गोंडा: यूपी के गोंडा स्थित मनकापुर इलाके की सरिता पांडेय ने जब मसालों का काम शुरू किया था, तब उनके पास न बड़ी मशीन थी और न ही कारोबार के लिए अपनी पूंजी. उन्होंने घर से ही सिलबट्टे पर मसाले पीसकर काम शुरू किया. धीरे-धीरे लोगों को उनके मसालों का स्वाद और गुणवत्ता पसंद आने लगी. काम बढ़ा तो उन्होंने पैसे जोड़कर मशीन खरीदी और कारोबार को आगे बढ़ाया. आज उनके तैयार किए मसाले गोंडा के अलावा दूसरे जिलों और चेन्नई तक पहुंच रहे हैं. उनके साथ अब करीब 10 से 12 महिलाएं भी काम कर रही हैं.
समूह से लोन लेकर शुरू किया था कारोबार
सरिता पांडेय गोंडा जिले के विकासखंड मनकापुर की ग्राम पंचायत बक्सर आज्ञाराम की रहने वाली हैं. उन्होंने बताया कि कारोबार शुरू करने के लिए उनके पास खुद की पूंजी नहीं थी. गांव में स्वयं सहायता समूह के बारे में जानकारी मिलने के बाद वह समूह से जुड़ गईं. इसके बाद उन्होंने समूह से लोन लिया और मसालों का काम शुरू किया. शुरुआत में घर पर ही सिलबट्टे से मसाले पीसती थीं. आसपास के लोगों की जरूरत के हिसाब से मसाले तैयार करतीं, फिर उन्हें पैक करके बेचती थीं. धीरे-धीरे उनके बनाए मसालों की मांग बढ़ने लगी.
काम बढ़ा तो जमा पैसे से खरीदी कुटाई मशीन
जब ग्राहकों की संख्या बढ़ी तो हाथ से मसाले पीसना मुश्किल होने लगा. इसके बाद सरिता ने धीरे-धीरे पैसे बचाए और इलेक्ट्रॉनिक कंडप मशीन यानी कुटाई मशीन खरीदी. मशीन आने के बाद मसालों की कुटाई का काम आसान हो गया और पहले की तुलना में ज्यादा काम किया जाने लगा. सरिता का कहना है कि उन्होंने बहुत छोटे स्तर से शुरुआत की थी. अच्छी गुणवत्ता और मेहनत की वजह से लोगों का भरोसा बढ़ता गया और कारोबार भी आगे बढ़ता चला गया.
62 तरह के मसाले तैयार होते हैं
सरिता के यहां करीब 62 तरह के मसाले तैयार किए जाते हैं. इनमें लगभग 12 प्रकार के पिसे हुए मसाले और करीब 50 तरह के साबुत मसाले शामिल हैं. यहां हल्दी, धनिया, लाल मिर्च, जीरा और गरम मसाले समेत कई दूसरे मसाले तैयार किए जाते हैं. सरिता के मुताबिक, साबुत गरम मसालों की मांग सबसे ज्यादा रहती है. मसालों को तैयार करने के दौरान साफ-सफाई और गुणवत्ता का भी खास ध्यान रखा जाता है.
कारोबार से 10-12 महिलाओं को मिला काम
सरिता ने अपने कारोबार को आगे बढ़ाने के साथ दूसरी महिलाओं के लिए भी काम का रास्ता बनाया. उनके साथ करीब 10 से 12 महिलाएं जुड़ी हुई हैं. ये महिलाएं मसालों की तैयारी, कुटाई और पैकिंग जैसे काम संभालती हैं. इससे गांव की दूसरी महिलाओं को भी अपने घर के आसपास काम करने का मौका मिल रहा है. सरिता खुद भी अपने कारोबार को आगे बढ़ाने में जुटी हुई हैं.
डेढ़ लाख की लागत, करीब 3 लाख रुपये की आमदनी
सरिता के अनुसार, पूरे साल कारोबार में करीब डेढ़ लाख रुपये की लागत आती है. इससे उन्हें सालाना करीब 3 लाख रुपये तक की आमदनी हो जाती है. उनके तैयार मसालों की बिक्री सिर्फ गोंडा तक सीमित नहीं है. दूसरे जिलों में भी उनके उत्पाद भेजे जाते हैं. अब उनके मसाले गोंडा से निकलकर चेन्नई तक पहुंच रहे हैं.
नहीं मिली नौकरी तो शुरू किया अपना काम
सरिता ने डबल एमए तक पढ़ाई की है. पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने नौकरी पाने के लिए काफी कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली. शादी के बाद वह घर संभालने लगीं. इसी दौरान उन्हें गांव में चल रहे स्वयं सहायता समूह के बारे में जानकारी मिली. उन्होंने पति की मदद से समूह के बारे में जानकारी ली और लोन लेकर मसालों का काम शुरू किया. जिस काम की शुरुआत उन्होंने घर में सिलबट्टे से की थी, वही आज उनकी पहचान बन चुका है. सरिता अब अपने मसालों के कारोबार को और बड़ा करना चाहती हैं. उनका लक्ष्य अपने ब्रांड को आगे बढ़ाने के साथ ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को रोजगार से जोड़ना है.

