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जन्म से पहले भगवान श्रीकृष्ण को खीरे में क्यों रखा जाता है? जन्माष्टमी से जुड़ी रोचक परंपरा, देखें तस्वीरें

Admin by Admin
September 4, 2026
in उत्तर प्रदेश
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जन्म से पहले भगवान श्रीकृष्ण को खीरे में क्यों रखा जाता है? जन्माष्टमी से जुड़ी रोचक परंपरा, देखें तस्वीरें


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जन्म से पहले कान्हा को खीरे में क्यों रखा जाता है? जन्माष्टमी से जुड़ी परंपरा

Last Updated:September 04, 2026, 14:09 IST

Kanpur News: कानपुर में जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की एक अनोखी परंपरा निभाई जाती है. खीरे से कान्हा के जन्म की यह परंपरा आज भी कई घरों में प्रचलित है. आइए भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की इस अनोखी परंपरा के बारे में जानते हैं.

कानपुर में जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की एक अनोखी परंपरा आज भी कई घरों में निभाई जाती है. रात 12 बजे भगवान के जन्म के समय खीरे के अंदर रखे लड्डू गोपाल या शालिग्राम को बाहर निकाला जाता है. इसे भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का प्रतीक माना जाता है. खीरे को काटकर जैसे ही भगवान को बाहर निकाला जाता है, घर में जन्मोत्सव शुरू हो जाता है. इसके बाद भगवान का दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक किया जाता है.

ज्योतिषाचार्य पं. कमलापति त्रिपाठी के मुताबिक, खीरे के अंदर भगवान को रखना और आधी रात को बाहर निकालना केवल पूजा की रस्म नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध भगवान के जन्म से जोड़ा जाता है. खीरे के अंदर लड्डू गोपाल या शालिग्राम को रखना गर्भ में भगवान के होने का प्रतीक माना जाता है. रात 12 बजे खीरे को काटकर भगवान को बाहर निकालना उनके जन्म का प्रतीक है. इस दौरान परिवार के लोग भगवान के जन्म की खुशी में शंख और घंटियां बजाते हैं. मान्यता है कि इस तरह श्रद्धा से भगवान का जन्मोत्सव मनाने से घर में सुख-शांति होती है.

कई परिवारों में खीरे के अंदर लड्डू गोपाल की जगह शालिग्राम को रखा जाता है. शालिग्राम को भगवान विष्णु का स्वरूप माना जाता है और भगवान श्रीकृष्ण को विष्णु का अवतार माना गया है. इसी वजह से जन्माष्टमी पर शालिग्राम को भी भगवान के जन्म के प्रतीक के रूप में खीरे से बाहर निकाला जाता है. इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से उनका अभिषेक किया जाता है. पूजा में तुलसी दल का भी विशेष महत्व रहता है. परिवार के लोग भगवान को नए वस्त्र पहनाकर फूल और भोग अर्पित करते हैं.

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जन्माष्टमी पर रात 12 बजे का समय सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी समय भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था. इसलिए भक्त पूरे दिन व्रत रखने के बाद मध्यरात्रि में भगवान के जन्म की पूजा करते हैं. ज्योतिषाचार्य पं. कमलापति त्रिपाठी के मुताबिक, जन्मकाल में भगवान की पूजा और अभिषेक का विशेष महत्व माना गया है. जैसे ही घड़ी में 12 बजते हैं, खीरे से लड्डू गोपाल या शालिग्राम को बाहर निकालकर जन्म कराया जाता है. इसके बाद पंचामृत से अभिषेक, आरती और भोग लगाया जाता है.

भगवान के जन्म की इस परंपरा ने जन्माष्टमी पर बाजार में खीरे की मांग भी बढ़ा दी है. सामान्य दिनों में सब्जी के तौर पर बिकने वाला खीरा जन्माष्टमी पर पूजा की खास सामग्री बन जाता है. शहर के बाजारों में त्योहार के आसपास खीरे के दाम काफी बढ़ जाते हैं. इस बार कई बाजारों में एक खीरा 100 रुपये तक में बिक रहा है. दुकानदारों के मुताबिक, जन्माष्टमी की रात खीरे की मांग अचानक बढ़ जाती है. लोग पूजा के लिए अच्छी क्वालिटी और सही आकार का खीरा तलाशते हैं. मांग ज्यादा होने और उपलब्धता कम होने पर इसके दाम भी बढ़ जाते हैं.

खीरे से भगवान को बाहर निकालने के बाद अभिषेक की परंपरा निभाई जाती है. दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से पंचामृत तैयार किया जाता है. इसी पंचामृत से लड्डू गोपाल या शालिग्राम का अभिषेक किया जाता है. इसके बाद भगवान को साफ जल से स्नान कराया जाता है और नए वस्त्र पहनाए जाते हैं. ज्योतिषाचार्य पं. कमलापति त्रिपाठी के मुताबिक, भगवान के जन्मकाल में श्रद्धा से किया गया पूजन मन को शांति देने वाला माना जाता है. अभिषेक के बाद भगवान को माखन-मिश्री, फल और अन्य प्रसाद चढ़ाया जाता है.

First Published :

September 04, 2026, 14:09 IST



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