजगी जताई. राजवीर और मीना समेत कई ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने सड़क और बिजली की समस्या को लेकर शिकायतें कीं लेकिन उन्हें स्थायी समाधान नहीं मिला. ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ के समय उन्हें खुद ही अपने हाल पर निर्भर रहना पड़ता है.



Source link

Previous Post

टूट गया उसेन बोल्ट का रिकॉर्ड! रोबोट ने 9.39 सेकेंड में पूरी की 100 मीटर दौड़

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

  • Home
  • Privacy Policy

© 2026 JNews - Premium WordPress news & magazine theme by Jegtheme.

No Result
View All Result
  • Home
  • Privacy Policy

© 2026 JNews - Premium WordPress news & magazine theme by Jegtheme.