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UP TET News: उत्तर प्रदेश के हमीरपुर से हैरान कर देने वाला एक मामला सामने आया है. राठ कोतवाली क्षेत्र में एक सरकारी टीचर ने टीईटी की अनिवार्यता से परेशान होकर आत्महत्या कर ली.
हमीरपुर में टीचर ने लगाई फांसी.गौरतलब है, सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश में कहा गया है कि जिन शिक्षकों की नौकरी में पांच साल से अधिक सेवा शेष है, उन्हें अनिवार्य रूप से शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) पास करनी होगी. आदेश के बाद से प्रदेशभर के लाखों शिक्षक मानसिक दबाव में हैं. राठ ब्लॉक के गोहानी पनवाड़ी स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय में तैनात 52 वर्षीय शिक्षक गनेशीलाल अनुरागी अतरौलिया मोहल्ला के रहने वाले थे. उनके पास सैना रोड पर भी एक मकान था, जहां परिवार रहता था. शनिवार शाम उनके बेटे पीयूष ने पिता की तलाश करते हुए अतरौलिया मोहल्ले स्थित खाली पड़े मकान में प्रवेश किया, तो अंदर का दृश्य देख दंग रह गया. गनेशीलाल का शव फांसी के फंदे पर लटका हुआ था. बेटे ने तुरंत पुलिस को सूचना दी.
मानसिक दबाव में थे शिक्षक
परिजनों के अनुसार, गनेशीलाल तीन दिन पहले गया जाकर दादा-दादी का पिंडदान करने गए थे. शुक्रवार को लौटने के बाद भी वे घर नहीं पहुंचे. इसके बाद से ही परिवार बेचैनी में था. बेटे ने बताया कि पिता हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लेकर गहरे तनाव में थे. इसी दबाव में उन्होंने यह कदम उठा लिया. घटना की सूचना मिलते ही राठ कोतवाली प्रभारी रामआसरे सरोज पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे. शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया. फील्ड यूनिट की टीमें भी जांच में जुट गई हैं. कोतवाली प्रभारी ने बताया कि प्रारंभिक जांच में मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है. परिजनों के बयान और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.
गौरतलब है कि इससे पहले महोबा जिले में भी एक प्रधानाध्यापक ने टीईटी अनिवार्यता से परेशान होकर आत्महत्या कर ली थी. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद प्रदेशभर के कई शिक्षक तनाव में बताए जा रहे हैं. हजारों शिक्षक आशंका जता रहे हैं कि यदि वे टीईटी पास नहीं कर सके तो उनकी वर्षों की नौकरी खतरे में पड़ जाएगी.
शिक्षा व्यवस्था पर सवाल
इस घटना ने न सिर्फ शिक्षक समुदाय को हिलाकर रख दिया है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. सुप्रीम कोर्ट के आदेश का असर अब जमीनी स्तर पर दिखाई देने लगा है. शिक्षकों का कहना है कि लंबे समय से पढ़ा रहे अनुभवी अध्यापकों पर अचानक परीक्षा का दबाव डालना उनके मानसिक स्वास्थ्य और भविष्य दोनों पर भारी पड़ रहा है.

