श्रीराम जन्मभूमि मंदिर की पूजा-अर्चना की व्यवस्था में बदलाव किया गया है। अब सुबह छह बजे होने वाली श्रृंगार आरती से पहले रामानंदीय परंपरा के आचार्यों द्वारा रचित पदों का गायन किया जा रहा है।
Ram Mandir News: श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में पूजा-अर्चना की परंपरा में बदलाव की शुरुआत हो गई है। अब सुबह छह बजे होने वाली श्रृंगार आरती से पहले रामानंदीय परंपरा के आचार्यों द्वारा रचित पदों का गायन किया जा रहा है। इसके साथ ही श्रृंगार आरती के दौरान गर्भगृह के बाहर भी अतिरिक्त पुजारियों को आरती की जिम्मेदारी दी गई है। यह व्यवस्था ट्रस्ट की ओर से लागू की गई नई व्यवस्थाओं का हिस्सा है। आगे मध्याह्न आरती के समय भी स्तुति गान शुरू करने की तैयारी है।
नई व्यवस्था के तहत गर्भगृह में रामलला की आरती ट्रस्ट के नियमित पुजारी करेंगे। गर्भगृह की चौखट के बाहर चार या छह अतिरिक्त पुजारी आरती करेंगे। इसके लिए आंजनेय सेवा संस्थान के माध्यम से पुजारियों को बुलाया गया है। ये सभी सरयू की नित्य आरती में अर्चक के रूप में सेवा देते हैं। आंजनेय सेवा संस्थान के संयोजक महंत शशिकांत दास ने बताया कि तात्कालिक व्यवस्था के लिए पुजारियों को भेजने का आग्रह किया गया था। आगे ट्रस्ट की योजना के अनुसार व्यवस्था को बढ़ाया जाएगा।
24 घंटे अखंड रामधुन भी चलेगी
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव स्वामी गोविंद देव गिरि ने बताया कि मंदिर में उत्सवों को भव्य और दिव्य स्वरूप दिया जाएगा। प्राचीन परंपराओं और आधुनिक व्यवस्थाओं के समन्वय से मंदिर की व्यवस्थाएं विकसित की जाएंगी। नित्य श्रृंगार आरती के समय आचार्य रचित पदों का गायन होगा और गर्भगृह के भीतर व बाहर आरती की व्यवस्था रहेगी। इसके साथ 24 घंटे अखंड रामधुन संकीर्तन चलाने की भी तैयारी है।
सीता रसोई की व्यवस्था में भी बदलाव
महासचिव ने बताया कि सीता रसोई में श्रद्धालुओं को सम्मानजनक ढंग से प्रसाद उपलब्ध कराने और वहीं ग्रहण कराने की व्यवस्था पर विचार चल रहा है। इसे जल्द मूर्त रूप दिया जाएगा। रामलला को भोग लगाने में भी पूरी शुचिता का पालन सुनिश्चित किया जाएगा।

