@जे0 के0/सोनभद्र…..

Sonbhadra । बिल्ली मारकुंडी स्थित एक खदान में हादसा के बाद 37 खदानों में खनन व परिवहन कार्य पर प्रतिबंध लगा दिया गया, खनन व क्रशर उद्योग से प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष जुड़े छोटे बड़े दुकानदार व्यापारी ट्रांसपोर्टर वाहन स्वामी व मजदूर आदि बेरोजगार हो गए जिन्हें दैनिक जीवन यापन सहित भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है । डाला उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के अध्यक्ष मुकेश जैन द्वारा बुधवार को खान सुरक्षा निदेशालय वाराणसी क्षेत्र के निदेशक को पत्र भेज कर बंद खदानों को सुरक्षित चालू करवाने की मांग किया गया।
डाला उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल अध्यक्ष मुकेश जैन ने खान सुरक्षा निदेशालय वाराणसी क्षेत्र के निदेशक को भेजे गए पत्रक के माध्यम से अवगत कराया गया कि बिल्ली मार्कुण्डी खनन क्षेत्र की एक खदान में हुए हादसे के बाद क्षेत्र की 37 खदानों के खनन-परिवहन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा देने से खनन कार्य से सिधे तौर पर जुड़े 10 हजार मजदूर बेरोजगार हो गये। इन मजदूरो पर आश्रित 30 हजार परिवार के समछ रोजी रोटी के लाले पड़ने लगें है। ये दैनिक मजदूरी करने बाले मजदूर जाड़ा, गर्मी और बरसात के दिनों में भी क्षेत्र में संचालित खदानों में काम कर अपने परिवार का भरण पोषण करते हैं।
खदानो में पत्थर ढोने के कार्य में लगे दो हजार से अधिक टीपर, पाँच सौ कम्प्रेशर मशीन, सैकड़ो पोकलैन मशीनो का संचालन पुरी तरह से ठप हो गया है। पत्थर खदानो पर पुरी तरह से निर्भर 250 कशर प्लांटो का संचालन ठप हो गया है। जिससे डाला स्टोन के नाम से दुनिया भर में मशहूर गिट्टी का उत्पादन उप हो गया है। खनन उद्योग पर निर्भर डाला, ओबरा एवं चोपन में संचालित चाय-पान, ठेला खुमचा, पंचर, सैलून आदि दुकानो पर सियापा छा गया है। खनन बंद होने से बेरोजगार मजदूरो एवं उनपर आश्रित परिवारों के समछ भूखमरी की स्थित उत्पन्न हो गया है।
हालात यही रहा तो मजबूरन दैनिक मजदूरो को गैर प्रदेशो की ओर रोजी रोटी की तलास में पलायन करना पड़ेगा।
व्यापार मंडल अध्यक्ष ने बताया कि उत्तर प्रदेश की एक ट्रिलियन डालर की अर्घ्यवस्था बनने में हर माह बनन उद्योग से 13 करोड राजस्व के रूप में भागिदारी निभाने वाले पाँच दशको से संचालित खनन को पुनःचालू कर जनपद में खुशहाली बहाल कराने की मांग किया गया। ताकि दैनिक मजदूरो का जीवन सुखमय होने के साथ ही गिट्टी उद्योग फिर से चल सके ।