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इस साल बॉक्स ऑफिस कई ऐसी फिल्में रिलीज हुईं, जिसने न सिर्फ क्रिटिक्स और ऑडियंस का दिल जीता बल्कि बॉक्स ऑफिस पर भी करोड़ों रुपए की कमाई की. ‘छावा’ और ‘सैय्यारा’ ने तो रिकॉर्डतोड़ कलेक्शन किया. लेकिन कुछ ऐसी फिल्में- ‘सितारें जमीन पर’, क्रैजीक्स और ‘केसरी चैप्टर 2’ भी आई, जो बॉक्स ऑफिस ज्यादा कमाई नहीं कर सकीं, लेकिन क्रिटिक्स ने खूब पसंद किया और आईएमडीबी पर अच्छी रेटिंग मिली.

यहां हम आपको इस साल की एक और बेस्ट फिल्म के बारे में बता रहे हैं, जो बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचाने के बाद ओटीटी पर स्ट्रीम हुई. इस फिल्म की आईएमडीबी रेटिंग 7.4 है. यह एक फैमिली ड्रामा है. इसे देखकर आप हंसेंगे भी और क्लाइमैक्स तक आपकी आंखें भारी हो जाएंगी. (फोटो साभारः यूट्यू वीडियोग्रैब)

2 घंटे 21 मिनट की इस फिल्म में एक फैमिली की पूरे 21 साल की जर्नी को दिखाया गया है. इस फैमिली का एकमात्र उद्देश्य के 3 बीएचके घर खरीदने का है. इस खरीदने के लिए एक मिडिल क्लास फैमिली को किन-किन मुसीबतों का सामना करना पड़ता है. इस फिल्म नाम ‘3 बीएचके’ है. (फोटो साभारः यूट्यू वीडियोग्रैब)

‘3 बीएचके’ में शरत कुमार, सिद्धार्थ, देवयानी और मीथा रघुनाथ लीड रोल में हैं. अरविंद सच्चिदानंदम की शॉर्ट स्टोरी ‘3 बीएचके वीडु’ पर बैस्ड है. फिल्म की कहानी साल 2006 से शुरू होती है. एक फैमिली किराए के घर में शिफ्ट होती है. (फोटो साभारः यूट्यू वीडियोग्रैब)

फैमिली में वासुदेवन उनकी पत्नी शांति और उनके दो बच्चे प्रभु और आरती हैं. यह एक मिडिल क्लास फैमिली है, जो बढ़ते किराए और छोटे-छोटे घरों की समस्याओं से जूझ रही है. प्रभु एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ता है और आरती सरकारी स्कूल में. (फोटो साभारः यूट्यू वीडियोग्रैब)

वासुदेवन की फैमिली बुनियादी सुविधाओं की कमी है. उनके घर में पानी की किल्लत, बिजली कटौती और सीलन भरी दीवरों, छोटी-छोटी चीजों के लिए पैसों का मुंह देखने जैसी समस्याएं हैं. फैमिली का एक ही सपना है कि 3 बीएचके घर खरीदना है. इसके लिए वह प्लानिंग भी करते हैं. (फोटो साभारः यूट्यू वीडियोग्रैब)

वासुदेवन अपने जीवन में कभी अपना घर नहीं खरीद पाया. वह नहीं चाहता कि उसका बेटा प्रभु भी उसी तरह असफल हो. इस कारण, वह प्रभु को मैकेनिकल इंजीनियरिंग के बजाय आईटी की पढ़ाई करने के लिए मजबूर करता है, क्योंकि वह इसे एक सुरक्षित और आर्थिक रूप से फायदेमंद रास्ता मानता है. (फोटो साभारः यूट्यू वीडियोग्रैब)

प्रभु अपने पिता के सपनों और अपनी इच्छाओं के बीच फंसा हुआ है. दूसरी ओर, आरती अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को समझती है और अपने छोटे-छोटे सपनों को दबाकर परिवार की मदद करती है. पहली बार जब यह फैमिली घर खरीदने जाती है. तब उनके पास 7.50 लाख होते हैं. घर के लिए 15 लाख चाहिए होते हैं. (फोटो साभारः यूट्यू वीडियोग्रैब)

वासुदेवन और फैमिली जब 15 लाख जोड़ लेते हैं, तो उस फ्लैट की कीमत 25 लाख हो जाती है. इतने पैसे जोड़ते-जोड़ते आरती शादी के लायक हो जाती है, तो फैमिली उसकी शादी करने में पैसे लगा देती है. इन सबके बीच वासुदेवन की फैमिली के बीच कई तरह की अड़चने आती हैं. जैस वासुदेवन को नौकरी से निकाल दिया जाता है. प्रभु घरवालों से छुपकर काम करता है. फिल्म को आप प्राइम वीडियो पर देख सकते हैं. (फोटो साभारः यूट्यू वीडियोग्रैब)

