पर्यटन व संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र में फार्म-स्टे आवास विकसित व संचालित करने के लिए ये निर्णय लिया है. पहली बार निवेशकों से प्रस्ताव आमंत्रित किए गए हैं. योजना के जरिए पूंजी निवेश पर सब्सिडी प्रदान की जाएगी.
10 लाख रुपये से 10 करोड़ रुपये के बीच निवेश पर 25 प्रतिशत (अधिकतम दो करोड़ रुपये),
50 करोड़ रुपये तक 20 प्रतिशत (अधिकतम 7.5 करोड़ रुपये),
200 करोड़ रुपये तक 15 प्रतिशत (अधिकतम 20 करोड़ रुपये),
500 करोड़ रुपये तक 10 प्रतिशत (अधिकतम 25 करोड़ रुपये)
500 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश पर 10 प्रतिशत (अधिकतम 40 करोड़ रुपये).
नई व्यवस्था के तहत निवेशकों को बड़े प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं. पांच करोड़ रुपये तक के बैंक ऋण पर पांच प्रतिशत ब्याज सब्सिडी उपलब्ध होगी. एक निवेशक को अधिकतम 25 लाख रुपये प्रति वर्ष की सब्सिडी मिल सकेगी, जो पांच वर्षों तक लागू रहेगी. इसके अतिरिक्त स्टांप ड्यूटी, भूमि रूपांतरण शुल्क और विकास शुल्क पर शत-प्रतिशत छूट दी जाएगी. रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं. जो इकाइयां 50 या उससे अधिक स्थानीय कर्मचारियों को नियुक्त करेंगी, उनके लिए नियोक्ता द्वारा जमा किए जाने वाले ईपीएफ योगदान की प्रतिपूर्ति सरकार करेगी. यह सुविधा भी अधिकतम पांच वर्षों तक दी जाएगी.
इसके साथ ही दिव्यांगजनोन्मुखी इकाइयों को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष सुविधा लागू की गई है. इस कदम का उद्देश्य निवेश आकर्षित करना, स्थानीय रोजगार बढ़ाना और सामाजिक रूप से संवेदनशील वर्गों को सहयोग प्रदान करना है, ताकि राज्य में औद्योगिक विकास और सामाजिक समावेशन दोनों सुनिश्चित हो सकें.
