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Mathura Janmashtami: श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर कान्हा की नगरी मथुरा और वृंदावन भक्ति के महासागर उमड़ पड़ा है. जन्माष्टमी के दिन अचानक हुई झमाझम बारिश ने उमस से राहत दी और उत्सव के उल्लास को चार चांद लगा दिए. श्री बांके बिहारी मंदिर में साल में एक बार होने वाली दुर्लभ मंगला आरती, उत्तराखंड की जड़ी-बूटियों से अभिषेक और 21 किलो के विशेष केक का भोग मुख्य आकर्षण रहा. उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद द्वारा सजाए गए 27 मंचों पर लोक कलाकारों और जन्मभूमि के बाहर राजस्थान से आए कलाकारों ने शानदार प्रस्तुतियां दीं. लाखों भक्तों की भारी भीड़ से सड़कों पर जाम लगा, लेकिन आस्था का उत्साह कम नहीं हुआ.
वृंदावन में भक्तों के बीच जोश हाई.
Krishna-Janmashthmi Celebration: भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव यानी कृष्ण जन्माष्टमी पर शुक्रवार को कान्हा की नगरी मथुरा और वृंदावन पूरी तरह से ‘भक्ति के सागर’ में तब्दील हो गई. देश के कोने-कोने और विदेशों से भी पहुंचे लाखों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ ने इस बार आस्था का नया इतिहास रच दिया. शाम को अचानक हुई झमाझम बारिश ने दिनभर की उमस और गर्मी से बड़ी राहत दी, जिससे मौसम पूरी तरह सुहाना हो गया और भक्तों का उत्साह दोगुना बढ़ गया. बारिश के कुछ देर के व्यवधान के बाद जब आसमान साफ हुआ, तो सड़कों पर उमड़े जनसैलाब ने साबित कर दिया कि कान्हा के दर्शन की लालसा के आगे कोई भी बाधा टिक नहीं सकती.
जैसे ही शाम ढली, मथुरा के आसमान में काले बादल छाए और हल्की बारिश शुरू हो गई. कुछ समय के लिए लोग दुकानों के सामने और मंदिरों के बरामदों में शरण लेते नजर आए, लेकिन बारिश रुकते ही ‘राधे-राधे’ और ‘जय श्री कृष्ण’ के जयकारों के साथ भक्तों की भीड़ फिर से सड़कों पर उतर आई. मथुरा में चारों तरफ अलग-अलग राज्यों से आए भक्तों का तांता लगा रहा. मुख्य बाजार खचाखच भर गए और श्री कृष्ण जन्मभूमि पर दर्शन के लिए लंबी-लंबी कतारें लग गईं. इस भारी भीड़ के चलते भूतेश्वर चौराहा, जन्मभूमि लिंक रोड, भरतपुर गेट, गोविंद नगर तिराहा और महाविद्या कॉलोनी के आसपास भयंकर ट्रैफिक जाम की स्थिति बन गई, जिसे नियंत्रित करने के लिए पुलिस और ट्रैफिक कर्मियों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी.
बांके बिहारी की दुर्लभ मंगला आरती और 21 किलो का भव्य केक
वृंदावन के विश्व प्रसिद्ध श्री बांके बिहारी मंदिर में आधी रात को होने वाले जन्मोत्सव की तैयारियां बेहद भव्य थीं. आगरा में ड्राई फ्रूट्स और पारंपरिक ‘पाग’ से तैयार 21 किलो का विशेष केक भगवान को अर्पित किया गया, जिसे बाद में प्रसाद के रूप में बांटा गया. आधी रात को पंचामृत, शुद्ध केसर और उत्तराखंड से मंगाई गई दुर्लभ जड़ी-बूटियों के साथ भगवान का भव्य अभिषेक किया गया. इसके बाद उन्हें नए वस्त्र पहनाकर और मोरपंख से बाल-रूप में सजाया गया.
मंदिर की सालाना ‘मंगला आरती’, जो साल में केवल एक बार सिर्फ जन्माष्टमी के दिन होती है, इस आयोजन का सबसे बड़ा आध्यात्मिक आकर्षण रही. इस बार इस अत्यंत दुर्लभ रस्म के लिए मंदिर के भीतर केवल 600 लोगों को ही प्रवेश की अनुमति दी गई थी, जिसके लिए पुलिसकर्मियों और विशेष पास की कड़ी व्यवस्था की गई थी.
सांस्कृतिक रंगों में डूबी मथुरा, राजस्थानी कलाकारों ने मोहा मन
इस बार का ‘कृष्ण उत्सव 2026’ मथुरा के लिए एक जीवंत सांस्कृतिक केंद्र साबित हुआ. उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद की तरफ से पूरे शहर में 27 बेहद आकर्षक ढंग से सजे-धजे मंच तैयार किए गए थे, जहाँ विभिन्न क्षेत्रों के लोक नृत्य, संगीत और पारंपरिक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं. वहीं, श्रीकृष्ण जन्मभूमि के ठीक बाहर राजस्थान से आए कलाकारों ने विभिन्न पौराणिक किरदारों के रूप में सुंदर कार्यक्रम प्रस्तुत किए और अपने अभिनय व कला से आने वाले श्रद्धालुओं का भरपूर मनोरंजन किया. गलियों से लेकर मुख्य मार्गों तक गूंजते ‘राधे-राधे’ के जयकारों ने पूरे ब्रजमंडल को अलौकिक ऊर्जा से भर दिया.
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सिविल सर्विसेज की तैयारी करते-करते कब 4 साल पहले पत्रकारिता की ओर झुकाव हो गया पता ही नहीं चला. नाम दीप राज दीपक है. वर्तमान में News18 हिंदी के साथ जुड़े हुए हैं. पद सब-एडिटर …
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