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Pitru Paksha 2025: पितृपक्ष में अब ढूंढे नहीं मिल रहे कौवे, आखिर कहां गायब हो गया है यह पक्षी? क्या है इसका रहस्य?

Admin by Admin
September 9, 2025
in उत्तर प्रदेश
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Pitru Paksha 2025: पितृपक्ष में अब ढूंढे नहीं मिल रहे कौवे, आखिर कहां गायब हो गया है यह पक्षी? क्या है इसका रहस्य?
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Last Updated:September 09, 2025, 08:50 IST

Pitru Paksha 2025:: श्राद्ध पक्ष में कौओं का बड़ा महत्व होता है. इन्हें लोग पितरों का भोजन देते हैं. लेकिन कुछ समय से अब कौवे अचानक गायब होने लगे हैं. आखिर क्या है इनके गायब होने का कारण. आइए जानते हैं.

 आगरा: उत्तर प्रदेश के आगरा शहर में कौवे विलुप्त होते जा रहे हैं. यह पक्षी अब शहर में न के बराबर रह गए हैं. कनागतों यानि श्राद्ध पक्ष में कौवों का विशष महत्व माना गया है. कनागतों में लोग अपने पितृपक्ष की शांति के लिए श्राद्ध करते हैं. श्राद्ध वाले दिन कौवे के लिए भोजन निकाला जाता है, लेकिन शहर में धीरे धीरे अब कौवे दिखने बंद हो गए हैं. लगातार बढ़ता प्रदूषण, पेड़ो की अनवरत कटाई इसका मुख्य कारण है. पेड़ों की अनवरत कटाई से उन्हें घोंसले बनाने तक की जगह नहीं मिल रही है. लगातार बढ़ते प्रदूषण, दूषित वातावरण और मानव-जनित प्रदूषण भी कौवों की संख्या में कमी का एक मुख्य कारण बन रहे हैं. कौवे अधिकतर नीम, पीपल और बरगद जैसे बड़े पेड़ो पर रहते हैं, इन पेड़ों की शहर में कमी एक प्रमुख कारण बन रही है. रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के प्रयोग से भोजन के स्रोत घट गए हैं, जिससे उनकी प्रजनन क्षमता पर भी गहरा असर पड़ रहा है. गर्मियों में कौवों या अन्य पक्षियों के लिए पीने का पानी न होना भी  इन्हें विलुप्त कर रहा है. अमूमन लोग अपने घरों की छत पर पक्षियों के लिए पानी रखते हैं, लेकिन वर्तमान में अब यह कार्य भी बहुत ही सिमित मात्रा में ही लोग कर रहे हैं. पर्यावरण बचाव के साथ पक्षियों को बचाना भी बेहद जरूरी है. ऐसे में कहीं ऐसा न हो कि कुछ सालों बाद कौवे शहर और गांव दोनों से विलुप्त हो जाएं.

कौवे शहर से क्यों हो रहे हैं विलुप्त…
शहर के मशहूर पशु विशेषज्ञ डॉ. संजीव नेहरू ने बताया कि कौओं का विलुप्त होने के पीछे सबसे बड़ा कारण है कि पहले जब किसी बड़े जानवर की मृत्यु होती थी, तब उसे खुली जगह कही दूर कर आते थे. मृत जानवर के शरीर को कौवे, चील और गिद्ध जैसे पक्षी खाते थे. डॉ. बताया कि परीक्षण के दौरान पता लगा कि एक इंजेक्शन जिसका नाम डाईक्लोफिनेक है, हालांकि सरकार ने इसे अब बैन कर दिया है. डॉ. ने बताया कि डाईक्लोफिनेक सोडियम इंजेक्शन से जानवरों की किडनी पर असर पड़ने लगा था, हालत यह तक थी कि जानवरों की किडनी खराब तक हो जाती थी. उन्होंने बताया यह डाईक्लोफिनेक सोडियम इंजेक्शन जानवर के शरीर में रहता था. डॉ. नेहरू ने कहा कि ज़ब ऐसे जानवर की मौत के बाद उन्हें चील, कौवे खाते थे तो उनकी भी किडनी खराब हो जाती थी. किडनी खराब होने से कौवे, चील आदि पक्षियों की भी मौत होने लगी. डॉ. ने कहा कि यह डाईक्लोफिनेक सोडियम इंजेक्शन भी कौवे, चील के विलुप्त होने का कारण बना है.

पेड़ कटाई और प्रदूषण भी बन रहा है कोवों के लिए जानलेवा….
पशु चिकित्सक डॉ. संजीव नेहरू ने कहा कि पेड़ो की लगातार कटाई हो रही है, जोकि पक्षियों के लिए बिल्कुल ठीक नहीं है. उन्होंने कहा कि कौओं को बचाने के लिए अधिक से अधिक पेड़ पौधे लगाने चाहिए. पेड़ों की संख्या जब अधिक होगी, तो कौवे आएंगे और घोंसले बनाएंगे तो उनकी संख्या में इजाफा होगा. डॉ. ने कहा कि सरकार भी पक्षियों को बचाने के लिए मुहीम चलाई हुई है.

बढ़ती वाहनों की संख्या और प्रदूषण भी है मुख्य कारण
डॉ. संजीव नेहरू ने बताया कि शहर में लगातार वाहनों की बढ़ती संख्या जिससे प्रदूषण भी उत्पन्न होता है. डॉ. ने कहा कि कौवे ही नहीं प्रदूषण से हर जानवर परेशान हैं. उन्होंने कहा कि पर्यावरण को स्वच्छ बनाना होगा और इसके लिए जितना हो अधिक से अधिक पेड़ों को लगाना चाहिए. डॉ. नेहरू ने कहा कि अत्यधिक पेड़ों के होने से कौवे, चील आदि पक्षियों को तो बचाया जा सकता है. इससे मनुष्य को भी फ्रेस ऑक्सीजन प्राप्त होगी.

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Lalit Bhatt

मीडिया फील्ड में एक दशक से अधिक समय से सक्रिय. वर्तमान में News-18 हिंदी में कार्यरत. 2010 से नई दुनिया अखबार से पत्रकारिता की शुरुआत की. फिर हिंदुस्तान, ईटीवी भारत, शुक्रवार पत्रिका, नया इंडिया, वेबदुनिया समे…और पढ़ें

मीडिया फील्ड में एक दशक से अधिक समय से सक्रिय. वर्तमान में News-18 हिंदी में कार्यरत. 2010 से नई दुनिया अखबार से पत्रकारिता की शुरुआत की. फिर हिंदुस्तान, ईटीवी भारत, शुक्रवार पत्रिका, नया इंडिया, वेबदुनिया समे… और पढ़ें

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Location :

Agra,Uttar Pradesh

First Published :

September 09, 2025, 08:37 IST

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पितृपक्ष में अब ढूंढे नहीं मिल रहे कौवे, आखिर कहां गायब हो गया है यह पक्षी?



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