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Pitru Paksha 2025:: श्राद्ध पक्ष में कौओं का बड़ा महत्व होता है. इन्हें लोग पितरों का भोजन देते हैं. लेकिन कुछ समय से अब कौवे अचानक गायब होने लगे हैं. आखिर क्या है इनके गायब होने का कारण. आइए जानते हैं.
कौवे शहर से क्यों हो रहे हैं विलुप्त…
शहर के मशहूर पशु विशेषज्ञ डॉ. संजीव नेहरू ने बताया कि कौओं का विलुप्त होने के पीछे सबसे बड़ा कारण है कि पहले जब किसी बड़े जानवर की मृत्यु होती थी, तब उसे खुली जगह कही दूर कर आते थे. मृत जानवर के शरीर को कौवे, चील और गिद्ध जैसे पक्षी खाते थे. डॉ. बताया कि परीक्षण के दौरान पता लगा कि एक इंजेक्शन जिसका नाम डाईक्लोफिनेक है, हालांकि सरकार ने इसे अब बैन कर दिया है. डॉ. ने बताया कि डाईक्लोफिनेक सोडियम इंजेक्शन से जानवरों की किडनी पर असर पड़ने लगा था, हालत यह तक थी कि जानवरों की किडनी खराब तक हो जाती थी. उन्होंने बताया यह डाईक्लोफिनेक सोडियम इंजेक्शन जानवर के शरीर में रहता था. डॉ. नेहरू ने कहा कि ज़ब ऐसे जानवर की मौत के बाद उन्हें चील, कौवे खाते थे तो उनकी भी किडनी खराब हो जाती थी. किडनी खराब होने से कौवे, चील आदि पक्षियों की भी मौत होने लगी. डॉ. ने कहा कि यह डाईक्लोफिनेक सोडियम इंजेक्शन भी कौवे, चील के विलुप्त होने का कारण बना है.
पशु चिकित्सक डॉ. संजीव नेहरू ने कहा कि पेड़ो की लगातार कटाई हो रही है, जोकि पक्षियों के लिए बिल्कुल ठीक नहीं है. उन्होंने कहा कि कौओं को बचाने के लिए अधिक से अधिक पेड़ पौधे लगाने चाहिए. पेड़ों की संख्या जब अधिक होगी, तो कौवे आएंगे और घोंसले बनाएंगे तो उनकी संख्या में इजाफा होगा. डॉ. ने कहा कि सरकार भी पक्षियों को बचाने के लिए मुहीम चलाई हुई है.
बढ़ती वाहनों की संख्या और प्रदूषण भी है मुख्य कारण
डॉ. संजीव नेहरू ने बताया कि शहर में लगातार वाहनों की बढ़ती संख्या जिससे प्रदूषण भी उत्पन्न होता है. डॉ. ने कहा कि कौवे ही नहीं प्रदूषण से हर जानवर परेशान हैं. उन्होंने कहा कि पर्यावरण को स्वच्छ बनाना होगा और इसके लिए जितना हो अधिक से अधिक पेड़ों को लगाना चाहिए. डॉ. नेहरू ने कहा कि अत्यधिक पेड़ों के होने से कौवे, चील आदि पक्षियों को तो बचाया जा सकता है. इससे मनुष्य को भी फ्रेस ऑक्सीजन प्राप्त होगी.
मीडिया फील्ड में एक दशक से अधिक समय से सक्रिय. वर्तमान में News-18 हिंदी में कार्यरत. 2010 से नई दुनिया अखबार से पत्रकारिता की शुरुआत की. फिर हिंदुस्तान, ईटीवी भारत, शुक्रवार पत्रिका, नया इंडिया, वेबदुनिया समे…और पढ़ें
मीडिया फील्ड में एक दशक से अधिक समय से सक्रिय. वर्तमान में News-18 हिंदी में कार्यरत. 2010 से नई दुनिया अखबार से पत्रकारिता की शुरुआत की. फिर हिंदुस्तान, ईटीवी भारत, शुक्रवार पत्रिका, नया इंडिया, वेबदुनिया समे… और पढ़ें

