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फ्रांस में बढ़ती महंगाई और शिक्षा को लेकर प्रदर्शन जारी हैं। पहले छात्र संगठनों ने प्रदर्शन को आगे बढ़ाया अब ट्रेड यूनियन और अन्य संगठन मैदान में हैं। प्रदर्शनकारी लगातार सरकार के सामने अपनी मांगों को रख रहे हैं।
France Protest: यूरोप इस समय प्रदर्शनों की गिरफ्त में है। फ्रांस, इटली, अल्बानिया में बड़े स्तर पर प्रदर्शन जारी है। बढ़ती महंगाई और बुनियादी सुविधाओं की कमी के चलते लाखों लोग सड़कों पर हैं। पिछली सदियों में दुनिया को सभ्यता सिखाने का दंभ भरने वाले यूरोपीय देशों के हाथ पांव फूले हुए हैं। पिछले हफ्तों में हिंसक प्रदर्शनों के बाद सहमे फ्रांस में शनिवार को बड़ा प्रदर्शन हुआ। राजधानी पेरिस में करीब 1 लाख लोग सड़कों पर उतर आए। कई जगहों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प भी हुई। फ्रांसीसी अधिकारियों के मुताबिक, पूरे देश में हो रहे इन प्रदर्शनों में करीब 4 लाख से ज्यादा लोगों ने हिस्सा लिया है। हिंसा और शांति भंग करने के लिए एक हजार से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
इन तमाम प्रदर्शनों और हिंसक विरोध के बीच में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर शांति और खूबसूरती के लिए पहचाने जाने वाले फ्रांस में इतने बड़े स्तर पर प्रदर्शन क्यों हो रहे हैं। इसके अलावा इटली और अल्बानिया भी इसकी चपेट में क्यों हैं?
पेरिस फ्रांस में क्यों सड़कों पर आए लोग?
फ्रांस के अलावा अन्य यूरोपीय देश भी लगातार परेशानी से जूझ रहे हैं। यूक्रेन और ईरान में जारी युद्ध की वजह से लगातार महंगाई बढ़ रही है। इसकी असर इन देशों में भी देखने को मिल रहा है। फ्रांस में हालिया प्रदर्शन की शुरूआत स्कूलों में बुनियादी शिक्षकों और फर्नीचर की कमी से शुरू हुआ था। देखते ही देखते इस प्रदर्शन में महंगाई, शिक्षा, बेरोजगारी जैसे मुद्दे भी जुड़ गए। सितंबर में छात्रों ने फ्रांस की राजधानी पेरिस में अपने हाईस्कूल के इलाकों के आसपास प्रदर्शन करना शुरू कर दिया। देखते ही देखते बाकी लोग भी उनके साथ जुड़ गए।
पेरिस में 17 अक्तूबर को हुआ बड़ा प्रदर्शन
लगातार बनते इस प्रदर्शन का उग्र रूप 17 अक्तूबर को दिखाई दिया। हिंसक भीड़ ने पेरिस के एक बड़े हिस्से में आगजनी और लूटपाट मचानी शुरू कर दी। छात्रों के गुस्से को लेकर शुरू हुआ यह प्रदर्शन उग्र हो गया। फ्रांस के गृहमंत्रालय के मुताबिक उस दिन करीब 5 लाख से ज्यादा लोग सड़कों पर थे। इन्हें संभालने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े और हल्का बल प्रयोग भी करना पड़ा। इस विरोध प्रदर्शन में करीब 400 लोगों को हिंसा करने के लिए हिरासत में लिया गया।
मैक्रों सरकार के सामने छात्रों की 10 सूत्रीय मांग
17 अक्तूबर और उसके पहले के प्रदर्शनों को ध्यान में रखते हुए मैक्रों सरकार ने छात्रों से बात करना शुरू की। इस बातचीत में सरकार के सामने 10 सूत्रीय मांगों को रखा गया। इसमें शिक्षा में सुधार, स्कूलों की बेहतर देखभाल, शिक्षकों की कमी को पूरा करने के अलावा बेरोजगारी भत्ते की भी बात थी। मैक्रों सरकार ने इन शर्तों को पूरा करने पर ध्यान देने की बात कही। लेकिन छात्रों की तरफ से साफ किया गया कि जब तक सरकार की तरफ से कोई ऐक्शन नहीं लिया जाएगा, तब तक वह पीछे नहीं हटेंगे।
ट्रेड यूनियन और अन्य संगठन भी उतरे मैदान में
इस प्रदर्शन के बाद फ्रांस सरकार के खिलाफ ट्रेड यूनियनों, वामपंथी संगठनों, छात्र संगठनों के साथ कई अन्य दलों ने भी मैक्रों के खिलाफ प्रदर्शन करने का आह्वान कर दिया। राजधानी पेरिस के अलावा पूरे देश के कई अन्य शहरों में भी लोगों को अलग-अलग प्रदर्शन के लिए बुलावा भेजा गया।
17 अक्तूबर को हुई हिंसा से सबक लेते हुए फ्रांसीसी सरकार ने भी अपनी कमर कसी हुई थी। गृहमंत्री लॉरा नुनेज ने बताया था कि प्रदर्शनों को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए 70,000 सुरक्षाकर्मी पेरिस में तैनात किए गए हैं। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए अंतिम समय पर मार्च का रूट भी बदल दिया गया। लेकिन इससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ा। पेरिस के अलावा शफ्रांस के अन्य शहरों में भी लाखों लोग सड़क पर आ गए। इस प्रदर्शन के अंत तक एक हजार से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया है। फ्रांस सरकार ने माना कि इस प्रदर्शन में करीब 5 लाख लोग शामिल हुए थे। वही, प्रदर्शनकारियों ने इस संख्या को करीब 8 लाख बताया है।
फ्रांस में प्रदर्शन के प्रमुख कारण
फ्रांस में राष्ट्रपति मैक्रों 2017 से लगातार सत्ता में बने हुए हैं। विरोधी पार्टियां लगातार उनके खिलाफ प्रदर्शन करती रहती हैं। लेकिन इस बड़े आंदोलन के पीछे बढ़ती महंगाई वजह बनी है। युद्धों की वजह से पूरी दुनिया में महंगाई बढ़ रही है। यूरोपीय देश भी इससे अछूते नहीं है। राष्ट्रपति मैक्रों के खिलाफ पहले से मौजूद सत्ता विरोधी लहर को महंगाई ने आग का घी का काम किया है। छात्र अपने मुद्दों को लेकर सड़कों पर हैं। वहीं, श्रमिक संगठन पेंशन और वेतन के मुद्दों के लेकर सड़कों पर है। आम जनता बढ़ती महंगाई से परेशान होकर सड़कों पर है। इस तरह से यह भीड़ पहले हजारों और अब लाखों में बदल गई है।
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