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Farming Tips: शलजम उगाने की ये सबसे धांसू ट्रिक, रिकॉर्ड तोड़ पैदावार, छप्पर फाड़ कमाई, थक जाएंगे बेचते-बेचते

Admin by Admin
September 8, 2025
in उत्तर प्रदेश
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Farming Tips: शलजम उगाने की ये सबसे धांसू ट्रिक, रिकॉर्ड तोड़ पैदावार, छप्पर फाड़ कमाई, थक जाएंगे बेचते-बेचते
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Last Updated:September 08, 2025, 22:42 IST

Ballia Latest News: शलजम की खेती बेहद कम लोग करते हैं, मगर इन दिनों इस सब्जी की बाजार में खूब डिमांड है. आइए जानते हैं इस खेती में कितना मुनाफा है.

बलिया: आज के समय में शलजम जैसी फायदेमंद सब्जियों की मांग तेजी से बढ़ रही है. यह एक महत्वपूर्ण सब्जी की फसल है, जिसकी खेती से किसान कम लागत में ज्यादा मुनाफा कमा सकते हैं. शलजम की फसल मुख्य रूप से 15°C से 25°C तापमान वाली जलवायु में बेहतरीन होती है. इसके लिए बलुई दोमट मिट्टी सर्वोत्तम मानी जाती है, जो बलिया में पाई जाती है. यह कहना गलत नहीं होगा कि इस औषधिय गुणों से भरपूर सब्जी की खेती कर किसान मालामाल बन सकते हैं. इसकी खेती बलिया के किसान भी अच्छा खासा कर रहे हैं. आइए शलजम की खेती का कारीगर उपाय विस्तार से जानते हैं…

श्री मुरली मनोहर टाउन स्नातकोत्तर महाविद्यालय बलिया के मृदा विज्ञान और कृषि रसायन विभाग के एचओडी प्रो. अशोक कुमार सिंह ने कहा कि शलजम की बुवाई की बात करें, तो खेत की एक बार गहरी जुताई करनी चाहिए और फिर 2 से 3 बार हल्की जुताई कर मिट्टी को भुरभुरा बनाना जरूरी है. इसके बाद खेत को समतल कर अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद या कम्पोस्ट मिला लें. इससे न केवल मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है, बल्कि पौधों को भरपूर पोषण भी मिलता है.

उन्होंने बताया कि बुवाई से पहले बीजों को फफूंदनाशी दवाओं से उपचारित करे, ताकि बीज जनित रोगों का खतरा न रह पाए. अक्सर शलजम की बुवाई सितंबर से अक्टूबर के बीच का समय उपयुक्त होता हैं. इन बीजों को 2 से 3 सेंटीमीटर गहराई में, 30 से 45 CM की पंक्ति दूरी और 10 से 15 CM पौध से पौध की दूरी पर बोना ज्यादा अच्छा होता है. जब पौधों में पहली पत्तियां निकल आएं, तो उन्हें पतला करके एक समान दूरी पर कर दें, ताकि हर पौधे को पर्याप्त स्थान और पोषण मिले. बुवाई के समय ही फास्फोरस और नाइट्रोजन की आधी मात्रा खेत में छिड़क दें.

बुवाई के लगभग 30 दिन बाद बचा हुआ आधा नाइट्रोजन डाल दें. शलजम की सिंचाई में अधिक पानी की आवश्यकता नहीं पड़ती है, लेकिन मिट्टी को नम बनाए रखना जरूरी है. हल्की और नियमित सिंचाई से जड़ों का विकास शानदार होता है. खरपतवारों को समय-समय पर हटाते रहे. शलजम की फसल लगभग 45 से 70 दिनों के भीतर तैयार हो जाती है. ध्यान रखें, जब जड़ें पूरी तरह से तैयार हो जाएं और सही से पक जाएं, तभी इसकी कटाई करें. सही समय पर कटाई से फसल की गुणवत्ता के साथ बाजार में कीमत भी शानदार मिलता है.

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Abhijeet Chauhan

न्‍यूज18 हिंदी डिजिटल में कार्यरत. वेब स्‍टोरी और AI आधारित कंटेंट में रूचि. राजनीति, क्राइम, मनोरंजन से जुड़ी खबरों को लिखने में रूचि.

न्‍यूज18 हिंदी डिजिटल में कार्यरत. वेब स्‍टोरी और AI आधारित कंटेंट में रूचि. राजनीति, क्राइम, मनोरंजन से जुड़ी खबरों को लिखने में रूचि.

Location :

Ballia,Ballia,Uttar Pradesh

First Published :

September 08, 2025, 22:42 IST

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