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Varanasi News:आजमगढ़ के रहने वाले पंडित छन्नूलाल मिश्र ने धर्म नगरी काशी को अपना कर्मभूमि बनाया है. वह यही रहकर शास्त्रीय संगीत में महारथ हासिल की. 2010 में उन्हें पद्म भूषण सम्मान से सम्मानित किया गया. 2014 में वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावक बने.
पद्मविभूषण पण्डित छन्नूलाल मिश्र (फाइल फोटो)उनकी बेटी नर्मता मिश्रा ने लोकल 18 से कहा कि अलग अलग एक्सपर्ट डॉक्टरों की टीम उनकी देख रेख कर रही है. फिलहाल डॉक्टरों ने जांच के बाद उनके सेहत में सुधार की बात कहीं है.माना जा रहा है अगले 2 से 3 दिनों में उनकी सेहत में सुधार के बाद अस्पताल से उनकी छुट्टी हो सकती है. बीते करीब दो सालों से पंडित छन्नू लाल मिश्र मिर्जापुर में अपने बेटी के साथ रह रहे हैं.
बता दें कि आजमगढ़ के रहने वाले पंडित छन्नूलाल मिश्र ने धर्म नगरी काशी को अपना कर्मभूमि बनाया है. वह यही रहकर शास्त्रीय संगीत में महारथ हासिल की. 2010 में उन्हें पद्म भूषण सम्मान से सम्मानित किया गया. फिर 2014 में वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावक बने. वहीं, 2020 में उन्हें पदम् विभूषण सम्मान से नवाजा गया.
2 साल से मिर्जापुर में रहें छन्नूलाल
शास्त्रीय संगीत से पं. छन्नूलाल मिश्र ने लोगों के दिलों में जगह बनाई.उनका खेले मसाने में होली का गीत आज भी हर किसी के जुबान पर है.बीते 2 साल से वह गुमनामी की जिदंगी जीने के लिए मजबूर हैं. वजह उनकी द्वारा बनाई गई संपत्ति है. संपत्ति के लिए उनके एकलौते बेटे राम कुमार ने उनका साथ छोड़ दिया. 4 बेटियों में बड़ी बेटी का निधन हो चुका है. अनिता व ममता मिश्र की शादी हो गई है. सबसे छोटी बेटी नम्रता मिश्र केबीपीजी कॉलेज में संगीत विभाग में प्रोफेसर हैं. पं. छन्नूलाल मिश्र मिर्जापुर में सबसे छोटी बेटी नम्रता के घर पर रह रहे हैं.

