रेणुकूट/सोनभद्र. @अमिताभ मिश्रा….

पिपरी में स्थित श्री चित्रगुप्त मंदिर के प्रांगण में बृहस्पतिवार को कायस्थ समाज द्वारा भगवान श्री चित्रगुप्त महाराज की पूजा-अर्चना बड़े श्रद्धा और उत्साह के साथ की गई। प्रातः से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधान से पूजा, हवन, महाआरती तथा कलम-दवात की पूजा कर समाज के लोगों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन किया।
कार्यक्रम की शुरुआत मंदिर प्रांगण की साफ-सफाई, सजावट और भजन-कीर्तन के साथ हुई। इसके पश्चात पंडितों के नेतृत्व में समाज के वरिष्ठजनों और युवाओं ने सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना, पठन-पाठन का प्रतीक मानी जाने वाली कलम, दवात, पुस्तक और कॉपी की पूजा की। इस दौरान शिक्षा, ज्ञान, लेखन और सत्यनिष्ठा के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया गया।

जिले के विभिन्न स्थानों पर भी कायस्थ समाज द्वारा भगवान चित्रगुप्त की प्रतिमाएं स्थापित कर हर्षोल्लास के साथ पूजा-अर्चना की गई। श्रद्धालुओं ने भगवान चित्रगुप्त से परिवार की सुख-समृद्धि, ज्ञान-वृद्धि और मनोवांछित फल की कामना की।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने भगवान चित्रगुप्त के जन्म, कार्य और कायस्थ वंश की उत्पत्ति पर प्रकाश डाला। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार सृष्टि की रचना के पश्चात ब्रह्माजी को जीवों के कर्मों का लेखा-जोखा रखने की चिंता हुई। इसके समाधान हेतु उन्होंने 12 हज़ार वर्ष तपस्या की, जिसके फलस्वरूप उनकी काया से एक तेजस्वी बालक का जन्म हुआ।
ब्रह्माजी ने उनका नाम ‘कायस्थ’ रखा और समस्त प्राणियों के कर्मों का लेखन-पठन का दायित्व उन्हें सौंपा। आगे चलकर उनका विवाह इरावती और शोभावती से हुआ, जिनसे उत्पन्न संतानें आज भी कायस्थ समाज की विभिन्न उपजातियों — श्रीवास्तव, निगम, कर्ण, कुलश्रेष्ठ, माथुर, सक्सेना, गौड़, अस्थाना, वाल्मीकि आदि के रूप में जानी जाती हैं।
कार्यक्रम में चित्रांश सेवा समिति के अध्यक्ष मुकुल श्रीवास्तव, सुरेश चन्द्र श्रीवास्तव, मणिशंकर सिन्हा, आशीष श्रीवास्तव, धीरज श्रीवास्तव, पवन श्रीवास्तव, पंकज कुमार श्रीवास्तव, प्रदीप कुमार श्रीवास्तव, पंकज सिन्हा, हेमन्त श्रीवास्तव, आयुष श्रीवास्तव, शुभम श्रीवास्तव, डॉ. राजीव रंजन सहित कायस्थ समाज के सैकड़ों लोग मौजूद रहे।
संगठन के पदाधिकारियों ने इस आयोजन को समाजिक एकता, सांस्कृतिक धरोहर व वैदिक परंपराओं को संजोने वाली परंपरा बताया।
