आज यही भवन केंद्रीय विद्यालय के रूप में बच्चों की पढ़ाई का केंद्र है. बच्चों के लिए यह सिर्फ एक स्कूल नहीं बल्कि ऐतिहासिक अनुभव भी है — पढ़ाई करते हुए वे समझते हैं कि उनके स्कूल की दीवारें किसी साधारण भवन की नहीं बल्कि एशिया की सबसे बड़ी फैक्ट्री से जुड़ी हुई हैं.
नीरज राय बताते हैं कि चाहे खेलकूद हो, सांस्कृतिक कार्यक्रम हों या शैक्षणिक क्षेत्र, इस स्कूल के छात्र हर क्षेत्र में देश का परचम लहराते हैं. दिल्ली के लेडी श्रीराम कॉलेज से लेकर बड़ी कंपनियों और सेना में यह स्कूल अपने छात्रों को तैयार करता है. इस साल दो छात्राओं ने राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर खेलों में चयन प्राप्त किया है. अमित सिंह, जो जिले के टॉपर रहे, अब जेएनयू में पढ़ाई कर रहे हैं.
हर साल बोर्ड परीक्षा में जनपद का टॉपर इसी स्कूल से निकलता है. यह साबित करता है कि शिक्षा की गुणवत्ता यहां लगातार बनी हुई है.
केंद्रीय विद्यालय में शिक्षा की शुरुआत 1986 में हुई और आज लगभग 40 साल बाद भी यह विद्यालय शिक्षा की गुणवत्ता और परंपरा में उत्कृष्ट बना हुआ है. हालांकि, बाढ़ के दौरान भवन का एक हिस्सा जर्जर हो गया था, जिससे कुछ साल पढ़ाई प्रभावित हुई, लेकिन वर्तमान में पूरी तरह से चालू है.
क्या बोले छात्र
रिशभ राय, 2018 बैच के छात्र और अब PepsiCo में मार्केटिंग मैनेजर, बताते हैं “इस स्कूल ने मेरे अकादमिक और व्यक्तिगत विकास में बहुत मदद की. शिक्षकों की मेहनत और मार्गदर्शन ने मेरी यात्रा को बेहतर बनाया. हालांकि, मुझे लगता है कि स्कूल की इन्फ्रास्ट्रक्चर में सुधार की जरूरत है ताकि छात्रों को और बेहतर सीखने का मौका मिले.”
गाज़ीपुर का केंद्रीय विद्यालय न केवल शिक्षा की गुणवत्ता में उत्कृष्ट है, बल्कि अपने ऐतिहासिक भवन और छात्र अनुभव के कारण एक मिसाल भी पेश करता है. 117 साल पुराने इस भवन में पढ़ाई करना बच्चों के लिए सिर्फ ज्ञान नहीं बल्कि इतिहास और गर्व का अनुभव भी है.

