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70s की वो फिल्म, जिसमें एक ही शख्स ने संभालीं 4 बड़ी जिम्मेदारियां, हुई फ्लॉप पर IMDb पर है धांसू रेटिंग

Admin by Admin
September 5, 2026
in मनोरंजन
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70s की वो फिल्म, जिसमें एक ही शख्स ने संभालीं 4 बड़ी जिम्मेदारियां, हुई फ्लॉप पर IMDb पर है धांसू रेटिंग


Last Updated:September 04, 2026, 15:45 IST

हिंदी सिनेमा का 1970 का दशक अपनी मनोरंजक, मनोरम और लीक से हटकर बनी फिल्मों के लिए जाना जाता है. इस दौर में जहां एक तरफ बड़े-बड़े निर्देशक भव्य सेट और स्टार-स्टडेड फिल्में बना रहे थे. वहीं बॉलीवुड का एक ऐसा हरफनमौला कलाकार भी था जो अपनी ही धुन में सिनेमा के नए प्रयोग कर रहा था. 1974 में रिलीज हुई एक ऐसी ही अनोखी और अजीबो-गरीब कॉमेडी फिल्म थी, जिसकी कमान पूरी तरह से एक ही इंसान के हाथों में थी. उन्होंने न सिर्फ इस फिल्म का निर्देशन किया, बल्कि इसे प्रोड्यूस किया, इसकी कहानी लिखी और इसके गानों को अपने संगीत से सजाया भी. जानते हैं वो कौन हैं?

नई दिल्ली. हिंदी सिनेमा के इतिहास में कई ऐसी फिल्में हैं, जिनकी किस्मत रिलीज के वक्त भले ही चमक नहीं पाई, लेकिन समय के साथ उनका अंदाज और कहानी दर्शकों को याद रह गई. 70 के दशक का दौर खासतौर पर ऐसा ही एक्सपेरिमेंट फिल्मों के लिए जाना जाता है, जब बड़े सितारे लीक से हटकर कहानियां और किरदार आजमाने से नहीं डरते थे. इसी दौर में एक ऐसी अतरंगी कॉमेडी फिल्म आई, जिसका नाम ही अपने आप में लोगों का ध्यान खींचने वाला था. कहानी में दौलत का लालच, दाढ़ी की लंबाई और अजीबोगरीब किरदारों का ऐसा मेल था कि फिल्म किसी सामान्य कॉमेडी से बिल्कुल अलग नजर आई. दिलचस्प बात यह है कि इसके पीछे बॉलीवुड के एक बेहद बहुमुखी कलाकार का दिमाग था.

हम बात कर रहे हैं 1974 में रिलीज हुई फिल्म ‘बढ़ती का नाम दाढ़ी’ की. इस फिल्म के निर्देशक और निर्माता किशोर कुमार थे. इतना ही नहीं, फिल्म की कहानी और संगीत की जिम्मेदारी भी उन्होंने ही संभाली थी. यानी एक्टिंग और गायकी के लिए मशहूर किशोर कुमार ने इस फिल्म के जरिए निर्देशन, निर्माण, कहानी और संगीत चार अहम मोर्चों पर अपनी प्रतिभा दिखाई. किशोर कुमार को फिल्म के निर्देशक, निर्माता, कहानीकार और संगीतकार के तौर पर दर्ज किया गया है.

फिल्म की कहानी भी उतनी ही दिलचस्प थी. एक करोड़पति के पास बेशुमार दौलत है, लेकिन उसका कोई वारिस नहीं है. ऐसे में वह अपनी संपत्ति उस शख्स को देने का फैसला करता है, जिसकी दाढ़ी सबसे लंबी होगी. बस, इसी अजीब शर्त के बाद शुरू होता है लालच, चालबाजी और हास्य से भरा पूरा खेल. फाइल फोटो. 

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फिल्म का प्लॉट जितना अनोखा था, उसके किरदार भी उतने ही मजेदार थे. किशोर कुमार फिल्म में कई अलग-अलग रूपों में नजर आए. IMDb के मुताबिक, उन्होंने खुद के अलावा जेलर, कॉन्स्टेबल किशोरी लाल, कॉन्स्टेबल रफत लाल और जिप्सी जैसे किरदार निभाए. वहीं आई.एस. जौहर ने सेठ सोहराबजी बंदूकवाला का किरदार निभाया. किशोर कुमार के बेटे अमित कुमार भी फिल्म का हिस्सा थे और उन्होंने फक्कड़ ‘झंगो’ की भूमिका निभाई. फाइल फोटो. 

फिल्म में सिर्फ कहानी ही अजीब नहीं थी, बल्कि इसकी कास्ट और किरदारों का अंदाज भी दर्शकों को लगातार हंसाने वाला था. फिल्म में के.एन. सिंह, बिंदु, अनवर हुसैन, भगवान दादा, सुंदर और मारुति जैसे कलाकार भी नजर आए. खास बात यह भी है कि राजेश खन्ना और असरानी जैसे कलाकारों की मौजूदगी ने फिल्म को और दिलचस्प बना दिया.

फिल्म के संगीत की कमान भी किशोर कुमार ने संभाली थी. इसके साउंडट्रैक में ‘बढ़ती का नाम दाढ़ी’, ‘भोले रे साजन’, ‘हे गोरी बांकी छोरी’, ‘फिर सुहानी शाम ढली’, ‘सुन चाचे बोल भतीजे’ और ‘जिंदगी हसीन है’ जैसे गाने शामिल थे. इनमें किशोर कुमार के साथ आशा भोसले, अमित कुमार, भूपेंद्र सिंह और बप्पी लाहिड़ी जैसे कलाकारों की आवाजें भी सुनाई दीं.

‘सुन चाचे बोल भतीजे’ खास तौर पर दिलचस्प है, क्योंकि इसमें किशोर कुमार और अमित कुमार की आवाज साथ सुनाई देती है. वहीं ‘जिंदगी हसीन है’ में किशोर कुमार और भूपेंद्र सिंह की आवाज का मेल देखने को मिलता है. फिल्म के गानों में भी वही हल्का-फुल्का और मस्ती भरा अंदाज दिखाई देता है, जो इसकी कहानी के मिजाज से मेल खाता है.

‘बढ़ती का नाम दाढ़ी’ बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता हासिल नहीं कर पाई, लेकिन समय के साथ किशोर कुमार के फैंस के लिए यह फिल्म एक दिलचस्प कल्ट कॉमेडी बन गई. इसकी सबसे बड़ी वजह इसकी अनोखी कहानी और किशोर कुमार का मल्टीटैलेंटेड अंदाज है. 1958 की चर्चित फिल्म ‘चलती का नाम गाड़ी’ की सफलता के बाद ही उन्होंने ये फिल्म बनाने का फैसला किया.

फिल्म भले फ्लॉप रही, लेकिन फिल्म की IMDb रेटिंग हैरान करने वाली हैं. ‘बढ़ती का नाम दाढ़ी’ को IMDb पर 10 में से 6.4 रेटिंग मिली हुई है. 1974 में जब यह फिल्म रिलीज हुई थी, तब भारतीय दर्शक ऐसी अब्सरड और स्लैपस्टिक कॉमेडी के लिए शायद पूरी तरह तैयार नहीं थे. यही वजह रही कि बॉक्स ऑफिस पर यह अपनी लागत निकालने में भी संघर्ष करती दिखी.

आज ‘बढ़ती का नाम दाढ़ी’ को भारतीय सिनेमा की बेहतरीन स्पूफ फिल्मों में गिना जाता है. एक ही इंसान द्वारा फिल्म के हर पहलू यानी निर्देशन, निर्माण, लेखन और संगीत को अकेले संभालना और उस जमाने में ऐसा रिस्क लेना यह साबित करता है कि किशोर कुमार सिर्फ एक सिंगर या एक्टर नहीं, बल्कि सिनेमा के एक सच्चे जीनियस थे. फाइल फोटो. 

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First Published :

September 04, 2026, 15:45 IST



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