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मुख्यालय. “ऊर्जा नगरी” का एंट्री गेट या स्थायी कबाड़ बाजार? रॉबर्ट्सगंज फ्लाईओवर के नीचे विकास की नई परिभाषा!

JK Gupta by JK Gupta
May 10, 2026
in सोनभद्र
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संवाददाता@विशाल टंडन….


कहते हैं किसी शहर की पहली छवि उसके प्रवेश द्वार से बनती है। लेकिन रॉबर्ट्सगंज ने शायद इस सिद्धांत को कुछ ज्यादा ही रचनात्मक ढंग से अपनाया है। वाराणसी शक्तिनगर हाईवे से शहर में प्रवेश करते ही चंडी होटल से साईं हॉस्पिटल तक लगभग तीन किलोमीटर लंबे फ्लाईओवर के नीचे जो दृश्य दिखाई देता है, वह किसी “स्मार्ट सिटी कॉरिडोर” से कम और “स्थायी अव्यवस्था प्रदर्शनी” से ज्यादा प्रतीत होता है। फ्लाईओवर के नीचे कबाड़ की दुकानों ने बाकायदा अपना “मिनी इंडस्ट्रियल ज़ोन” विकसित कर लिया है।

कहीं पुराने टायर, कहीं लोहे के ढेर, कहीं टूटे वाहन मानो शहर ने खुले आसमान के नीचे कबाड़ प्रबंधन की नई नीति लागू कर दी हो। वाहन मालिकों ने इस जगह को स्थायी पार्किंग और स्टोरेज हब मान लिया है, जबकि ठेले-गुमटी संचालकों ने लोकतांत्रिक भावना के तहत जहां जगह मिली, वहीं दुकान सजा ली।

नगर पालिका द्वारा कभी कराए गए सौंदर्यीकरण के अवशेष अब इतिहास की सामग्री लगते हैं। जिस सेल्फी पॉइंट को कभी शहर की नई पहचान बताया गया था, वह अब “लापता शहरी धरोहर” की श्रेणी में पहुंच चुका है। सार्वजनिक शौचालय की हालत ऐसी है कि वह स्वयं अपनी व्यथा सुनाता प्रतीत होता है“उपयोग से ज्यादा उपेक्षा मिली है।”

विडंबना यह है कि यही फ्लाईओवर यात्रियों को धूप और बारिश से राहत देता है, लोगों के इंतजार का सहारा बनता है, लेकिन अब खुद राहत की मांग करता नजर आता है। ऊपर तेज रफ्तार वाहन दौड़ते हैं और नीचे अतिक्रमण, गंदगी व अव्यवस्था शहर की छवि को धीरे-धीरे धूमिल कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का सवाल भी जायज है क्या यही वह “ऊर्जा नगरी” है जिसकी पहचान विकास, उद्योग और आधुनिकता से होनी चाहिए? या फिर शहर अनजाने में “अव्यवस्था पर्यटन” का नया मॉडल तैयार कर रहा है? स्थिति यह भी दर्शाती है कि प्रशासनिक प्रयास पूरी तरह अनुपस्थित नहीं हैं।

नगर का मुख्य चौराहा स्वर्ण जयंती चौक कुछ हद तक व्यवस्थित दिखाई देता है, लेकिन धर्मशाला चौक अब भी बदहाली पर आंसू बहाता नजर आता है। यानी समस्या का समाधान संभव है, यदि इच्छाशक्ति और नियमित निगरानी दोनों मौजूद हों। अब आवश्यकता केवल सफाई अभियान की नहीं, बल्कि स्पष्ट शहरी योजना, अतिक्रमण नियंत्रण, पार्किंग व्यवस्था और सार्वजनिक स्थानों के पुनर्विकास की है। क्योंकि शहर का प्रवेश द्वार केवल रास्ता नहीं होता, वही शहर की सोच, प्राथमिकता और प्रशासनिक संवेदनशीलता का पहला परिचय भी होता है।

फिलहाल, रॉबर्ट्सगंज आने वाले यात्रियों के लिए संदेश लगभग यही है, “स्वागत है रॉबर्ट्सगंज में…कृपया शहर की छवि अपनी कल्पना से सुधार लें।”

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