Last Updated:
Sundarkand Path: कलयुग में हनुमान जी को जागृत देवता माना जाता है. माना जाता है कि रोजाना सुंदरकांड का पाठ करने से हनुमान जी प्रसन्न होते हैं. ऐसे में सुंदरकांड की कुछ चौपाई का खास महत्व है. आइए जानते हैं.
दरअसल साधु संतों का ऐसा मानना है कि अगर आप सुंदरकांड अथवा हनुमान चालीसा की चौपाई या फिर दोहे का अनुसरण कर रहे हैं तो उसका अर्थ और मतलब भी आपको पता होना चाहिए. तभी उसका पुण्य आपको प्राप्त होगा. ऐसी स्थिति में रामचरितमानस के सुंदरकांड में गोस्वामी तुलसीदास दोहा लिखते हैं ‘अस मैं अधम सखा सुनु मोहू पर रघुबीर, कीन्ही कृपा सुमिरि गुन भरे बिलोचन नीर’…इस दोहे में हनुमान जी महाराज प्रभु राम की कृपा और अपने प्रेम को प्रकट कर रहे हैं. इसके बारे में शशिकांत दास विस्तार से बताते हैं.
कीन्ही कृपा सुमिरि गुन भरे बिलोचन नीर…अर्थात उन्होंने मुझ पर कृपा की है उनके गुणों का स्मरण करके मेरे नेत्रों में आंसू भर आते हैं .
शशिकांत दास बताते हैं कि सुंदरकांड के इस दोहे में हनुमान जी महाराज विभीषण से कहते हैं कि हमारे ऊपर प्रभु राम की विशेष कृपा है जब हम उनके गुना को याद करते हैं तो मेरी आंखों में आंसू आ जाते हैं इस दोहे में हनुमान जी महाराज भगवान राम की कृपा और अपने प्रेम को प्रकट कर रहे हैं इस दोहे का अनुसरण करने से भक्त को हनुमान जी महाराज के साथ प्रभु राम का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है साथ ही मंगल की महादशा से भी मुक्ति मिलती है.
मीडिया फील्ड में एक दशक से अधिक समय से सक्रिय. वर्तमान में News-18 हिंदी में कार्यरत. 2010 से नई दुनिया अखबार से पत्रकारिता की शुरुआत की. फिर हिंदुस्तान, ईटीवी भारत, शुक्रवार पत्रिका, नया इंडिया, वेबदुनिया समे…और पढ़ें
मीडिया फील्ड में एक दशक से अधिक समय से सक्रिय. वर्तमान में News-18 हिंदी में कार्यरत. 2010 से नई दुनिया अखबार से पत्रकारिता की शुरुआत की. फिर हिंदुस्तान, ईटीवी भारत, शुक्रवार पत्रिका, नया इंडिया, वेबदुनिया समे… और पढ़ें
