Allahabad High Court News: स्कूलों में छात्रों की जन्मतिथि दर्ज करने की प्रक्रिया में गड़बड़ी का मामला सामने आया है. इसपर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चिंता जताते हुए शिक्षा विभाग को आदेश जारी किया है. कोर्ट ने कहा फर्जी आयु प्रमाण पत्र के आधार पर 19-20 साल के लड़कों को पोक्सो एक्ट में झूठा फंसाया जा रहा है. बेसिक शिक्षा विभाग फाइनल गाइड लाइन जारी करे.
कोर्ट ने कहा कि इसे रोकने के लिए स्कूल प्रवेश के समय आयु का सही रिकॉर्ड जरूरी है. बताते चले कि कोर्ट में बंटी उर्फ बंशी की ओर से याचिका दाखिल की गई थी. उसके जमानत अर्जी पर जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की सिंगल बेंच में सुनवाई हुई. जिसके बाद कोर्ट ने यह आदेश दिया. कोर्ट ने अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा को वीडियो कांफ्रेंसिंग पर बुलाया था.
पहले भी गाइडलाइन जारी करने का दिया जा चुका है निर्देश
इससे पहले शिवम यादव केस में कोर्ट ने प्रमुख सचिव, बेसिक शिक्षा, यूपी लखनऊ को स्कूल में आयु दर्ज करने पर गाइडलाइन बनाने का निर्देश दिया था. इसी क्रम में इस जमानत केस में पीड़िता की उम्र को लेकर विवाद उठा था. जिस पर कोर्ट ने 15 अक्टूबर 2026 के आदेश से अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा को हाजिर होने का आदेश दिया था.
4 में से कोई 1 उम्र प्रमाण माना जाएगा
इसपर अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा कोर्ट में पेश हुए. उन्होंने कोर्ट में बताया कि 17 सितंबर 2026 और 21 अक्टूबर 2026 को शिक्षा विभाग की बैठक कर गाइडलाइन तैयार की गई है. जिसमें कहा गया है कि प्रवेश पर 4 में से 1 दस्तावेज अनिवार्य होगा. जब जन्म-मृत्यु और विवाह रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1886 के तहत प्रमाण पत्र न हो तो उत्तर प्रदेश निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार नियमावली 2011 के नियम-9 के अनुसार इन 4 में से कोई 1 उम्र प्रमाण माना जाएगा.
इन दस्तावेजों में से कोई एक अनिवार्य
- अस्पताल या सहायक नर्स एवं आशा वर्कर रिजस्ट्रेशन पत्र
- आंगनवाड़ी का पत्र
- जन्म एवं मृत्यु संबंधी ग्राम रिजस्ट्रेशन
- माता-पिता/अभिभावक द्वारा शपथ पत्र से उम्र की घोषणा,
- क्लास टीचर के होंगे हस्ताक्षर
प्रवेश के समय पंजिका में जन्मतिथि के साथ यह भी लिखा जाएगा कि उपरोक्त 4 में से कौन सा प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया गया. संबंधित कॉलम के सामने कक्षा अध्यापक के हस्ताक्षर होंगे. चाहे प्रवेश कक्षा-1 में हो या अन्य किसी कक्षा में हो. सक्षम प्राधिकारी द्वारा मांगने पर प्रधानाध्यापक/प्रधानाध्यापिका इसी प्रारूप में प्रमाण पत्र देंगे.
घोषणा पत्र फॉर्मेट-
मैं प्रधानाध्यापक/प्रधानाध्यापिका… प्रमाणित करता/करती हूं कि मेरे विद्यालय……. के पत्रों में अंकित जन्मतिथि….. के अनुसार छात्र/छात्रा… पुत्र/पुत्री…..की आयु दिनांक…..को वर्ष…… माह….. दिन….. है.
अपर मुख्य सचिव ने बताया कि फाइनल गाइडलाइन से पहले विधि सहित अन्य विभागों से बात चल रहा है, जल्द ही जारी होगी. इसपर कोर्ट ने अपर मुख्य सचिव बेसिक के प्रयास की सराहना की और सभी विभागों को सहयोग करने का निर्देश दिया.
क्या था पूरा मामला?
यह जमानत अर्जी थाना डन्नाहर जिला मैनपुरी केस में थी. याचिकाकर्ता बंटी उर्फ बंशी पर आरोप था कि उसने शिकायतकर्ता की 16 साल की बेटी को बहला-फुसला लिया, लेकिन कोर्ट ने पाया एफआईआर में 16 साल बताया गया है. लेकिन, कक्षा-5 का सर्टिफिकेट लगाकर 14 साल से कम दिखाया गया है. जबकि पीड़िता के बयानों में खुद कहा मैंने पूर्व माध्यमिक विद्यालय जरामई, मैनपुरी से कक्षा-8 पास की है और मेरी उम्र 14 साल है.
वह अपनी मर्जी से बंटी के साथ गई क्योंकि प्रेम संबंध है. जबकि, पिता ने खुद 16 साल माना है. पुलिस को कक्षा-8 की मार्कशीट छिपाकर कक्षा-5 की दी गई.साथ ही, पीड़िता के माता-पिता ने मेडिकल परीक्षण से ही इन्कार कर दिया. याचिकाकर्ता का कोई आपराधिक इतिहास नहीं था. बताते चले कि याचिकाकर्ता बंटी 20 अगस्त 2026 से जेल में बंद हैं.

