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कैंसर, 17 किलो वजन कम हुआ, मांसपेशियां गायब, फिर भी नहीं मानी हार, विश्व चैंपियनशिप में वापसी, Other-sports Hindi News

Admin by Admin
September 5, 2026
in खेल
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कैंसर, 17 किलो वजन कम हुआ, मांसपेशियां गायब, फिर भी नहीं मानी हार, विश्व चैंपियनशिप में वापसी, Other-sports Hindi News


स्वीडन के बैडमिंटन खिलाड़ी गुस्ताव ब्योर्कलर को कैंसर के कारण 17 किग्रा वजन कम होने और शरीर में लगभग पूरी तरह मांसपेशियां खत्म हो जाने के बाद भी हार नहीं मनी और दोबारा बैडमिंटन कोर्ट में आ गए हैं। 

स्वीडन के बैडमिंटन खिलाड़ी गुस्ताव ब्योर्कलर को कैंसर के कारण 17 किग्रा वजन कम होने और शरीर में लगभग पूरी तरह मांसपेशियां खत्म हो जाने के बाद दोबारा बैडमिंटन खिलाड़ी बनने की अपनी पहचान हासिल करने के लिए लंबा संघर्ष करना पड़ा।

ब्योर्कलर को 2018 में मायलोडिस्प्लास्टिक सिंड्रोम (एमडीएस) का पता चला था जो रक्त कैंसर का एक प्रकार है। उन्होंने कीमोथेरेपी और स्टेम सेल प्रत्यारोपण कराया और 2019 में उन्हें स्वस्थ घोषित किया गया।

कैंसर से उबरने के बाद पेशेवर बैडमिंटन में वापसी का उनका सफर आसान नहीं था लेकिन स्वीडन के इस खिलाड़ी ने कभी यह विश्वास नहीं खोया कि वह एक दिन कोर्ट पर लौटेंगे।

ब्योर्कलर ने अपने मैच के बाद ‘पीटीआई वीडियोज’ से कहा, ”मेरे शरीर में बिल्कुल भी मांसपेशियां नहीं बची थीं। मेरा वजन करीब 15 से 17 किग्रा कम हो गया था। इसलिए मेरे अंदर बिल्कुल भी शारीरिक ताकत नहीं थी।”

उन्होंने कहा, ”इन चीजों को वापस हासिल करने में कुछ समय लगा।”

इस अनुभव ने उनके शरीर के साथ-साथ जिंदगी के प्रति उनका नजरिया भी बदल दिया।

उन्होंने कहा, ”बेशक इसका सबसे ज्यादा असर मानसिक रूप से पड़ता है और मुझे लगता है कि इससे जिंदगी को देखने का मेरा नजरिया पूरी तरह बदल गया।”

ब्योर्कलर ने कहा, ”आप जिंदगी को अलग तरीके से देखने लगते हैं और स्वस्थ रहकर और सामान्य जिंदगी जीकर ही काफी खुश हो जाते हैं।”

पेशेवर बैडमिंटन की कड़ी चुनौतियों के बीच वापसी के बावजूद यह नजरिया ब्योर्कलर के साथ बरकरार है। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी यह भरोसा नहीं छोड़ा कि वह बीमारी से उबरकर शीर्ष स्तर पर वापसी करेंगे।

ब्योर्कलर ने कहा, ”जब मैं बीमारी से जूझ रहा था तो इस नजरिए से काफी मदद मिली। इसने मुझे आगे बढ़ने और हालात का अधिकतम फायदा उठाने के लिए प्रेरित किया।”

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स्वीडन का यह खिलाड़ी आज नहीं चाहता कि उनकी पहचान बीमारी तक सीमित रहे।

जब उनसे पूछा गया कि कैंसर की कहानी से इतर वह चाहते हैं कि लोग उनके बारे में क्या जानें तो उन्होंने बेहद सहज जवाब दिया।

उन्होंने कहा, ”मैं बस एक ऐसा व्यक्ति हूं जिसे बैडमिंटन खेलना पसंद है और फिलहाल मैं बैडमिंटन की जिंदगी का आनंद ले रहा हूं। मैं वास्तव में बहुत खुशकिस्मत हूं कि अब स्वस्थ हूं।”

उनकी वापसी के सामने एक और चुनौती है और वह है स्वीडन में एक शीर्ष स्तर के बैडमिंटन खिलाड़ी के रूप में खुद को विकसित करने के लिए सही माहौल तलाशना। यूरोप के कुछ प्रमुख बैडमिंटन देशों की तुलना में स्वीडन में बैडमिंटन उतना लोकप्रिय नहीं है।

बेहतर प्रशिक्षण और अभ्यास के लिए ब्योर्कलर कोपेनहेगन चले गए हैं। उनका मानना है कि यह फैसला उन्हें अपने खेल में अगला कदम उठाने में मदद कर सकता है।

उन्होंने कहा, ”स्वीडन में बैडमिंटन इतना बड़ा खेल नहीं है इसलिए मैंने डेनमार्क जाने का फैसला किया। मैं कोपेनहेगन में रहता हूं और वहीं अभ्यास करता हूं।”

ब्योर्कलर ने पहले ही उस स्तर की कुछ झलक दिखाई है जिसे वह हासिल करना चाहते हैं। वह थॉमस कप में स्वीडन का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं और चोउ टिएन चेन तथा एंडर्स एंटोनसन जैसे खिलाड़ियों का सामना कर चुके हैं।

विश्व चैंपियनशिप में समाप्त हुआ अभियान

विश्व चैंपियनशिप में उनका अभियान भले ही पहले दौर में समाप्त हो गया हो लेकिन ब्योर्कलर की नजरें अब अगले लक्ष्य पर हैं।

उन्होंने कहा, ”मेरा लक्ष्य फिर से शीर्ष 100 में पहुंचना, खुद को विकसित करना, बेहतर खिलाड़ी बनना और बड़े टूर्नामेंटों में खेलना है।” ब्योर्कलर के लिए अब लक्ष्य केवल यह साबित करना नहीं है कि वह कैंसर के बाद वापसी कर सकते हैं। वह अब यह देखना चाहते हैं कि स्वस्थ होने के बाद वह अपने करियर को कितनी ऊंचाई तक ले जा सकते हैं और शायद उनकी कहानी का सबसे अहम हिस्सा यही है। वह नहीं चाहते कि उन्हें मुख्य रूप से कैंसर से जंग जीतने वाले खिलाड़ी के रूप में याद किया जाए। वह चाहते हैं कि उनकी पहचान ऐसे खिलाड़ी के रूप में हो जिसे सिर्फ बैडमिंटन से प्यार है।

भाषा सुधीर पंत



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