प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बनारस में बाढ़ की स्थिति पर यहां के मेयर अशोक तिवारी और जिलाधिकारी से बातचीत की है। फोन पर राहत शिविरों और अन्य व्यस्थाओं के बारे में जानकारी ली और कई निर्देश दिए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में बाढ़ की स्थिति जानी। उन्होंने गुरुवार को महापौर अशोक तिवारी और डीएम सत्येंद्र कुमार से फोन पर बातचीत की। प्रधानमंत्री ने नदी के जलस्तर पर नजर रखते हुए राहत शिविर की व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए हैं। वहीं, बलिया में गंगा अपने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ते हुए हाई फ्लड की ओर बढ़ रही हैं। इससे कई इलाकों में खलबली मची हुई है।
वाराणसी के महापौर ने बताया कि प्रधानमंत्री ने टेलीफोन पर नगर में बाढ़ की स्थिति, बारिश से जलभराव और राहत कार्यों के बारे में पूछा। शिविरों में रह रहे लोगों के लिए खाद्य सामग्री, पेयजल, दवाओं और अन्य सुविधाओं की उपलब्धता जानी। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया है कि राहत शिविरों में शरण लिए लोगों को कोई असुविधा न हो। सभी मूलभूत सुविधाएं समय पर उपलब्ध कराई जाएं। प्रधानमंत्री ने कहा है कि आपदा की इस घड़ी में सभी जनप्रतिनिधि और पार्षद समन्वय के साथ धरातल पर कार्य करें। जनप्रतिनिधि जनता के बीच लगातार सक्रिय रहें और पीड़ितों तक हर संभव मदद पहुंचाना सुनिश्चित करें।
बाढ़ राहत कार्य युद्धस्तर पर चलाए जाएं
प्रधानमंत्री ने जिलाधिकारी से वार्ता में नदी के जलस्तर के साथ राहत कैम्पों में दी जा रही व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए हैं। कहा कि बाढ़ से लोगों को कम से कम परेशानी हो, इसका भी विशेष ध्यान रखा जाए। उन्होंने निर्देश दिया है कि जहां भी राहत सामग्री की अतिरिक्त जरूरत हो, तत्काल व्यवस्था की जाए। डीएम ने बताया कि प्रधानमंत्री ने बाढ़ और राहत कार्यों पर लगातार सतर्क नजर रखने एवं प्रभावित लोगों को अविलंब राहत पहुंचाने के भी निर्देश दिए हैं। खासकर, शिविरों में रह रहे बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों पर विशेष ध्यान देने के लिए कहा है।
16 मोहल्ले और 16 गांव बाढ़ के चपेट में
बनारस में गंगा का जलस्तर 48 घंटे पहले ही चेतावनी बिंदु पार कर गया है। केंद्रीय जल आयोग के गुरुवार शाम 4 बजे के आंकड़े के अनुसार खतरा के निशान से लगभग आधा मीटर नीचे पानी बह रहा है। जबकि एक सेंटीमीटर प्रति घंटा बढ़ाव जारी है। इससे गंगा के साथ वरुणा, असि, गोमती, नाद नदियों के तटवर्ती इलाकों में रहने वाले तीन हजार से अधिक लोगों ने राहत शिविरों समेत अन्य स्थानों पर आसरा लिया है। बाढ़ से नगर के 16 मोहल्ले एवं 16 गांवों तक बाढ़ का पानी पहुंचा है। इससे यहां के बशिंदों के दैनिक जीवन के साथ खेती-किसानी, व्यापार और कारोबार भी प्रभावित हैं।
बलिया के बैरिया संसार टोला बंधा में रिसाव से हड़कंप
वाराणसी समेत पूर्वांचल के छह जिलों में गंगा में बढ़ाव जारी है। मिर्जापुर समेत अन्य जिलों में आधा से एक सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से गंगा में बढ़ावा दर्ज किया गया। बलिया में गुरुवार शाम को गंगा खतरा बिंदु और मीडियम फ्लड को पार कर हाई फ्लड की ओर बढ़ रही थी। बलिया में बैरिया संसार टोला बंधा में रिसाव से हड़कंप मच गया। वहीं दसों जिलों में गुरुवार को कहीं हल्की तो कहीं झमाझम बारिश हुई।
भदोही में दो सेमी, वाराणसी, गाजीपुर, बलिया और चंदौली में एक सेमी और मिर्जापुर में आधा सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से गंगा बढ़ रही है। बनारस में चेतावनी बिंदु पार करने के बाद गुरुवार शाम चार बजे गंगा खतरे के निशान से करीब आधा मीटर नीचे पहुंच गई थी। बाढ़ का पानी 16 मोहल्लों और 16 गांवों तक पहुंच चुका है। तीन हजार से अधिक लोगों ने राहत शिविरों और अन्य सुरक्षित स्थानों पर शरण ली है। चंदौली में गंगा 70.62 मीटर पर पहुंच गई है, जो चेतावनी बिंदु से 36 सेंटीमीटर ऊपर है।
गाजीपुर में गंगा खतरे के निशान से 46 सेमी ऊपर
गाजीपुर में गंगा खतरे के निशान से 46 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। बलिया में गंगा की बाढ़ से दर्जनों गांव घिर चुके हैं। एक दर्जन से अधिक स्कूलों और पीएचसी नौरंगा व उदयीछपरा में पानी पहुंच गया है। रात में बैरिया क्षेत्र में हुई जोरदार बारिश और बाढ़ के के चलते सेमरिया गांव के पास बैरिया संसार टोला बंधा में रिसाव होने लगे। ग्रामीणों ने ईंट और मिट्टी भरी बोरियों से रिसाव को बंद कर दिया है। बाढ़ से कई गांवों के लोगों ने एनएच-31 और बंधों पर शरण ली है।
मिर्जापुर में गुरुवार शाम छह बजे गंगा का जलस्तर 76.050 मीटर रिकार्ड किया गया। यह जलस्तर चेतावनी बिंदु 76.724 मीटर से मात्र 67 सेमी नीचे है। गंगा के जलस्तर में वृद्धि से कोन, सीखड़,मझवां और छानबे ब्लाक के कई गांवों की फसल बाढ़ के पानी से डूब गयी। इससे किसानों को भारी क्षति पहुंची है। भदोही में गंगा चेतावनी बिन्दु की ओर तेजी से बढ़ रही है।
अन्य नदियों में भी उफान
पूर्वांचल में बेलन, बकहर, सरयू, घाघरा, कर्मनाशा, गोमती और चंद्रप्रभा भी उफान पर है। सोनभद्र में बेलन और बकहर नदी में उफान से धान की फसल डूब गई और कई गांवों का संपर्क टूट गया है। आजमगढ़ में घाघरा के बढ़ाव से दर्जनभर से अधिक गांवों के संपर्क मार्ग डूब गए हैं। डिघिया गेज पर नदी खतरे के निशान से 34 सेंटीमीटर ऊपर है। मऊ में सरयू दूसरी बार खतरा बिंदु पार कर 69.95 मीटर पर पहुंच गई है। चंदौली में कर्मनाशा और चंद्रप्रभा भी उफान पर हैं। वहीं जौनपुर में चेतावनी बिंदु पार कर गोमती स्थिर हो गई है।

