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Chitrakoot ki local news : चित्रकूट को भगवान राम की तपोस्थली के रूप में जाना जाता है. प्रभु राम का चित्रकूट से गहरा नाता रहा है. 14 वर्षों का वनवास काटने के दौरान उन्होंने यहां अपना लंबा समय बिताया था. दीपदान की परंपरा भगवान श्रीराम के स्वागत से जुड़ी बताई जाती है. लोकल 18 से चित्रकूट भरत मंदिर के महंत दिव्य जीवन दास बताते हैं कि रावण वध के बाद भगवान राम अयोध्या लौट रहे थे. इस दौरान उनका पुष्पक विमान चित्रकूट में भी उतरा. साधु-संतों और चित्रकूट की जनता ने दीपक जलाकर उनका भव्य स्वागत किया.
चित्रकूट. धर्म नगरी चित्रकूट को प्रभु श्रीराम की तपोस्थली के रूप में जाना जाता है. यहां की धार्मिक मान्यताएं और पौराणिक परंपराएं देशभर के श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करती रही हैं. ऐसा ही दीपावली से जुड़ा एक प्रसंग खूब चर्चित है. दीपावली का पर्व आते ही चित्रकूट में आस्था का अलग ही नजारा देखने को मिलता है. लाखों की संख्या में श्रद्धालु चित्रकूट पहुंचकर मंदाकिनी नदी के रामघाट पर दीपदान करते हैं. क्या आप जानते हैं कि लोग दीपदान के लिए इसी जगह पर क्यों आते हैं. भगवान राम का चित्रकूट से गहरा नाता रहा है. वनवास के दौरान उन्होंने यहां लंबा समय बिताया था. यही वजह है कि चित्रकूट को आज भी श्रीराम की तपोभूमि कहा जाता है.
दौड़ गई उमंग की लहर
स्थानीय धार्मिक मान्यताओं में दीपदान की परंपरा भगवान श्रीराम के स्वागत से जुड़ी है. मान्यता है कि रावण का वध करने और वनवास की अवधि पूरी करने के बाद भगवान श्रीराम अयोध्या लौट रहे थे. इस दौरान उनका पुष्पक विमान चित्रकूट में उतरा. इस बारे में पता लगते हैं कि लोगों की उमंग की लहर दौड़ गई. साधु-संतों और चित्रकूट की जनता ने दीपक जलाकर उनका भव्य स्वागत किया. कहते हैं कि तभी से यह परंपरा आज भी निरंतर चली आ रही है.
पांच दिन चलता है ये काम
इस बारे में लोकल 18 ने चित्रकूट भरत मंदिर के महंत दिव्य जीवन दास से बात की. वे बताते हैं कि दीपावली के मौके पर मंदाकिनी नदी का रामघाट श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बन जाता है. श्रद्धालु नदी के तट पर दीप जलाते हैं और विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं. यह मेल धनतेरस से शुरू होकर करीब 5 दिनों तक चलता है. इसमें पूरे देश से लाखों की तादाद में श्रद्धालु आते हैं. इस मौके पर भगवान राम का आशीर्वाद पाने के लिए दीपदान करने के लिए उमड़ी भक्तों की भीड़ देखते ही बनती है.
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प्रियांशु को एक दशक से ज्यादा हो गए पत्रकारिता में. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी कर अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. यहां लंबे समय तक हरिया…

