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Ballia Latest News: शलजम की खेती बेहद कम लोग करते हैं, मगर इन दिनों इस सब्जी की बाजार में खूब डिमांड है. आइए जानते हैं इस खेती में कितना मुनाफा है.
श्री मुरली मनोहर टाउन स्नातकोत्तर महाविद्यालय बलिया के मृदा विज्ञान और कृषि रसायन विभाग के एचओडी प्रो. अशोक कुमार सिंह ने कहा कि शलजम की बुवाई की बात करें, तो खेत की एक बार गहरी जुताई करनी चाहिए और फिर 2 से 3 बार हल्की जुताई कर मिट्टी को भुरभुरा बनाना जरूरी है. इसके बाद खेत को समतल कर अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद या कम्पोस्ट मिला लें. इससे न केवल मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है, बल्कि पौधों को भरपूर पोषण भी मिलता है.
बुवाई के लगभग 30 दिन बाद बचा हुआ आधा नाइट्रोजन डाल दें. शलजम की सिंचाई में अधिक पानी की आवश्यकता नहीं पड़ती है, लेकिन मिट्टी को नम बनाए रखना जरूरी है. हल्की और नियमित सिंचाई से जड़ों का विकास शानदार होता है. खरपतवारों को समय-समय पर हटाते रहे. शलजम की फसल लगभग 45 से 70 दिनों के भीतर तैयार हो जाती है. ध्यान रखें, जब जड़ें पूरी तरह से तैयार हो जाएं और सही से पक जाएं, तभी इसकी कटाई करें. सही समय पर कटाई से फसल की गुणवत्ता के साथ बाजार में कीमत भी शानदार मिलता है.
न्यूज18 हिंदी डिजिटल में कार्यरत. वेब स्टोरी और AI आधारित कंटेंट में रूचि. राजनीति, क्राइम, मनोरंजन से जुड़ी खबरों को लिखने में रूचि.
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