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Sambhal News: संभल में 46 साल बाद मंदिर का मिलना सिर्फ एक धार्मिक खोज नहीं, बल्कि इतिहास से जुड़ी एक बड़ी घटना भी है. यह घटना बताती है कि समय और परिस्थितियों के कारण कई ऐतिहासिक धरोहरें हमारे बीच होते हुए भी ओझल हो जाती हैं. प्रशासन की पहल ने न केवल इस मंदिर को पुनर्जीवित किया, बल्कि लोगों को अपने इतिहास और आस्था से भी जोड़ा.
संभल. उत्तर प्रदेश का संभल जनपद बीते दिनों धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से सुर्खियों में रहा. यहां 46 साल बाद एक मंदिर सामने आया है, जो खग्गू सराय मोहल्ले में मिला. मंदिर के चारों ओर मुस्लिम समुदाय की बस्ती है, जबकि समय के साथ हिंदू परिवार इस क्षेत्र से पलायन कर गए थे. लंबे समय तक बंद पड़े इस मंदिर को प्रशासन ने साफ-सफाई कर फिर से पूजा-पाठ के लिए खोल दिया. यह मंदिर संभल जिले के दीपा सराय क्षेत्र का हिस्सा खग्गू सराय मोहल्ले में स्थित है. यहां के निवासी और मंदिर के पुजारी महेंद्र शर्मा का दावा है कि मंदिर लंबे समय से मकानों के बीच ढककर दब गया था. जब प्रशासन ने क्षेत्र का निरीक्षण किया, तो अचानक यह मंदिर सामने आया. प्रशासन ने तत्काल इसकी साफ-सफाई करवाई और मंदिर को खोलकर पूजा-पाठ शुरू करवाया. अब यहां रोजाना धार्मिक अनुष्ठान हो रहे हैं.
कैसे बंद हुआ मंदिर?
इतिहासकारों के अनुसार, खग्गू सराय और आसपास के मोहल्ले पहले पूरी तरह हिंदू बहुल इलाके थे. यहां शोत्रीय ब्राह्मण परिवार रहते थे. समय के साथ वे परिवार अन्य जगहों पर बसने चले गए और धीरे-धीरे यहां मुस्लिम आबादी बढ़ गई. हिंदुओं के न रहने के कारण मंदिर में पूजा-पाठ बंद हो गया. मकान बनने और बस्ती फैलने से मंदिर पूरी तरह से ढक गया और दशकों तक छिपा रहा. स्थानीय लोगों के मुताबिक, क्षेत्र में मुस्लिम आबादी बढ़ने के बावजूद मंदिर को कभी क्षति नहीं पहुंचाई गई. बस हिंदुओं के न रहने के कारण मंदिर वीरान हो गया. चारों तरफ मकान बन जाने से यह मंदिर आम लोगों की नजरों से ओझल हो गया.
सतयुग से भी पहले का इतिहास
मंदिर के पुजारी महेंद्र शर्मा का कहना है कि यह मंदिर अत्यंत प्राचीन है और इसका इतिहास सतयुग से भी पहले का बताया जाता है. हालांकि, इसकी सटीक उम्र का अनुमान लगाना संभव नहीं है. उनका दावा है कि जिस तरह यह मंदिर सामने आया है, वैसे ही इलाके में और भी प्राचीन मंदिर दबे हो सकते हैं. उन्होंने विशेष रूप से एक ऑन-रोड मंदिर का जिक्र किया, जिसके अस्तित्व की संभावना है. मंदिर का पता लगने पर प्रशासन ने तुरंत सक्रियता दिखाई. अधिकारियों ने मंदिर को खुलवाया, साफ-सफाई कराई और उसे पूजा योग्य बनाया. प्रशासन की पहल के बाद अब यहां प्रतिदिन आरती और भजन-कीर्तन हो रहे हैं.
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