नई दिल्ली. साल 2030 में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी की तैयारी में गुजरात तेजी से जुट गया है. अहमदाबाद को अंतरराष्ट्रीय स्तर का स्पोर्ट्स हब बनाने के लिए बड़े पैमाने पर खेल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है. केंद्र और गुजरात सरकार का फोकस सिर्फ कॉमनवेल्थ गेम्स तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत को भविष्य में ओलंपिक मेजबानी की दौड़ में मजबूत दावेदार बनाना भी है. कॉमनवेल्थ गेम्स की ओपनिंग और क्लोजिंग सेरेमनी दुनिया के सबसे बड़े क्रिकेट स्टेडियम Narendra Modi Stadium में आयोजित करने का प्रस्ताव है. लाखों दर्शकों की क्षमता वाला यह स्टेडियम पहले ही अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों का बड़ा केंद्र बन चुका है. ऐसे में सरकार इसे वैश्विक खेल मंच के रूप में पेश करने की तैयारी कर रही है.
आयोजन समिति से जुड़े अधिकारियों का दावा है कि गेम्स से जुड़े सभी बड़े स्पोर्ट्स वेन्यू सितंबर 2029 तक बनकर तैयार हो जाएंगे. शहर में विश्वस्तरीय स्टेडियम, इंडोर एरिना और खेल सुविधाओं का निर्माण युद्धस्तर पर चल रहा है. फिलहाल नरेंद्र मोदी स्टेडियम और वीर सावरकर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स तैयार हो चुके हैं. इसके अलावा सबसे बड़े प्रोजेक्ट्स में सरदार पटेल स्पोर्ट्स एन्क्लेव और वीर सावरकर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स शामिल हैं. सरदार पटेल स्पोर्ट्स एन्क्लेव में एक्वेटिक सेंटर, टेनिस सेंटर, मल्टीपरपज एरिना और नरेंद्र मोदी स्टेडियम जैसे बड़े स्पोर्ट्स वेन्यू होंगे. इसके साथ ही कुछ प्रतियोगिताएं गुजरात पुलिस अकादमी में भी आयोजित की जाएंगी.
कैसे होंगे नए स्पोर्ट्स वेन्यू
जानकारी के मुताबिक 12 हजार दर्शकों की क्षमता वाला आधुनिक एक्वेटिक सेंटर साल 2029 तक तैयार हो जाएगा. वहीं टेनिस सेंटर में करीब 24 हजार दर्शकों के बैठने की व्यवस्था होगी. इसके अलावा 18 हजार दर्शकों की क्षमता वाला विशाल मल्टीपरपज एरिना भी 2029 तक बनकर तैयार हो जाएगा, जहां बास्केटबॉल, जिम्नास्टिक और दूसरे इंडोर गेम्स आयोजित किए जाएंगे. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स सेंटर का निर्माण भी 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. वहीं गुजरात पुलिस अकादमी में बन रहा 50 हजार दर्शकों की क्षमता वाला एथलेटिक्स स्टेडियम 2028 तक तैयार हो सकता है. शूटिंग सेंटर को मार्च 2029 तक पूरा करने की योजना है.
साबरमती किनारे बन रहा विशाल स्पोर्ट्स एन्क्लेव
अहमदाबाद में बन रहा सरदार पटेल स्पोर्ट्स एन्क्लेव पूरे प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा आकर्षण माना जा रहा है. यह स्पोर्ट्स एन्क्लेव साबरमती नदी के किनारे करीब 236 से 350 एकड़ क्षेत्र में विकसित किया जा रहा है. यहां एथलेटिक्स, फुटबॉल, हॉकी, बास्केटबॉल, टेनिस और स्विमिंग समेत 20 से ज्यादा ओलंपिक खेलों के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों के स्टेडियम और कोर्ट तैयार किए जा रहे हैं.पूर्वी हिस्से में एक हाईटेक टेनिस सेंटर बनाया जा रहा है, जबकि जिम्नास्टिक और बास्केटबॉल जैसी प्रतियोगिताओं के लिए 18 हजार दर्शकों की क्षमता वाला विशाल इंडोर स्टेडियम भी तैयार किया जा रहा है.
ओलंपिक मेजबानी की तैयारी भी
केंद्र और गुजरात सरकार सिर्फ कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी तक सीमित नहीं रहना चाहतीं. सरकार की कोशिश अहमदाबाद को भविष्य के ओलंपिक आयोजन के लिए तैयार करने की भी है. यही वजह है कि शहर में अंतरराष्ट्रीय स्तर का खेल इंफ्रास्ट्रक्चर, ट्रांसपोर्ट नेटवर्क और खिलाड़ियों के लिए आधुनिक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं. अगर 2030 में कॉमनवेल्थ गेम्स सफलतापूर्वक आयोजित होते हैं, तो भारत की ओलंपिक मेजबानी की दावेदारी और मजबूत हो सकती है.
AI से तैयार हो रहे भविष्य के चैंपियन
कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारियों के बीच अहमदाबाद में खिलाड़ियों को अब सिर्फ पारंपरिक तरीके से नहीं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की मदद से भी तैयार किया जा रहा है. शहर के कई स्पोर्ट्स संस्थानों में एथलीट्स को नई तकनीक और आधुनिक उपकरणों के जरिए ट्रेनिंग दी जा रही है, ताकि वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के लिए मेडल जीत सकें. इन्हीं में से एक है विजयी भारत फाउंडेशन, जहां खिलाड़ियों की ट्रेनिंग में AI और डेटा एनालिटिक्स का इस्तेमाल किया जा रहा है. यहां एथलीट्स के फिटनेस डेटा, बॉडी मूवमेंट और प्रदर्शन का लगातार विश्लेषण किया जाता है, जिससे उन्हें उनकी जरूरत के हिसाब से ट्रेनिंग दी जा सके.
गुजरात के गिर सोमनाथ की सिद्धी कम्युनिटी से आने वाली जूडो खिलाड़ी शाहीन दारजदा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई पदक जीत चुकी हैं. जिम में ट्रेनिंग के दौरान वह अपने मोबाइल ऐप में लगातार डेटा फीड करती हैं. उनका कहना है कि यह डेटा AI सिस्टम में जाकर विश्लेषित होता है और फिर उन्हें बताया जाता है कि आगे किस तरह की ट्रेनिंग करनी है. इससे उनकी तैयारी ज्यादा सटीक और प्रभावी हो रही है. स्पोर्ट्स एक्सपर्ट दीपांशी के मुताबिक तकनीक और पारंपरिक मेहनत के मेल से खिलाड़ी अब अपनी शारीरिक क्षमता की चरम सीमा तक पहुंच पा रहे हैं. इससे चोट लगने का खतरा भी कम हो रहा है और खिलाड़ियों को उनकी जरूरत के मुताबिक व्यक्तिगत ट्रेनिंग मिल रही है.
कैसे काम करता है AI?
स्पोर्ट्स साइंस से जुड़ी श्रेया गुप्ता बताती हैं कि AI खिलाड़ियों के पुराने प्रदर्शन, हार्ट रेट वेरिएबिलिटी (HRV) और ट्रेनिंग हिस्ट्री का विश्लेषण करके बेहद सटीक ट्रेनिंग प्लान तैयार करता है. इससे खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय मार्गदर्शन मिल रहा है और उनकी कमजोरियों पर खास तरीके से काम किया जा रहा है. कनुप्रिया के मुताबिक AI खिलाड़ियों के शरीर और बायोमैकेनिकल डेटा जैसे मांसपेशियों के तनाव और मूवमेंट पर लगातार नजर रखता है. इससे संभावित चोटों का खतरा पहले ही पता चल जाता है और कोच समय रहते ट्रेनिंग लोड को कम या ज्यादा कर सकते हैं.
विजयी भारत फाउंडेशन के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर आदित्य अवस्थी ने बताया कि खेलो इंडिया जैसी पहलों के जरिए AI और डेटा एनालिटिक्स का इस्तेमाल 9 से 18 साल के बच्चों में छिपी खेल प्रतिभाओं को पहचानने के लिए भी किया जा रहा है. उनका कहना है कि भविष्य के बड़े खेल आयोजनों के लिए खिलाड़ियों को छोटी उम्र से ही वैज्ञानिक तरीके से तैयार किया जा रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इसी तरह तकनीक और खेल का मेल बढ़ता रहा, तो आने वाले वर्षों में भारत अंतरराष्ट्रीय खेलों में पहले से कहीं ज्यादा मजबूत दावेदार बन सकता है.
