Last Updated:
यश चोपड़ा ने अपने करियर की शुरुआत साल 1959 में फिल्म ‘धूल का फूल’ के जरिए की थी. ये उनके करियर की पहली निर्देशित फिल्म थी. इस फिल्म के बाद उन्होंने कई यादगार फिल्में बनाई. वह कभी भी भीड़ का हिस्सा बनकर नहीं रहे. न ही वह किसी भी दौर में एक्सपेरिमेंट करने से डरते थे.उन्होंने अपने सुपरविजन से कई एक्टर्स की किस्मत चमकाई है. खासतौर पर शाहरुख खान को तो एक्टर से सुपरस्टार बनाने में उनका बहुत बड़ा हाथ रहा है. आज यानी 21 अक्टूबर 2012 को यश चोपड़ा ने दुनिया को अलविदा कह दिया. उनकी आखिरी निर्देशित फिल्म ‘जब तक है जान’ 13 नवंबर 2012 को रिलीज हुई थी.
बता दें कि यश चोपड़ा ने साल 1989 में चांदनी जैसी फिल्म बनाकर भी बहुत बड़ा रिस्क उठाया था. इस फिल्म को उस दौर में काफी पसंद किया गया था. फिल्म से श्रीदेवी का करियर तो सातवें आसमान पर गया ही साथ ही यश चोपड़ा के करियर के लिए भी ये फिल्म सही साबित हुई थी. उस वक्त सभी डिस्ट्रीब्यूटर्स ने इस फिल्म को लेने से इनकार कर दिया था. लेकिन यश चोपड़ा ने अपनी कहानी नहीं बदली और जिद पर अड़कर फिल्म रिलीज की बाद में उनका यही एक्सपेरिमेंट लोगों को बहुत पसंद आया था. लेकिन एक्शन के दौर में रोमांटिक फिल्म लाने का रिस्क भी यश चोपड़ा ही उठा सकते थे.
यश चोपड़ा की फिल्म ‘डर’ साल 1993 में रिलीज हुई थी. इस फिल्म में शाहरुख खान ने राहुल मेहरा का किरदार निभाया था, जो किरण यानी जूही चावला के प्यार में इस कदर डूब जाता है कि उसका जुनून खौफनाक रूप लेने लगता है. वह किरण का पीछा करता है और उसे पाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार रहता है.
उस दौर में किसी हीरो को इस तरह के नेगेटिव किरदार में दिखाना एक अलग तरह का एक्सपेरिमेंट था. उस दौर में ज्यादा हीरो रोमांटिक रोल में ही नजर आते थे. लेकिन यश चोपड़ा ने शाहरुख के किरदार के जरिए इस टैबू को तोड़ दिया था. उन्होंने अपनी फिल्म में प्यार के उस पहलू को दिखाया, जिसमें चाहत के साथ जुनून और डर भी शामिल थे.
Add News18 as
Preferred Source on Google
साल 1993 में आई डर में सनी देओल ने भी अहम भूमिका निभाई थी. ‘डर’ ने शाहरुख खान को एक अलग पहचान दिलाने में मदद की. उनकी एक्टिंग को तो दर्शकों ने काफी पसंद किया और फिल्म को भी बहुत अच्छा रिस्पॉन्स मिला था. इस फिल्म को उस वक्त राष्ट्रीय फिल्म फेयर अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था.शाहरुख खान तो इस फिल्म से रातोंरात स्टार बन गए थे.
यश चोपड़ा का जन्म 27 सितंबर 1932 को लाहौर में हुआ था, जो अब पाकिस्तान का हिस्सा है. उनका पूरा नाम यश राज चोपड़ा था. बचपन से ही उन्हें फिल्मों में दिलचस्पी थी. इसी शौक ने उन्हें हिंदी सिनेमा की दुनिया तक पहुंचाया.फिल्ममेकिंग की बारीकियां सीखने के लिए उन्होंने अपने बड़े भाई बी.आर. चोपड़ा के साथ काम किया. शुरुआत में वह सहायक के तौर पर फिल्मों से जुड़े रहे. इस दौरान उन्होंने कैमरे के पीछे रहकर कहानी को पर्दे पर उतारने और कलाकारों से काम लेने का तरीका सीखा.
साल 1959 में फिल्म ‘धूल का फूल’ के जरिए उन्होंने निर्देशन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ‘धर्मपुत्र’ और ‘वक्त’ जैसी फिल्मों ने उन्हें एक प्रतिभाशाली निर्देशक के रूप में पहचान दिलाई. साल 1965 में रिलीज हुई ‘वक्त’ में कई बड़े सितारे एक साथ नजर आए थे. इस फिल्म को दर्शकों का अच्छा रिस्पॉन्स मिला.
इसके बाद यश चोपड़ा ने ‘इत्तेफाक’ और ‘आदमी और इंसान’ जैसी फिल्मों के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. उनकी खासियत यह थी कि वह हर बार कहानी को नए अंदाज में पेश करने की कोशिश करते थे.साल 1973 में यश चोपड़ा ने अपना प्रोडक्शन हाउस यश राज फिल्म्स शुरू किया. इसी साल उनकी फिल्म ‘दाग’ रिलीज हुई, जिसने उनके नए सफर को आगे बढ़ाया.इसके बाद उन्होंने ‘दीवार’, ‘कभी-कभी’, ‘त्रिशूल’ और ‘काला पत्थर’ जैसी कई यादगार फिल्में बनाईं. ‘दीवार’ में अमिताभ बच्चन का दमदार अंदाज दर्शकों को खूब पसंद आया. इस फिल्म ने अमिताभ के एंग्री यंग मैन वाले व्यक्तित्व को और मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई.
बता दें कि यश चोपड़ा ने साल 1989 में चांदनी जैसी फिल्म बनाकर भी बहुत बड़ा रिस्क उठाया था. इस फिल्म को उस दौर में काफी पसंद किया गया था. फिल्म से श्रीदेवी का करियर तो सातवें आसमान पर गया ही साथ ही यश चोपड़ा के करियर के लिए भी ये फिल्म सही साबित हुई थी. उस वक्त सभी डिस्ट्रीब्यूटर्स ने इस फिल्म को लेने से इनकार कर दिया था. लेकिन यश चोपड़ा ने अपनी कहानी नहीं बदली और जिद पर अड़कर फिल्म रिलीज की बाद में उनका यही एक्सपेरिमेंट लोगों को बहुत पसंद आया था. लेकिन एक्शन के दौर में रोमांटिक फिल्म लाने का रिस्क भी यश चोपड़ा ही उठा सकते थे.
