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उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले के दारानगर में हर साल धूमधाम से ऐतिहासिक रामलीला का आयोजन होता है. इसकी शुरुआत साल 1925 में हुई थी और वर्ष 2025 में इसका 246वां आयोजन किया जा रहा है. वाराणसी के रामनगर की तर्ज पर यहां की रामलीला भी अपने भव्य मंचन और परंपरा के लिए जानी जाती है. 13 दिनों तक चलने वाली इस रामलीला का शुभारंभ मुकुट पूजन के साथ होता है, और पूरे क्षेत्र में धार्मिक उत्साह का माहौल बन जाता है.

उत्तर प्रदेश कौशांबी जिले के दारानगर में ऐतिहासिक रामलीला का आयोजन होता है. यह रामलीला सन 1925 से शुरू हुई थी. साल 2025 में 246वां रामलीला का आयोजन किया जा रहा है. वाराणसी के रामनगर की तर्ज पर ऐतिहासिक कस्बा दारानगर में आयोजित होने वाली रामलीला की तैयारियां शुरू हो गई हैं. 13 दिवसीय रामलीला का शुभारंभ मुकुट पूजन के साथ होता है. इस रामलीला की सबसे खास बात यह है कि यहां रावण वध की लीला दशहरा नहीं बल्कि एकादशी के दिन की जाती है.

कौशांबी जिले के दारानगर का रामलीला महोत्सव मुकुट पूजन के साथ शुरू होता है. रामलीला का कार्यक्रम 22 सितंबर से शुरू होगा। यह रामलीला 13 दिवसीय होता है. रामलीला में दारानगर कस्बे के छोटे बच्चों से लेकर बड़े बुजुर्ग तक कार्यक्रम में भाग लेकर इसका शुभारंभ करते हैं. यह रामलीला 246 वर्षों से लगातार हो रहा है.

धनुष यज्ञ का कार्यक्रम रामलीला के छठवें दिन आयोजन किया जाता है। इसमें धनुष यज्ञ एवं परशुराम‑लक्ष्मण संवाद के साथ राम विवाह लीला का मंचन किया जाता है. कलाकारों की शानदार प्रस्तुति देख दर्शक भावविभोर हो उठते हैं. जय श्रीराम के जयकारों से दारानगर कस्बे का म्योहरा गांव गूंज उठता है. धनुष यज्ञ में राजा जनक अपनी पुत्री सीता के लिए स्वयंवर का आयोजन करते हैं. शर्त रखी जाती है कि जो भी धनुष तोड़ेगा, उसी से सीता का विवाह होगा। स्वयंवर में कई राजा आते हैं, पर धनुष उठाने में ही असफल हो जाते हैं. गुरु की आज्ञा पाकर राम धनुष को उठाकर प्रत्यंचा चढ़ाते हैं, जिससे धनुष टूट जाता है. इसके साथ ही राम और सीता का विवाह संपन्न होता है और भगवान राम के गले में सीता जी वरमाला डालती हैं.

कौशांबी के दारानगर में दसवें दिन ऐतिहासिक कुप्पी युद्ध का आयोजन होता है. पूरे देश में ऐसा युद्ध कहीं और नहीं होता। यह खास युद्ध केवल दारानगर के दशहरा उत्सव में किया जाता है और पिछले 246 वर्षों से लगातार आयोजित हो रहा है. इस युद्ध में राम और रावण की सेनाओं के बीच कुप्पी युद्ध होता है, जिसे देखने के लिए देश और प्रदेश से लोग जुटते हैं. ऐसा अनोखा आयोजन सिर्फ कौशांबी जिले के दारानगर में ही देखने को मिलता है.

राम और रावण की सेना आमने-सामने प्लास्टिक से बने कुप्पी से युद्ध करती है; दोनों पक्षों में 25-25 सेनानी होते हैं, जो एक-दूसरे से भिड़ते हैं. युद्ध इतना रोमांचक और विकराल होता है कि दर्शकों की रोंगटे खड़े हो जाते हैं. यह कुप्पी युद्ध दो दिन चलता है – पहले दिन विजयदशमी पर चार युद्ध होते हैं और एकादशी को तीन युद्ध कराए जाते हैं. राम की सेना लाल कपड़े पहनती है, जबकि रावण की सेना काले कपड़े में युद्ध करती है. पहले दिन काले कपड़ों में सजी रावण की सेना जीत हासिल करती है, जबकि दूसरे दिन लाल कपड़े में युद्ध करने वाली राम की सेना असत्य पर सत्य की विजय का पर्व मनाती है.

कुप्पी युद्ध बेहद विकराल होता है. पहले यह युद्ध ऊँट की खाल से बनी कुप्पियों से किया जाता था, जिसमें दोनों सेनाओं को गंभीर चोटें भी लग जाती थीं. लेकिन समय के साथ इसमें बदलाव आया और अब युद्ध प्लास्टिक की बनी कुप्पियों से कराया जाता है. प्लास्टिक की कुप्पी भी लगने पर चोट पहुंचा देती है, इसलिए दोनों सेनाएं सिर से लेकर पैर तक कपड़े पहनकर खुद को बचाते हुए युद्ध करती हैं.

