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एमपी के आदिवासी गांवों में रहस्यमयी बीमारी; 7 बच्चों की मौत, चकत्ते के साथ ये लक्षण, Madhya-pradesh Hindi News

Admin by Admin
September 4, 2026
in राष्ट्रीय
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एमपी के आदिवासी गांवों में रहस्यमयी बीमारी; 7 बच्चों की मौत, चकत्ते के साथ ये लक्षण, Madhya-pradesh Hindi News


एमपी के बालाघाट जिले में अज्ञात रहस्यमयी बीमारी से कम से कम सात बच्चों की मौत हो चुकी है। बच्चों में बुखार, चकत्ते और गुर्दे प्रभावित होने जैसे लक्षण दिख रहे हैं। विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ें यह रिपोर्ट…

मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के आदिवासी गांवों में एक अज्ञात रहस्यमयी बीमारी से 7 बच्चों की मौत हो चुकी है। इस बीमारी में तेज बुखार, शरीर पर चकत्ते, खून की कमी और किडनी के भी प्रभावित होने गंभीर लक्षण दिखाई दे रहे हैं। बीमारी के सटीक कारणों का पता लगाने के लिए मरीजों के सेंपल नमूने पुणे की प्रयोगशाला भेजे गए हैं। विशेषज्ञों की टीम हालात पर नजर रख रही है। वहीं कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को लेटर लिखकर प्रभावित गांवों में मेडिकल सुविधाएं भेजने की मांग की है।

इन गांवों में फैली बीमारी

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि बालाघाट जिले के बिरसा विकासखंड के अडोरी, मच्छुरदा पंचायत, बोंदारी और कुंडेकसा समेत कई गांवों में यह अज्ञात बीमारी फैली है। इस बीमारी से मौत का नया मामला सोमवार रात दर्ज किया गया जब जिला अस्पताल में उपचार के दौरान 3 साल की बच्ची की मौत हो गई।

7 बच्चों की मौत

इसके साथ ही बीमारी से मरने वालों की संख्या 7 हो गई है। अधिकारियों ने बताया कि मृत बच्ची की पहचान स्थानीय निवासी सुखचंद धुर्वे की बेटी प्रियंका के रूप में हुई है। उसे नौ अगस्त को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अगले ही दिन उसकी मौत हो गई। सिविल सर्जन डॉ. निलय जैन ने बच्ची की मौत की पुष्टि करते हुए कहा कि वह कई बीमारियों से पीड़ित थी।

इन बच्चों ने गंवाई जान

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. परेश उपल्लव ने बताया कि 26 जून से 6 अगस्त के बीच बोंदारी और कुंडेकसा गांवों के 6 बच्चों की मौत हुई। इनमें लमानिन धुर्वे (13), साहिल धुर्वे (1), पूजा धुर्वे (एक वर्ष नौ माह), सचिन मरकाम (5), प्रीति मरकाम (4) और अरविंद धुर्वे (4) शामिल हैं। एक अन्य बच्चे की सोमवार को बीमारी से मौत की सूचना है। हालांकि अधिकारियों ने इसकी पुष्टि नहीं की है।

क्या हैं बीमारी के लक्षण?

अधिकारियों ने बताया कि जबलपुर मेडिकल कॉलेज के सहायक प्रोफेसर डॉ. रवींद्र विष्णोई, बाल रोग विशेषज्ञों और स्थानीय मेडिकल टीम ने प्रभावित बच्चों की जांच की है लेकिन बीमारी के सटीक कारण का पता नहीं चल सका है। प्रभावित बच्चों में खून की कमी, शरीर में पानी की कमी, किडनी में समस्या, सर्दी, बुखार, एक्जिमा और फंगल संक्रमण जैसे लक्षण मिल रहे हैं। बच्चों के शरीर पर रहस्यमय चकत्ते उभर रहे हैं।

दिग्विजय सिंह ने लिखा लेटर

अधिकारियों ने बताया कि मरीजों के सेंपल जांच के लिए पुणे स्थित प्रयोगशाला भेजे गए हैं। रिपोर्ट का इंतजार है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली एम्स की एक टीम भी बालाघाट पहुंच रही है। इस बीच, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को लेटर लिखकर जिले में बच्चों की मौतों की ओर ध्यान दिलाया है।

40 से 50 बच्चे लड़ रहे जिंदगी की जंग

दिग्विजय सिंह ने गंभीर चिंता जताते हुए दावा किया कि बालाघाट के बिरसा आदिवासी विकासखंड में पिछले एक हफ्ते में दूषित पानी और संक्रामक बीमारियों के कारण 11 बच्चों की मौत हुई है। दिग्विजय सिंह ने कहा कि अब तक 100 से अधिक बच्चों को बालाघाट जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इनमें 40 से 50 बच्चे जीवन के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

जिला अस्पताल का बच्चा वार्ड मरीजों से भरा

दिग्विजय सिंह ने आदिवासी नेता शुभम उइके के हवाले से कहा कि जिला अस्पताल का बच्चों का वार्ड मरीजों से भर गया है। अब तक 11 बच्चों की मौत हो चुकी है। बोंदारी गांव के मजदूर समरू धुर्वे के दो बच्चों की मौत हुई। इसी तरह पांच अन्य बच्चों की तेज बुखार से मौत होने का दावा भी पत्र में किया गया है।

पीड़ितों के लिए 10 लाख की मदद देने की मांग

दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से स्वास्थ्य मंत्री और प्रमुख सचिव को चिकित्सा विशेषज्ञों के साथ प्रभावित गांवों का दौरा करने और वहां कैंप लगाने के निर्देश देने की मांग की। उन्होंने हर पीड़ित परिवार को मुख्यमंत्री राहत कोष से 10 लाख रुपये की आर्थिक मदद देने और गंभीर रूप से बीमार बच्चों को एयर एम्बुलेंस से नागपुर, रायपुर या भोपाल ले जाने की मांग की। उनका कहना है कि सरकार को बच्चों के इलाज का खर्च उठाना चाहिए।



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