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Agriculture News: खेती में लागत कम करने और पैदावार बढ़ाने के लिए बहराइच के प्रगतिशील किसान त्रिलोकी पिछले 5 साल से बेड विधि और मल्चिंग तकनीक अपना रहे हैं. इस तरीके में खेत में ऊंची क्यारियां बनाकर उनके बीच नालियां तैयार की जाती हैं, जिससे सिंचाई में पानी की बचत होती है. वहीं, मल्चिंग शीट बिछाने से खरपतवार की समस्या कम होती है और निराई-गुड़ाई पर होने वाला खर्च भी बचता है. किसान त्रिलोकी के मुताबिक, 4 बीघे में इस विधि से उगाई गई फसल 1.5 से 2 लाख रुपये तक बिक जाती है, जबकि सामान्य खेती में यही कमाई करीब 1 लाख रुपये रहती है. जानिए बेड विधि और मल्चिंग कैसे काम करती है और किसान इसे अपनाकर अपनी खेती में लागत घटाने के साथ मुनाफा कैसे बढ़ा सकते हैं.
बहराइच: पारंपरिक खेती के तरीकों से हटकर अगर आधुनिक तकनीकों को अपनाया जाए, तो किसान कम लागत में भी बंपर मुनाफा कमा सकते हैं. बहराइच के ऐसे ही एक प्रगतिशील और अनुभवी किसान हैं त्रिलोकी, जो पिछले कई वर्षों से बेड विधि और मल्चिंग के जरिए सब्जियों की सफल खेती कर रहे हैं. उनकी यह आधुनिक तकनीक आसपास के किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. लोकल 18 की टीम ने जब किसान त्रिलोकी के खेतों का जायजा लिया, तो पाया कि उन्होंने अपने पूरे खेत में बेड विधि से शानदार फसल तैयार कर रखी है. आइए जानते हैं इस जादुई विधि के फायदों और इसके तौर-तरीकों के बारे में विस्तार से. जिससे बाकी किसान भाई भी मुनाफा कमा सकें.
किसान त्रिलोकी बताते हैं कि कृषि विज्ञान केंद्र की ट्रेनिंग से उन्हें 5 साल पहले बेड विधि और मल्चिंग की यह तकनीक सीखने को मिली थी. इस विधि में खेत को समतल रखने के बजाय लगभग 3 फीट चौड़े और 1 फीट ऊंचे बेड क्यारियां बनाई जाती हैं. बेड के बीच में नालियां बनाई जाती हैं, जिनमें पानी छोड़ने पर वह स्वत, पौधों की जड़ों तक पहुंच जाता है, जिससे बार-बार की सिंचाई की मेहनत और पानी की भारी बचत होती है.
खरपतवार घास-फूस से छुटकारा
बेड के ऊपर प्लास्टिक की मल्चिंग शीट बिछा दी जाती है, जिससे पौधों को छोड़कर बाकी जगह धूप नहीं मिल पाती. इससे खरपतवार उग नहीं पाते और खाद-पानी सीधे मुख्य फसल को मिलता है. पारंपरिक रोपाई में जहां मिर्च या अन्य फसलों में बार-बार निराई-गुड़ाई और लेबर पर भारी खर्च होता था, वहीं मल्चिंग लगने से वह खर्च लगभग खत्म हो जाता है.
लागत हुई कम, मुनाफा हुआ दोगुना
किसान त्रिलोकी का कहना है कि सामान्य तरीके से खेती करने पर जहां एक बीघे में 10 से 15 हजार रुपये तक का खर्च आ जाता है, वहीं बेड विधि और मल्चिंग अपनाने से लागत घटकर काफी कम रह जाती है. इसके साथ ही पैदावार पर भी इसका सकारात्मक असर पड़ता है. साधारण खेती की तुलना में बेड विधि से फसल का उत्पादन काफी अधिक होता है.
4 बीघे से 2 लाख मुनाफे का मौका
त्रिलोकी के अनुसार, 4 बीघे में बेड विधि से उगाई गई फसल बाजार में 1.5 से 2 लाख रुपये तक बिक जाती है, जबकि सामान्य खेती में वही पैदावार मात्र 1 लाख रुपये के आसपास सिमट जाती है. इस प्रकार किसानों को सीधे तौर पर 50 हजार रुपये तक का अतिरिक्त मुनाफा और कम खर्चे का लाभ मिलता है. आज के समय में खेती में सबसे बड़ी समस्या मजदूरों की उपलब्धता को लेकर आ रही है. किसान त्रिलोकी अन्य सभी अन्नदाता भाइयों को यही सलाह देते हैं कि वे पारम्परिक खेती के साथ ‘बेड विधि’ और मल्चिंग तकनीक को अपनाएं. इससे न केवल उनका समय और पैसा बचेगा, बल्कि खरपतवार की समस्या से निजात मिलने के साथ बंपर पैदावार भी हासिल होगी.
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Seema Nath is a digital journalist and content creator with 6 years of experience in journalism, including ground reporting, regional news coverage and feature writing. She currently works as a Content Producer…

