संवाददाता@विशाल टंडन…..
— घंटों मोबाइल देखने की आदत से बिगड़ रही रीढ़ की सेहत, घंटों झुककर स्क्रीन देखने से बढ़ रहा खतरा, विशेषज्ञ ने दी चेतावनी

आधुनिक जीवनशैली और डिजिटल उपकरणों पर बढ़ती निर्भरता अब युवाओं के स्वास्थ्य पर भारी पड़ने लगी है। कभी उम्रदराज लोगों की बीमारी मानी जाने वाली सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस अब युवाओं और कामकाजी वर्ग में तेजी से बढ़ रही है।
बीएचयू ट्रॉमा सेंटर में पूर्व में सेवाएं दे चुके तथा वर्तमान में मेडिकल कॉलेज सोनभद्र में कार्यरत हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. अवनीश शाह ने बताया कि लंबे समय तक मोबाइल और लैपटॉप का उपयोग, गलत बैठने की आदत तथा लगातार एक ही मुद्रा में काम करना इस बीमारी के प्रमुख कारण हैं।

उन्होंने बताया कि सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस में गर्दन की हड्डियों और मांसपेशियों पर लगातार दबाव पड़ता है, जिससे शुरुआती चरण में हल्का दर्द और जकड़न होती है। समय के साथ यह दर्द कंधों और हाथों तक फैल सकता है। इसके अलावा सिर के पीछे दर्द, चक्कर आना, हाथों में झनझनाहट और सुन्नपन जैसी समस्याएं भी देखने को मिलती हैं।
डॉ. अवनीश शाह ने बताया कि लोग अक्सर शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे बीमारी गंभीर रूप ले लेती है। समय रहते एक्स-रे, एमआरआई और अन्य जांचों के माध्यम से स्थिति का पता लगाया जा सकता है और उपचार संभव है।उन्होंने बचाव के उपाय बताते हुए कहा कि काम के दौरान हर 30 से 40 मिनट पर ब्रेक लेना चाहिए, बैठते समय रीढ़ सीधी रखनी चाहिए और मोबाइल को आंखों के स्तर पर उपयोग करना चाहिए। नियमित योग और व्यायाम भी लाभकारी है।

डॉक्टर ने सलाह दी कि दिन में एक-दो बार गर्दन पर हल्की गर्म सिकाई और 10 से 15 मिनट की गर्दन की एक्सरसाइज से राहत मिलती है। ऊंचे तकिए के उपयोग से बचना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार शुरुआती अवस्था में यह समस्या दवाइयों और फिजियोथेरेपी से नियंत्रित की जा सकती है, जबकि गंभीर मामलों में ही सर्जरी की आवश्यकता पड़ती है। डॉक्टरों ने युवाओं से डिजिटल आदतों पर नियंत्रण रखने और स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहने की अपील की है।
