म्योरपुर/सोनभद्र. @संदीप अग्रहरी…..

स्थानीय खेल मैदान में चल रही रामकथा का रविवार को भव्य समापन हुआ। समापन अवसर पर कथा वाचक दिलीप कृष्ण भारद्वाज ने भगवान श्रीराम के रावण वध, अयोध्या आगमन और राजगद्दी के प्रेरक प्रसंगों का मार्मिक वर्णन किया। कथा सुनते ही पूरा पंडाल “जय श्रीराम” के उद्घोष से गूंज उठा। कथा वाचक ने बताया कि लंका में अधर्म और अत्याचार के प्रतीक रावण का वध कर भगवान श्रीराम ने धर्म की स्थापना की। उन्होंने कहा कि श्रीराम का जीवन त्याग, मर्यादा, करुणा और न्याय का आदर्श है।
रावण वध के प्रसंग का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि जब प्रभु श्रीराम ने ब्रह्मास्त्र से रावण का अंत किया, तब देवताओं ने पुष्पवर्षा कर धर्म की विजय का उत्सव मनाया। इसके पश्चात श्रीराम के अयोध्या लौटने का प्रसंग सुनाते हुए कथा वाचक ने कहा कि चौदह वर्ष के वनवास की अवधि पूर्ण कर जब प्रभु श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण अयोध्या लौटे तो नगरवासियों ने दीप जलाकर उनका भव्य स्वागत किया। अयोध्या नगरी दीपों की रोशनी से जगमगा उठी और हर ओर हर्षोल्लास का वातावरण बन गया।

यही प्रसंग दीपावली पर्व की परंपरा का आधार है। राजगद्दी के प्रसंग में उन्होंने बताया कि गुरु वशिष्ठ के मार्गदर्शन में श्रीराम का विधिवत राजतिलक हुआ और रामराज्य की स्थापना हुई। रामराज्य में न्याय, समानता और समृद्धि का वातावरण था, जहां कोई भी दुखी नहीं था। कथा वाचक ने कहा कि रामराज्य केवल एक शासन व्यवस्था नहीं, बल्कि आदर्श जीवन मूल्यों का प्रतीक है। समापन अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
आयोजन समिति के सदस्यों ने कथा वाचक का अंगवस्त्र भेंटकर सम्मान किया। अंत में आरती और प्रसाद वितरण के साथ रामकथा का समापन हुआ। इस मौके पर एससी एसटी आयोग के उपाध्यक्ष जीत सिंह खरवार, सोनाबच्चा अग्रहरी, दीपक सिंह, आशीष अग्रहरी, गणेश जायसवाल, जितेंद्र गुप्ता समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।