नई दिल्ली. भारत ने 114 पदकों के साथ अपना अभियान समाप्त किया, जिसमें 30 स्वर्ण पदक शामिल रहे. इस प्रदर्शन के साथ भारत ने हांगझोऊ 2023 में जीते गए पदकों के आंकड़े को भी पीछे छोड़ दिया, जबकि इस बार भारत ने लगभग आधे खिलाड़ी ही भेजे थे. हांगझोऊ में भारत के दल में 303 खिलाड़ी शामिल थे, जबकि नागोया में सिर्फ 168 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया. इसके बावजूद पिछले प्रदर्शन से बेहतर पदक तालिका के साथ लौटना किसी शानदार उपलब्धि से कम नहीं है.
इसे अब तक का सबसे सफल एशियन पैरा गेम्स क्यों कहा जा रहा है इसका जवाब अलग-अलग खेलों में मिले पदकों के विस्तार में छिपा है. एथलेटिक्स भारत के पदकों का सबसे बड़ा आधार रहा, लेकिन शूटिंग, तीरंदाजी, बैडमिंटन और कई अन्य खेलों में भी भारतीय खिलाड़ियों ने स्वर्ण पदक जीते. पदक तालिका में शीर्ष पांच में जगह बनाना अपने आप में सराहनीय है. टोक्यो 2021 से शुरू हुआ भारतीय पैरा खेलों की प्रगति का सिलसिला लगातार आगे बढ़ रहा है.
पैरा गेम्स का बढ़ता ग्राफ
इस प्रगति को समझने के लिए कुछ आंकड़ों पर नजर डालना जरूरी है. भारत ने 2012 के लंदन पैरालंपिक खेलों में सिर्फ एक पदक जीता था. 2016 के रियो पैरालंपिक में यह संख्या बढ़कर चार हुई और 2021 के टोक्यो पैरालंपिक में भारत ने 19 पदक अपने नाम किए. इसके बाद पेरिस 2024 में भारत के पदकों की संख्या बढ़कर 29 पहुंच गई. यह भारतीय पैरा खेलों में तेजी से हो रहे सुधार का शानदार उदाहरण था. एशियन पैरा गेम्स की बात करें तो लगातार दो संस्करणों में 100 या उससे अधिक पदक जीतना इस बात का प्रमाण है कि भारत में पैरा खेलों का स्तर लगातार ऊंचा हो रहा है.
पैरा एथलीट्स को भी चाहिए पहचान
पदक जीतने वाले इन खिलाड़ियों का जश्न मनाया जाना चाहिए और उन्हें वह पहचान मिलनी चाहिए जिसके वे हकदार हैं. उनकी कहानियां लोगों तक पहुंचनी चाहिए और उनके प्रदर्शन को व्यापक स्तर पर दिखाया जाना चाहिए. उनके मुकाबलों का टीवी और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सीधा प्रसारण होना चाहिए. नागोया में जो हुआ, वह बेहद निराशाजनक था. शीतल देवी के स्वर्ण पदक जीतने वाले प्रदर्शन का लाइव प्रसारण नहीं दिखाया गया. उनकी जगह ईरान और हांगकांग के बीच बोच्चिया का मुकाबला दिखाना किसी भी तरह से स्वीकार्य नहीं था. हमें यह सुनिश्चित करने के लिए थोड़ा अतिरिक्त खर्च करने के लिए भी तैयार रहना होगा कि हमारे इन नायकों को देश देखे, पहचाने और उनका सम्मान करे. तभी इस प्रगति को लंबे समय तक बरकरार रखा जा सकेगा.
आगे की राह देखें तो भारत के पास लॉस एंजिलिस 2028 पैरालंपिक खेलों में शीर्ष 10 में जगह बनाने का वास्तविक मौका है. पेरिस में जीते गए 29 पदकों की संख्या लॉस एंजिलिस में बढ़कर 45 तक पहुंच सकती है. इस लक्ष्य को हासिल करना भारत का मिशन होना चाहिए. हालांकि, इसके लिए लगातार प्रयास, बेहतर योजना और सामूहिक प्रतिबद्धता की जरूरत होगी.
दल पर दाग भी लगा
इस शानदार प्रगति के बीच कुछ ऐसे मुद्दे भी हैं, जिनका सामना करना जरूरी है. यौन उत्पीड़न के आरोपों के बाद एक खिलाड़ी को हिरासत में लेकर वापस भेजे जाने की घटना देश के लिए शर्मनाक रही. एक ऐसा देश, जो बड़े खेल आयोजनों की मेजबानी करने की महत्वाकांक्षा रखता है, वहां इस तरह की घटनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. किसी एक व्यक्ति के कथित गलत आचरण की वजह से पूरे भारतीय दल की मेहनत और उपलब्धियों पर सवाल नहीं उठने चाहिए. लेकिन इसके साथ ही जवाबदेही तय करना और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए उचित सुधारात्मक कदम उठाना भी उतना ही जरूरी है.
शैक अरशद बने मिसाल
अंत में, सभी की प्रार्थनाएं और शुभकामनाएं शैक अरशद के साथ हैं, जो नागोया में सर्जरी से गुजरे पैरा साइकिलिस्ट हैं. पदकों की खुशी और जश्न के बीच हमें उन्हें नहीं भूलना चाहिए और न ही उनकी स्थिति से नजरें फेरनी चाहिए. मुख्य चिकित्सक अमेया कागली पूरे समय उनके साथ खड़े रहे. अरशद भी हमारे अपने हैं, ठीक उसी तरह जैसे पदक जीतने वाले हमारे अन्य खिलाड़ी. हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि उन्हें स्वस्थ होने के लिए सर्वोत्तम संभव चिकित्सा और सहायता मिले. जब डॉक्टर उन्हें इसकी अनुमति दें, तब खेल में वापसी के उनके सफर में भी हर संभव मदद दी जाए. हमें हर कदम पर उनके साथ खड़ा रहना होगा.कुल मिलाकर, नागोया एशियन पैरा गेम्स भारत के लिए शानदार रहे.
पदकों की संख्या एक कहानी बयां करती है, जबकि अलग-अलग खेलों में हुआ व्यापक सुधार दूसरी कहानी कहता है. अब सबसे बड़ी चुनौती इस उपलब्धि को आगे बढ़ाने की है. इसके लिए निरंतर निवेश, खिलाड़ियों के प्रदर्शन को अधिक प्रचार-प्रसार, मजबूत सुरक्षा व्यवस्था और अपने खिलाड़ियों को लगातार समर्थन देना जरूरी होगा.

