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गर्भवती पत्नी के इलाज के खातिर नहीं थे पैसे, 500 रुपये के लिए लिख डाले 2 गाने, अमर हुआ गीतकार

Admin by Admin
September 4, 2026
in मनोरंजन
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गर्भवती पत्नी के इलाज के खातिर नहीं थे पैसे, 500 रुपये के लिए लिख डाले 2 गाने, अमर हुआ गीतकार


Last Updated:September 04, 2026, 17:28 IST

Old Hindi Song : सआदत हसन मंटो ने कई बार तंगहाली में कलम थामी थी. पैसों की जरूरत ने उनसे ‘टोबा टेक सिंह’ और ‘खोल दो’ जैसी कुछ रचनाएं करवाईं, जिन्हें कल्ट का दर्जा मिला. वे भी अक्सर खुद को कमर्शियल राइटर कहते थे. हिंदी सिनेमा के महान गीतकार भी आर्थिक तंगी के चलते गीत लिखने के लिए मजबूर हुए थे. उनकी जेब में जब गर्भवती पत्नी के इलाज के लिए पैसे नहीं थे, जब उन्होंने सिनेमा के लिए कलम थामी. गीतकार शैलेंद्र ने राज कपूर से संपर्क किया. उन्होंने फिर 500 रुपये में उनसे दो गाने लिखवाए.

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गर्भवती पत्नी के इलाज के खातिर नहीं थे पैसे, 500 रुपये के लिए लिख डाले 2 गानेZoom

राज कपूर, गीतकार की लेखनी से बहुत प्रभावित थे. (फोटो साभार: AI से जेनरेटेड इमेज)

नई दिल्ली: बिहार का साहित्यिक इतिहास बड़ा संपन्न है. कई महान रचनाकारों और कवियों का बिहार की धरती से गहरा ताल्लुक रहा है. उन्होंने हिंदी, उर्दू, भोजपुरी और मैथिली भाषाओं में अमर रचनाएं रचीं. बिहार में जन्मे रामधारी सिंह दिनकर, विद्यापति, नागार्जुन और रामवृक्ष बेनीपुरी जैसे रचनाकारों ने अपनी लेखनी से भारतीय साहित्य में बड़ा योगदान दिया. हिंदी सिनेमा को संपन्न बनाने वाले एक महान गीतकार भी बिहार के आरा से ताल्लुक रखते थे, हालांकि उनका जन्म पाकिस्तान में मौजूद रावलपिंडी में हुआ था. अगर आप हिंदी गानों से प्यार करते हैं, तो उनका लिखा कोई-न-कोई गाना आपके दिल के भी करीब होगा. हालांकि, उन्होंने हिंदी सिनेमा में मजबूरी में गीत लिखना शुरू किया था.

दिग्गज गीतकार को बचपन से कविताएं लिखने का शौक था. मां-बहन की मौत के बाद उन्हें कविताओं में ही सुकून मिलता था. वे काम के सिलसिले में मुंबई आए और भारतीय रेलवे को अपनी सेवाएं देने लगे. उन्होंने कविताओं के शौक को बरकरार रखा. वे कवि सम्मेलनों, मुशायरों में जाते रहे. वे ऐसे ही एक मुशायरे में राज कपूर से मिले, जो उनकी ‘जलता है पंजाब’ से बड़े प्रभावित हुए थे. वे इसे अपनी 1948 की फिल्म ‘आग’ के लिए खरीदना चाहते थे, मगर शैलेंद्र ने अपनी कविता को देने से इनकार कर दिया. वे अपनी कला का सौदा नहीं करना चाहते थे.

फिल्म ‘बरसात’ के लिए लिखे 2 गाने
गीतकार शैलेंद्र की पत्नी जब गर्भवती हुईं, तो उनके आसपास आर्थिक तंगी के बादल मंडराने लगे. वे मदद के खातिर एक अमीर दोस्त के पास पहुंचे, मगर उन्हें कोई सहायता नहीं मिली. उन्हें कुछ रास्ता नहीं सूझ रहा था, तो उन्होंने मजबूरी में राज कपूर से संपर्क किया. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, उस वक्त राज कपूर अपनी फिल्म ‘बरसात’ की शूटिंग कर रहे थे. उन्होंने शैलेंद्र की समस्या को समझा और उन्हें 500 रुपये में दो गीत लिखने का प्रस्ताव दिया. वे झट से मान गए. उन्होंने जेब के खातिर दो गाने लिखे. पहला है- ‘बरसात में’ और दूसरा है- ‘पतली कमर.’ शंकर-जयकिशन ने उनके दोनों गानों को कंपोज किया.

शैलेंद्र ने दर्जनों नायाब गाने लिखे.

गाने ‘आवारा हूं’ से देशभर हुए मशहूर
1949 की फिल्म ‘बरसात’ से महान गीतकार शैलेंद्र के सिनेमाई सफर की शुरुआत हुई. शैलेंद्र ने फिर हिंदी सिनेमा के लिए एक से बढ़कर एक नायाब गाने लिखे. इनमें ‘आवारा हूं’, ‘मेरा जूता है जापानी’ जैसे गाने पूरे देश में छा गए थे. उन्होंने तमाम फिल्मों के लिए सैंकड़ों सफल गाने लिखे, जिन्हें आप भी लोग गाते-गुनगुनाते हैं. इतना ही नहीं, हिंदी सिनेमा में पैर जमाने के बाद शैलेंद्र ने एक फिल्म भी प्रोड्यूस की थी. उन्होंने फणीश्वर नाथ रेणु की कहानी पर फिल्म ‘तीसरी कसम’ प्रोड्यूस की थी, जिसे नेशनल फिल्म अवॉर्ड भी मिला था. वे 43 साल की कम उम्र में चल बसे थे, मगर उनके गीतों ने उन्हें महेशा के लिए अमर कर दिया.

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Abhishek NagarSenior Sub Editor

अभिषेक नागर \’न्यूज18 डिजिटल\’ में सीनियर सब एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. दिल्ली के रहने वाले अभिषेक नागर \’न्यूज18 डिजिटल\’ की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. उन्होंने एंटरटेनमेंट बीट के अलावा करियर, हेल्थ और…

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Location :

New Delhi,New Delhi,Delhi

First Published :

September 04, 2026, 17:28 IST





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